मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने चिकित्सा और सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में अब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के जटिल ऑपरेशन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सटीक तरीके से किए जा सकेंगे। एम्स प्रबंधन ने मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराने के मकसद से एक अत्याधुनिक 'ब्रेन मैपिंग और माइक्रोस्कोपिक रोबोटिक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम' (बीएमएमआरसी) तकनीक को अपनी सुविधाओं में शामिल किया है। यह नई रोबोटिक प्रणाली सर्जरी करने वाले डॉक्टरों के लिए एक तरह से 'जीपीएस' का काम करेगी, जिससे बेहद संवेदनशील न्यूरोसर्जरी के दौरान होने वाले संभावित जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और मरीजों की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
मस्तिष्क के अंदर 'जीपीएस' की तरह करेगा काम
इस अपग्रेडेड और अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक का विधिवत लोकार्पण भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल द्वारा किया गया। यद्यपि एम्स भोपाल के पास पहले से ही न्यूरोसर्जरी के लिए आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, बुनियादी सुविधाएं और उपकरण मौजूद थे, लेकिन इस नई मशीनरी के आने से विभाग की तकनीकी क्षमता को एक बड़ा अपग्रेड मिला है। बीएमएमआरसी तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इसकी असाधारण सटीकता है। जब सर्जन किसी जटिल ब्रेन ट्यूमर या रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की कठिन सर्जरी कर रहे होंगे, तो यह कंप्यूटराइज्ड और रोबोटिक सिस्टम उन्हें मस्तिष्क के अंदरूनी, गहराई में छिपे और प्रभावित हिस्से तक बिल्कुल सटीक रास्ता दिखाएगा। इस उन्नत नेविगेशन या 'ब्रेन जीपीएस' की मदद से स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल प्रभावित हिस्से का ऑपरेशन संभव हो सकेगा।
हर साल आठ हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज
एम्स भोपाल का न्यूरो सर्जरी विभाग पूरे मध्य प्रदेश और आसपास के कई राज्यों के गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, इस विभाग में हर साल आठ हजार से भी अधिक न्यूरोलॉजिकल मरीजों का इलाज किया जाता है। इन मरीजों में मुख्य रूप से ब्रेन ट्यूमर, स्पाइन से जुड़ी गंभीर बीमारियां, स्ट्रोक, हाइड्रोसिफेलस, ब्रेन हैमरेज और किसी हादसे में हुए गंभीर ट्रॉमा जैसी जानलेवा समस्याओं से जूझने वाले लोग शामिल होते हैं। इतने बड़े पैमाने पर मरीजों का भार संभालने वाले इस विभाग में विशेषज्ञ न्यूरो सर्जनों की एक पूरी टीम पहले से मौजूद है। अब इस नई बीएमएमआरसी तकनीक के जुड़ जाने से अस्पताल की सर्जरी सेवाओं की गुणवत्ता और भी बेहतर हो जाएगी, जिससे इन हजारों मरीजों को और अधिक सुरक्षित इलाज मिल सकेगा।
ऑपरेशन का समय घटेगा, रिकवरी होगी तेज
इस नई मशीनरी के दूरगामी फायदों को लेकर एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप सोरते ने विस्तार से जानकारी साझा की। डॉ. सोरते के अनुसार, इस अत्याधुनिक रोबोटिक और मैपिंग तकनीक के इस्तेमाल से किसी भी जटिल न्यूरो ऑपरेशन में लगने वाला समय अब काफी कम हो जाएगा। सर्जरी का समय घटने से मरीजों को ऑपरेशन के बाद कम शारीरिक तकलीफ का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, सर्जरी में बेहतरीन सटीकता होने के कारण मरीजों की रिकवरी दर यानी अस्पताल से छुट्टी पाकर पूरी तरह स्वस्थ होने की गति भी पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज हो जाएगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि आने वाले समय में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी तमाम गंभीर बीमारियों के आधुनिक उपचार में यह रोबोटिक सिस्टम एक मील का पत्थर साबित होगा। इस नई सुविधा का सीधा लाभ न केवल भोपाल के स्थानीय निवासियों को मिलेगा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्यों से बेहतर इलाज की आस में आने वाले मरीजों को भी अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी का फायदा मिल सकेगा।




















