मानसून की फुहारें शुरू होते ही लोग बारिश में भीगने से खुद को रोक नहीं पाते, लेकिन त्वचा को लेकर एक बड़ा सवाल हमेशा बना रहता है, क्या बारिश का पानी वाकई त्वचा के लिए फायदेमंद है. पुराने जमाने में बारिश के पानी को शुद्ध माना जाता था, मगर आज के समय में हवा में धूल, धुआं, प्रदूषण और तमाम बारीक कण घुले रहते हैं. बारिश की पहली बूंदें जमीन तक पहुंचने से पहले इन्हीं गंदे कणों को अपने साथ लेकर आती हैं, इसलिए यह मान लेना गलत होगा कि हर बार बारिश में भीगना त्वचा के लिए अच्छा ही साबित होगा. जिन लोगों की त्वचा पहले से संवेदनशील है या जिन्हें मुंहासे, एलर्जी या स्किन से जुड़ी कोई अन्य दिक्कत रहती है, उन्हें खासतौर पर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.
पहली बारिश में भीगने से परहेज क्यों जरूरी
त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम का पहला बरसाती दौर सबसे ज्यादा जोखिम भरा होता है, क्योंकि इस दौरान वातावरण में जमा धूल, धुआं और प्रदूषण के कण भारी मात्रा में पानी के साथ मिल जाते हैं. यही वजह है कि साल की पहली बारिश में देर तक भीगना त्वचा के लिए नुकसानदेह माना जाता है. इसके बाद होने वाली बारिश तुलनात्मक रूप से थोड़ी साफ जरूर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है. हर बरसात के साथ हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व अलग अलग मात्रा में पानी में घुलते रहते हैं, इसलिए सावधानी बरतना हर बार जरूरी रहता है.
संवेदनशील त्वचा वालों के लिए खास चेतावनी
अगर किसी की त्वचा बेहद संवेदनशील है या उसे एक्जिमा, बार-बार होने वाले रैशेज, एलर्जी या मुंहासों की शिकायत रहती है, तो बारिश में भीगने के बाद उसकी त्वचा पर जलन और खुजली जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे लोगों को सलाह दी जाती है कि वे बारिश में लंबे समय तक भीगने से बचें, क्योंकि उनकी त्वचा प्रदूषित पानी के संपर्क में आने पर सामान्य त्वचा की तुलना में जल्दी प्रतिक्रिया करती है.
भीगने के बाद चेहरा और शरीर धोना क्यों जरूरी
अगर बारिश में भीगना हो ही जाए, तो घर पहुंचते ही सबसे पहला काम साफ पानी से चेहरा और पूरा शरीर धोना होना चाहिए. ऐसा करने से त्वचा पर चिपकी धूल, गंदगी और दूसरे बारीक कण निकल जाते हैं और वे रोमछिद्रों में जमा होकर संक्रमण या मुंहासों की वजह नहीं बन पाते. सफाई के बाद अपनी त्वचा के प्रकार के हिसाब से हल्का फेस वॉश और मॉइस्चराइजर लगाना फायदेमंद रहता है.
बरसात में भी मॉइस्चराइजर लगाना क्यों जरूरी
बहुत से लोगों की यह धारणा होती है कि बारिश के मौसम में हवा में पहले से नमी ज्यादा रहती है, इसलिए मॉइस्चराइजर लगाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन यह सोच सही नहीं है. बरसात के मौसम में भी त्वचा का प्राकृतिक तेल-नमी संतुलन बिगड़ सकता है. ऐसे में हल्का और नॉन ऑयली मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करने से त्वचा स्वस्थ बनी रहती है और उसका रूखापन या चिपचिपापन दोनों नियंत्रण में रहते हैं.
सड़कों पर जमा पानी से दूरी बनाना जरूरी
सड़कों और गलियों में जमा हुआ बारिश का पानी सीधी बारिश से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है. ऐसे जमा पानी में बैक्टीरिया, फंगस और तरह तरह की गंदगी मौजूद हो सकती है, जो त्वचा में संक्रमण फैला सकती है. अगर शरीर पर कहीं कोई कट, खरोंच या घाव है, तो ऐसे पानी के संपर्क में आने से खास तौर पर बचना चाहिए, क्योंकि इससे घाव के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है.
बादल छाए हों तब भी सनस्क्रीन जरूरी
बारिश के मौसम में आसमान में बादल छाए रहने का यह मतलब कतई नहीं है कि सूरज की हानिकारक किरणें पूरी तरह गायब हो जाती हैं. अगर दिन के समय लंबी अवधि तक घर से बाहर रहना पड़े, तो मौसम के हिसाब से हल्का सनस्क्रीन लगाना त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद करता है.
शरीर में पानी की कमी न होने दें
त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए सिर्फ बाहरी देखभाल काफी नहीं है, शरीर के भीतर पर्याप्त पानी की मात्रा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. पर्याप्त पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट रहती है और उसकी प्राकृतिक चमक बनी रहती है, जो सिर्फ क्रीम या लोशन लगाने से हासिल नहीं हो सकती.
लगातार परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलें
अगर बारिश में भीगने के बाद त्वचा पर लालपन, खुजली, सूजन, दाने या जलन लगातार बनी रहती है और आराम नहीं मिलता, तो घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते रहने के बजाय जल्द से जल्द त्वचा विशेषज्ञ से मिलकर सही सलाह लेना बेहतर रहता है, ताकि समस्या बढ़े नहीं.




















