पारंपरिक भारतीय चिकित्सा और आयुर्वेद में आंवले को अमृतफल का विशेष दर्जा दिया गया है, जिसका सीधा मतलब एक ऐसा फल है जिसके गुण अमृत के समान लाभकारी माने जाते हैं। प्राकृतिक विटामिन सी, आवश्यक खनिज तत्वों और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का यह भंडार शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए बेहद उपयोगी है। अधिकांश घरों में लोग आंवले को सीधे कच्चा चबाकर खाते हैं, तेल या मसालों के साथ इसका खट्टा अचार बनाते हैं, अथवा इसे मीठी चाशनी में डुबोकर मुरब्बे की शक्ल में उपयोग करते हैं। हालांकि, इन पारंपरिक तरीकों से अलग यदि आप हर रोज केवल एक आंवला भाप में पकाकर यानी स्टीम करके खाना अपनी आदत बना लें, तो इसके औषधीय लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं। भाप की हल्की गर्मी में पकने के कारण इसके संवेदनशील पोषक तत्व, विशेष तौर पर विटामिन सी, पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं और शरीर को इनका पूरा पोषण आसानी से हासिल होता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी
आजकल की अनियमित दिनचर्या, अत्यधिक मानसिक तनाव और असंतुलित खानपान के चलते ज्यादातर लोगों की स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसी कमजोरी की वजह से लोग मौसम बदलते ही बार-बार सर्दी, खांसी या अन्य मौसमी संक्रमणों की चपेट में आ जाते हैं। उबला अथवा भाप में सिका हुआ आंवला विटामिन सी का एक असाधारण स्रोत साबित होता है। यह विटामिन शरीर के भीतर एक बेहद असरदार एंटीऑक्सीडेंट के रूप में सक्रिय रहता है। यह हानिकारक फ्री रेडिकल्स को बेअसर करता है और कोशिकाओं में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को घटाता है। रोजाना एक स्टीम्ड आंवला अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जिससे मौसमी जुकाम और सामान्य संक्रामक बीमारियों से बचाव में ठोस मदद मिलती है।
पाचन तंत्र की मजबूती और आंतों का स्वास्थ्य
पेट से जुड़ी परेशानियां आज लगभग हर वर्ग के लोगों में आम हो चुकी हैं। गैस, भारीपन और पेट साफ न होने जैसी दिक्कतों के बीच भाप में पका आंवला शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने और पुरानी कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाता है। जब आंवले को भाप में पकाया जाता है, तो इसके रेशे सुपाच्य हो जाते हैं। इसका नियमित सेवन आंतों के भीतर मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया यानी हेल्दी गट फ्लोरा के विकास को तेज करता है। जब आंतों में मित्र बैक्टीरिया की संख्या संतुलित रहती है, तो भोजन का अवशोषण ठीक तरह से होता है, पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है और पेट से जुड़े कई अन्य विकारों का जोखिम कम हो जाता है।
त्वचा में प्राकृतिक चमक और बालों का घनापन
आंवला पारंपरिक रूप से त्वचा और बालों के लिए किसी कुदरती सौंदर्य टॉनिक से कम नहीं माना जाता। उबले हुए आंवले में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर में कोलेजन के प्राकृतिक उत्पादन को गति देते हैं। कोलेजन वास्तव में एक ऐसा आवश्यक प्रोटीन है जो त्वचा की बनावट, कसावट और उसके लचीलेपन को बरकरार रखने के लिए अनिवार्य होता है। इसके लगातार सेवन से त्वचा की सुस्ती दूर होती है और चेहरे पर एक साफ, कुदरती निखार दिखाई देने लगता है। इसके अतिरिक्त, आंवले के पोषक तत्व बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स को भीतर से पोषण देते हैं। इससे अनचाहे बालों का टूटना और झड़ना कम होता है और बाल धीरे-धीरे घने, मजबूत और चमकदार बनने लगते हैं।
दिल की सेहत की हिफाजत और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण
हृदय से जुड़े रोगों का बढ़ता फैलाव मौजूदा समय में एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इस दिशा में उबला हुआ आंवला दिल की कार्यप्रणाली को सुरक्षित और दुरुस्त रखने में उल्लेखनीय प्रभाव दिखाता है। यह रक्त में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल की मात्रा को घटाने में सहायता करता है, जबकि शरीर के लिए फायदेमंद अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल के स्तर को सुधारने में मददगार साबित होता है। कोलेस्ट्रॉल का यह सही संतुलन उच्च रक्तचाप और धमनी से जुड़ी हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक घटा देता है। साथ ही, आंवले में पाए जाने वाले सूजनरोधी गुण शरीर की अंदरूनी जलन और धमनियों की सूजन को शांत रखने में योगदान करते हैं।
उम्र के साथ आंखों की रोशनी की सुरक्षा
उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी का धुंधला होना अथवा दृष्टि का कमजोर पड़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन सही पोषण से आंखों की कोशिकाओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। भाप में पके आंवले का रोजाना सेवन आंखों के स्वास्थ्य को दीर्घकालिक संबल प्रदान करता है। आंवले में उपलब्ध भरपूर विटामिन सी और सहयोगी एंटीऑक्सीडेंट तत्व उम्र से जुड़े विकारों को दूर रखने में मदद करते हैं। यह पोषक तत्व मोतियाबिंद की शुरुआत को धीमा करने और मैकुलर डिजनरेशन जैसी आंखों की गंभीर बीमारियों के खतरे को घटाने में सहायक भूमिका निभाते हैं।
आंवले को स्टीम करने और खाने का सही तरीका
आंवले को भाप में पकाना बेहद सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है। इसके लिए सबसे पहले पूरी तरह ताजे, बेदाग और हरे आंवलों का चयन करें और उन्हें साफ ताजे पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद एक बर्तन में पानी गर्म करने के लिए रखें और पानी में उबाल आने पर उसके ऊपर छलनी या जालीदार प्लेट टिका दें। इन आंवलों को उस जाली पर रखकर ढक्कन लगा दें और भाप में करीब 7 से 10 मिनट तक पकने दें। जब आंवले पर्याप्त रूप से नरम हो जाएं और उनकी फांकें आसानी से अलग होने लगें, तब गैस बंद कर दें। आंवलों के सामान्य तापमान पर ठंडा होने के बाद इन्हें चबाकर खाया जा सकता है। कच्चा आंवला खाने में जरूरत से ज्यादा खट्टा या कसैला लगता है जिससे कई लोग इसे खा नहीं पाते, जबकि बाजार में मिलने वाले मुरब्बे में सफेद चीनी की अत्यधिक मात्रा होती है जो नियमित सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसलिए स्टीम्ड आंवला स्वाद और पोषण का सबसे उत्तम संतुलन पेश करता है।



















