रोजमर्रा की जिंदगी में कई बार अचानक खड़े होने पर सिर हल्का लगने लगता है, ऐसा महसूस होता है कि आसपास का पूरा कमरा गोल-गोल घूम रहा है या कुछ कदम चलते ही शरीर का संतुलन डगमगाने लगता है। अधिकांश लोग इस तरह के अनुभवों को केवल सामान्य थकान, काम का तनाव या खानपान में थोड़ी गड़बड़ी मानकर टाल देते हैं। कई मौकों पर कम पानी पीने, देर तक भूखे रहने या किसी छोटी वजह से रक्तचाप में क्षणिक गिरावट आने पर ऐसा होना आम बात हो सकती है। लेकिन जब यह समस्या बार-बार होने लगे और बिना किसी स्पष्ट वजह के सिर चकराने लगे, तो इसे मामूली कमजोरी समझकर छोड़ना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
चक्कर के विभिन्न रूप और वर्टिगो का असर
चक्कर आने का अनुभव हर इंसान में बिल्कुल अलग तरह से सामने आ सकता है। कुछ मरीजों को महसूस होता है कि उनका शरीर अचानक बेदम हो गया है और वे किसी भी पल जमीन पर गिरकर बेहोश हो सकते हैं। वहीं कई लोगों को ऐसा लगता है कि वे खुद स्थिर हैं लेकिन उनके चारों तरफ रखी दीवारें, पंखा और फर्नीचर तेजी से घूम रहे हैं। इस चिकित्सकीय स्थिति को वर्टिगो कहा जाता है। वर्टिगो के दौरान अक्सर मरीज को तेज मतली, उल्टी आने की भावना, ठीक से पैर न रख पाने की दिक्कत और संतुलन पूरी तरह बिगड़ने जैसी गंभीर असहजता का सामना करना पड़ता है।
अचानक खड़े होने पर सिर चकराने की वजह
बहुत देर तक कुर्सी पर बैठे रहने अथवा बिस्तर पर लेटे रहने के बाद जैसे ही कोई व्यक्ति तेजी से उठ खड़ा होता है, तो कई बार आंखों के सामने अचानक काला अंधेरा छा जाता है और सिर भारी या हल्का महसूस होने लगता है। मेडिकल भाषा में इस परेशानी का मुख्य कारण ऑर्थोस्टैटिक या पोस्टुरल हाइपोटेंशन हो सकता है। जब शरीर अपनी मुद्रा या स्थिति तेजी से बदलता है, तो कुछ पलों के लिए ब्लड प्रेशर का स्तर अचानक नीचे गिर जाता है। इस आकस्मिक गिरावट के कारण मस्तिष्क तक खून का पर्याप्त प्रवाह कुछ पलों के लिए बाधित हो जाता है। यदि उठते ही आंखों के आगे अंधेरा छाने की यह घटना अक्सर दोहराई जा रही हो, तो विशेषज्ञ चिकित्सक से इसकी गहन जांच कराना आवश्यक है।
शरीर में पानी की कमी और डिहाइड्रेशन का प्रभाव
गर्मियों के मौसम में तेज धूप, अत्यधिक पसीना बहने, उल्टी और दस्त होने, तेज बुखार चढ़ने या फिर दिनभर में जरूरत के मुताबिक पानी और अन्य तरल पदार्थ न पीने से शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। शरीर में जलस्तर कम होने पर चक्कर आने की समस्या काफी बढ़ जाती है। इसके साथ ही बार-बार तीव्र प्यास लगना, होंठ और गला सूखना, अत्यधिक सुस्ती और पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना जैसे लक्षण उभरते हैं। यदि पेशाब का रंग सामान्य की तुलना में काफी गहरा पीला नजर आने लगे, तो यह शरीर में पानी के गंभीर अभाव का प्रत्यक्ष संकेत है। डिहाइड्रेशन को समय पर नियंत्रित न करना शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
ब्लड शुगर में भारी गिरावट और एनीमिया
डायबिटीज के इलाज के तहत नियमित दवाएं या इंसुलिन लेने वाले व्यक्तियों में जब रक्त शर्करा का स्तर बहुत ज्यादा गिर जाता है, तो हाइपोग्लाइसीमिया के कारण गंभीर चक्कर आ सकते हैं। इस स्थिति में मरीज के हाथ और पैर थरथराने लगते हैं, ठंडा पसीना छूटता है, तीव्र भूख लगती है, दिल घबराने लगता है और किसी बात पर ध्यान केंद्रित करना लगभग असंभव हो जाता है। जो लोग डायबिटीज के मरीज नहीं हैं, वे भी यदि बहुत लंबे समय तक बिना कुछ खाए खाली पेट रहें तो उनका शुगर स्तर गिर सकता है। इसके अलावा शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया होने पर ऊतकों और अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने की शारीरिक क्षमता घटने लगती है। एनीमिया के कारण लगातार थकान, कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर बने रहते हैं। कई मरीजों में माइग्रेन के हमलों के साथ भी वर्टिगो और चक्कर की समस्या जुड़ जाती है।
खतरनाक लक्षण दिखने पर तुरंत लें डॉक्टरी सहायता
यदि चक्कर आने के साथ शरीर में कुछ असामान्य लक्षण भी दिखने लगें, तो इसे कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए, बोलने में अचानक लड़खड़ाहट होना, साफ देखने में दिक्कत आना या एक ही चीज की दो छवियां दिखाई देना, चेहरे अथवा हाथ-पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना, चलने में अत्यधिक लड़खड़ाहट, अचानक होश खो बैठना या सिर में अचानक असहनीय तेज दर्द उठना किसी गंभीर आपात स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसे आपातकालीन लक्षणों के सामने आते ही मरीज को बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल ले जाकर आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।



















