बरसात के दिनों में और मौसम में बदलाव आते ही पार्कों, बगीचों और सुनसान हरियाली वाली जगहों पर घूमते समय विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। ऐसी जगहों पर मौजूद घनी घास और झाड़ियों में छिपे बेहद सूक्ष्म माइट्स के काटने से इंसान स्क्रब टायफस जैसी संक्रामक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। शुरुआत में यह बीमारी आम मौसमी बुखार जैसी लगती है, जिस कारण लोग इसे हल्के में लेकर नजरअंदाज करने की भूल कर बैठते हैं। वक्त पर सही चिकित्सकीय परामर्श और उपचार न मिलने पर यह बैक्टीरियल संक्रमण गंभीर रूप धारण कर शरीर के कई अंदरूनी और महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
संक्रमण का कारण और फैलने का तरीका
यशोदा हॉस्पिटल, संजय नगर, गाजियाबाद में एमडी मेडिसिन डॉक्टर भावजीत के अनुसार, स्क्रब टायफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के जरिए फैलता है। यह बैक्टीरिया संक्रमित माइट्स के अंदर पाया जाता है और जब यह कीड़ा किसी इंसान को काटता है, तो संक्रमण रक्त में प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार के माइट्स प्राकृतिक वनस्पति, लकड़ी के ढेरों, लंबी घास और घनी झाड़ियों वाले इलाकों में ज्यादा पनपते हैं। ऐसे परिवेश में आवाजाही करने वाले या वहां काम करने वाले लोगों में इसके संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
प्रारंभिक लक्षण और खास पहचान
जब कोई व्यक्ति इस संक्रमण की जद में आता है, तो उसमें तेज बुखार, बदन में तेज दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी का एक प्रमुख लक्षण वह काला निशान या सूखा घाव होता है जो माइट के काटने वाले स्थान पर बन जाता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में एस्कर कहा जाता है। हालांकि हर संक्रमित मरीज में एस्कर का निशान बने यह बिल्कुल जरूरी नहीं होता। इसी कारण लगातार बने रहने वाले तेज बुखार और शरीर टूटने जैसे लक्षणों को कभी भी सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
लापरवाही पर अंगों की विफलता का खतरा
यदि इस बीमारी की पहचान सही समय पर न हो और उपचार में देरी हो जाए, तो स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। संक्रमण के शरीर में फैलने पर मरीज को बहुत अधिक सुस्ती या लगातार नींद आने की समस्या होने लगती है। इसके अलावा फेफड़ों पर असर पड़ने से सांस लेने में भारी तकलीफ शुरू हो सकती है। संक्रमण आगे बढ़कर लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली को भी गंभीर रूप से बाधित कर देता है, जिससे गंभीर मामलों में एक साथ कई अंगों के काम बंद करने जैसी आपात स्थिति बन सकती है।
सावधानी और बचाव के आवश्यक उपाय
डॉक्टर भावजीत का सुझाव है कि इस खतरे से बचने के लिए झाड़ियों या लंबी घास वाले इलाकों में जाते वक्त पूरे शरीर को कपड़ों से ढककर रखें। पूरी बाजू की शर्ट, पूरी लंबाई की पैंट और पैरों में जूते पहनना अनिवार्य रखें। कीटों से बचाव के लिए जरूरत पड़ने पर कीटरोधी क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही घर के आंगन, पार्क और आसपास के खुले इलाकों से गैर-जरूरी झाड़ियों तथा जंगली घास की समय-समय पर छंटाई और सफाई कराते रहें। कोई भी लक्षण नजर आने पर खुद से कोई दवा न लें और सीधे विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।

















