बिहार की राजधानी पटना में एक सड़क हादसे के तीन साल बाद 21 वर्षीय युवक के पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके दाएं हाथ को डॉक्टरों ने नई कार्यक्षमता लौटाई है। दुर्घटना के दौरान युवक के दाहिने घुटने में फ्रैक्चर हुआ था और हाथ की मुख्य तंत्रिका तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। घुटना तो प्राथमिक उपचार और प्लास्टर के बाद धीरे-धीरे संभल गया, परंतु जिस दाहिने हाथ से उसके दैनिक जीवन के करीब 90 प्रतिशत काम संपन्न होते थे, उसने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया था।
तंत्रिका तंत्र टूटने से दिमाग से कट गया था हाथ का संपर्क
जांच के दौरान पाया गया कि सड़क दुर्घटना में युवक के दाहिने हाथ की ब्रैकियल प्लेक्सस नर्व गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। ब्रैकियल प्लेक्सस शरीर में नसों का वह मुख्य नेटवर्क है जो रीढ़ की हड्डी से निकलकर कंधे, बांह और हाथ तक संदेश पहुंचाता है। चोट इतनी गहरी थी कि नसों का जाल टूटने की वजह से हाथ का मस्तिष्क से सीधा संपर्क पूरी तरह कट गया था। नतीजतन, युवक का हाथ पूरी तरह बेजान हो गया और वह उसे जरा भी ऊपर उठाने या हिलाने में असमर्थ हो गया था।
तीन साल तक इलाज की तलाश और फोर्ड अस्पताल में परामर्श
हाथ में कोई गति नहीं होने के कारण पीड़ित युवक लगभग तीन साल तक लगातार विभिन्न चिकित्सा परामर्श लेता रहा, परंतु उसे अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। इस लंबे अंतराल के बाद वह पटना स्थित फोर्ड अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में पहुंचा। वहां हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विनीत विवेक ने मरीज की स्थिति की गहन चिकित्सीय जांच की। विशेषज्ञ परामर्श के बाद डॉक्टरों ने युवक के घुटने और निष्क्रिय हाथ दोनों की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए सर्जिकल प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया।
जटिल सर्जरी और निरंतर फिजियोथेरेपी से लौटी ताकत
डॉक्टरी टीम ने आवश्यक सर्जिकल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसके बाद मरीज के लिए विशेष फिजियोथेरेपी सत्र शुरू किए गए। नसों की मरम्मत के बाद नियमित फिजियोथेरेपी के प्रभाव से निष्क्रिय पड़े हाथ में धीरे-धीरे संवेदना और गतिविधि लौटने लगी। लगातार चले इस उपचार का परिणाम यह रहा कि अब तक युवक के हाथ में करीब 90 प्रतिशत तक सुधार आ चुका है और वह अपने रोजमर्रा के सामान्य कार्य फिर से करने में सक्षम हो गया है।
ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी पर विशेषज्ञ की राय
डॉ. विनीत विवेक के अनुसार ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी एक अत्यंत जटिल चिकित्सीय स्थिति होती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हाथ की पूरी कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका समूह को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण हाथ में गंभीर कमजोरी आ जाती है अथवा उसकी गति पूरी तरह समाप्त हो जाती है, जिससे व्यक्ति के लिए सामान्य काम करना भी असंभव हो जाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसी गंभीर चोटों में समय पर सही विशेषज्ञ से जांच कराना, सटीक सर्जरी और ऑपरेशन के बाद नियमित फिजियोथेरेपी का संयोजन ही मरीज के हाथ की कार्यक्षमता को वापस लौटाने में मददगार साबित होता है।

















