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गोरखपुर में मिलावटी पनीर से रहें सावधान, घर पर ऐसे करें परखस्वास्थ्य
29 अग॰ 2026, 5:03 pm (59 दिन पहले)· 4

गोरखपुर में मिलावटी पनीर से रहें सावधान, घर पर ऐसे करें परख

बाजार में बिकने वाला पनीर असली है या मिलावटी, यह केवल देखकर पहचानना मुश्किल है। गोरखपुर खाद्य विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती जांच के तरीकों और मिलावट के खतरों के बारे में अहम जानकारियां साझा की हैं।

बाजार से पनीर खरीदते समय केवल उसका सफेद रंग, कोमलता या दाम देखकर उसे गुणवत्तापूर्ण मान लेना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। मिलावटी या अनुचित तरीके से तैयार किया गया पनीर शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले उसकी शुद्धता और गुणवत्ता पर गौर करना बहुत आवश्यक है।

खाद्य विभाग की लगातार कार्रवाई

गोरखपुर खाद्य विभाग के एसी सुधीर सिंह ने बताया कि मिलावटी पनीर बेचने और बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान विभिन्न स्थानों से संदिग्ध खाद्य पदार्थों और पनीर के नमूने भी जुटाए गए हैं। हालांकि, केवल देखकर यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि पनीर पूरी तरह असली है या नहीं, क्योंकि इसकी पक्की पुष्टि सिर्फ प्रयोगशाला परीक्षण से ही हो सकती है।

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रंग और गंध से पहचानें संकेत

आमतौर पर पनीर का रंग हल्का सफेद या क्रीम जैसा होता है। यदि कोई पनीर जरूरत से ज्यादा चमकीला या बेहद सफेद नजर आए, तो उसे केवल रंग के आधार पर बेहतर गुणवत्ता का न समझें। इसके अलावा, पनीर से आने वाली अजीब महक या उसका असामान्य स्वाद भी उसकी खराब गुणवत्ता की ओर इशारा करता है। यदि पनीर से सामान्य दूध जैसी सौंधी खुशबू के बजाय कोई अन्य गंध आए या स्वाद कड़वा लगे, तो उसके सेवन से बचना चाहिए।

पनीर की बनावट को जांचने के लिए उसे हल्के हाथ से दबाकर देखा जा सकता है। प्राकृतिक पनीर में दूध के पोषक तत्वों और वसा के कारण एक खास कोमलता और लचीलापन होता है। अगर पनीर अत्यधिक रबर जैसा खींचने वाला, असामान्य रूप से कड़क या छूने पर आसानी से बिखरने वाला है, तो सतर्क हो जाएं। हालांकि, केवल बनावट के आधार पर मिलावट की शत-प्रतिशत पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि अलग-अलग वैरायटी के पनीर में मामूली अंतर हो सकता है।

आयोडीन टेस्ट और स्टार्च की मिलावट

पनीर के अंदर स्टार्च की मिलावट का पता लगाने के लिए आयोडीन परीक्षण किया जाता है। इसके तहत पनीर के एक छोटे हिस्से पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें टपकाई जाती हैं, और यदि रंग बदलकर नीला या गहरा काला हो जाए, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। फिर भी, यह घरेलू तरीका केवल एक प्राथमिक इशारा देता है। इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि पनीर पूरी तरह नकली है या उसमें अन्य प्रकार की मिलावट नहीं की गई है। किसी भी खाद्य उत्पाद की प्रामाणिक जांच के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में परीक्षण कराना अनिवार्य होता है।

नकली पनीर में किन चीजों का होता है इस्तेमाल

खाद्य विभाग की अब तक की जांच और छापों में यह बात सामने आई है कि कई बार पनीर जैसे दिखने वाले उत्पाद तैयार करने के लिए मिल्क पाउडर, सोयाबीन आधारित सामग्री, रिफाइंड तेल और अन्य घटकों का उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में तो अखाद्य पदार्थों के मिलाए जाने की आशंका भी जताई जाती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर मिलावटी नमूने में एक जैसी ही सामग्री का प्रयोग हुआ हो। यही कारण है कि किसी एक घरेलू परीक्षण के नतीजे के आधार पर ही किसी उत्पाद को पूरी तरह नकली घोषित कर देना सही कदम नहीं है।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे

भोजन में डिटर्जेंट, औद्योगिक रंगों या हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे अखाद्य रसायनों का इस्तेमाल जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करता है। इस तरह के घटक खाने के लिए बिल्कुल नहीं बने होते हैं और इनका सेवन शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आपको किसी भी स्तर पर पनीर की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो उसे खाने के बजाय विक्रेता से खरीद का पक्का बिल मांगें और जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

सुरक्षित रहने के लिए जरूरी सावधानियां

पनीर खरीदते समय केवल उसके बाहरी रूप-रंग पर भरोसा न करें। बहुत अधिक सफेदी, संदेहास्पद गंध, कड़वा स्वाद, अत्यधिक रबर जैसी बनावट और बाजार दर से बेहद कम कीमत जैसे पहलुओं को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी घरेलू जांच को अंतिम सत्य न मानें। खाद्य पदार्थों में मिलावट का वास्तविक और सटीक सच जानने के लिए वैज्ञानिक प्रयोगशाला जांच ही सबसे भरोसेमंद और पुख्ता माध्यम है।

सवाल-जवाब

क्या केवल देखकर असली और नकली पनीर की पहचान की जा सकती है?
नहीं, केवल देखकर यह बताना संभव नहीं है क्योंकि इसकी पक्की पुष्टि केवल प्रयोगशाला जांच से ही होती है।
पनीर में स्टार्च की मिलावट जांचने के लिए कौन सा तरीका है?
पनीर के टुकड़े पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालने से यदि रंग नीला या काला हो जाए, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।
मिलावटी पनीर तैयार करने में किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
जांच के दौरान मिल्क पाउडर, रिफाइंड तेल, सोया आधारित सामग्री और अन्य पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
गोरखपुर में इस मामले पर कौन कार्रवाई कर रहा है?
गोरखपुर खाद्य विभाग के एसी सुधीर सिंह के नेतृत्व में मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
खराब गुणवत्ता वाले पनीर की क्या पहचान हो सकती है?
असामान्य रूप से बहुत सफेद रंग, कड़वा स्वाद, अजीब गंध और रबर जैसी बनावट खराब गुणवत्ता का संकेत हो सकती है।
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