दैनिक जीवन की आपाधापी, दफ्तर का भारी दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ आधुनिक महिलाओं की सेहत पर चुपचाप गंभीर असर डाल रहा है। अक्सर लोग तनाव को केवल मानसिक परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, परंतु इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्का दहिया के अनुसार, बहुत सी महिलाओं को इस बात का आभास तक नहीं होता कि लंबे समय से बना हुआ गहरा तनाव उनकी गर्भधारण करने तथा बच्चे को जन्म देने की प्राकृतिक क्षमता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
अनियंत्रित तनाव से पैदा होने वाली शारीरिक समस्याएं
जब कोई महिला लंबे समय तक लगातार चिंता और दबाव में रहती है, तो उसके शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके चलते कई प्रकार की शारीरिक और गायनेकोलॉजिकल परेशानियां सामने आने लगती हैं। इनमें मासिक धर्म का अनियमित होना, पीरियड्स का समय पर न आना या काफी देरी से आना शामिल हैं। इसके अलावा कई महिलाओं को अत्यधिक दर्दनाक मेस्ट्रुअल साइकिल का सामना करना पड़ता है या फिर सामान्य से बहुत ज्यादा रक्तस्राव होने लगता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसा असंतुलन महिलाओं में गर्भधारण की संभावनाओं को काफी कम कर देता है। हालांकि तनाव अपने आप में सीधे तौर पर किसी जानलेवा बीमारी का कारण नहीं बनता, लेकिन इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि महिलाएं इन शुरुआती संकेतों को सामान्य समझकर डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देती हैं। जब समय पर परामर्श नहीं लिया जाता, तो ये समस्याएं आंतरिक रूप से और अधिक विकराल रूप धारण कर लेती हैं।
जीवनशैली में बदलाव लाकर ऐसे घटाएं तनाव का स्तर
अपने मानसिक दबाव को सही समय पर नियंत्रित करके महिलाएं अपने गायनेकोलॉजिकल स्वास्थ्य को काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं। इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में कुछ बुनियादी सुधार करना बेहद असरदार साबित होता है। हर रात सात से आठ घंटे की सुकून भरी और पूरी नींद लेना शारीरिक संतुलन बहाल करने के लिए सबसे जरूरी है। इसके साथ ही एक व्यवस्थित दिनचर्या बनाएं, जिसके तहत रोज एक ही तय समय पर जागना, भोजन करना और सोने की आदत डालना शामिल हो। अपनी दिनचर्या में हर रोज नियमित रूप से पैदल चलना या हल्का व्यायाम शामिल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मानसिक शांति बनाए रखने के लिए रोजाना कम से कम दस मिनट तक ध्यान लगाना और गहरी सांस लेने वाले श्वास अभ्यासों को अपनाना चाहिए। योग और सकारात्मक सोच का अभ्यास भी तनाव को तेजी से कम करने में विशेष भूमिका निभाता है।
किन चेतावनियों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
यदि मासिक धर्म से संबंधित लक्षण गंभीर रूप लेने लगें, तो बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। यदि किसी महिला के पीरियड्स लगातार तीन महीने तक पूरी तरह बंद रहें, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें। इसके अलावा यदि रक्तस्राव बहुत अधिक हो रहा हो अथवा मासिक चक्र में अचानक कोई बहुत बड़ा और असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। अनियंत्रित और लंबे समय तक खिंचने वाला तनाव पूरे स्वास्थ्य को खोखला कर सकता है। समय पर सही दिनचर्या, पौष्टिक व संतुलित खानपान, पर्याप्त विश्राम और सही चिकित्सीय सलाह से इन जटिलताओं से समय रहते बचाव संभव है।



















