बरसात की फुहारें जहां एक ओर चिलचिलाती गर्मी से सुकून देती हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने साथ हवा में उच्च आर्द्रता और उमस लेकर आती हैं। वातावरण में नमी का यह बढ़ा हुआ स्तर हमारी त्वचा पर काफी बुरा असर डालता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स के आंकड़ों के अनुसार, इस मौसम में त्वचा के संक्रमण और खुजली के मामलों में 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की जाती है। यदि आप भी इन दिनों लगातार त्वचा में लालिमा, चकत्ते या तीव्र खुजली से परेशान हैं, तो इसके मूल कारणों को गहराई से समझना और अपनी स्किन की सही देखभाल करना बेहद अनिवार्य हो जाता है।
मानसून में त्वचा की खुजली के प्रमुख कारण
बरसात के दिनों में शरीर की त्वचा कई तरह के बाहरी कारकों की चपेट में आ जाती है, जिससे विभिन्न प्रकार की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। हवा में नमी अधिक होने के कारण पसीना आसानी से नहीं सूख पाता है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के अंगों के मुड़ने वाले हिस्सों जैसे कि जांघों के बीच, बगल में और उंगलियों के बीच में नमी के टिके रहने के कारण टिनिया यानी दाद और कैंडिडिआसिस जैसे फंगल संक्रमण बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। इसके अलावा पसीना और धूल-मिट्टी मिलने से त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे घमौरियां और छोटे दाने उभर आते हैं जो भयानक खुजली का कारण बनते हैं। बारिश के दूषित पानी के संपर्क में आने से भी त्वचा में गंभीर एलर्जी और एक्जिमा का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। साथ ही, इस सीजन में छोटे कीट-पतंगे भी सक्रिय हो जाते हैं, जिनके काटने से त्वचा पर सूजन और लगातार खुजली की समस्या पैदा हो जाती है।
त्वचा को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचने के उपाय
मानसून के दौरान अपनी स्किन को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें। बारिश में भीगने के बाद तुरंत साफ पानी से स्नान करें और अपने शरीर को पूरी तरह सूखा लें। हमेशा ढीले और सूती कपड़े पहनने की आदत डालें ताकि हवा का संचार बना रहे। शरीर के जिन हिस्सों में पसीना अधिक निकलता है, वहां डॉक्टर की सलाह से एंटी-फंगल पाउडर का उपयोग किया जा सकता है। प्राकृतिक रूप से राहत पाने के लिए आप नहाने के पानी में नीम की पत्तियां उबालकर मिला सकते हैं या फिर प्रभावित जगह पर शुद्ध एलोवेरा जेल लगा सकते हैं। इसके अलावा, तेज केमिकल वाले साबुनों से तौबा करें और उनकी जगह माइल्ड या एंटी-बैक्टीरियल सोप चुनें। यदि त्वचा में सूखापन महसूस हो, तो कोई हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए
सामान्य तौर पर हल्की-फुल्की खुजली उचित साफ-सफाई और घरेलू नुस्खों से दो से तीन दिनों के भीतर ठीक हो जाती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में आपको लापरवाही न बरतते हुए तुरंत किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। यदि आपकी खुजली चार से पांच दिनों से अधिक समय तक बनी रहती है और किसी भी घरेलू उपाय से राहत नहीं मिलती है, तो डॉक्टर के पास जाएं। इसके अलावा, यदि प्रभावित हिस्से पर अत्यधिक लालिमा छा जाए, सूजन आ जाए या उसमें मवाद भरने लगे, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यदि खुजली के साथ तेज बुखार आने लगे या पूरे बदन पर चकत्ते फैल जाएं, अथवा इस समस्या के कारण आपकी नींद में खलल पड़ने लगे, तो बिना देर किए चिकित्सकीय मदद लें। बरसात के इस सुहावने मौसम का भरपूर आनंद लेने के लिए अपनी पर्सनल हाइजीन को प्राथमिकता दें और लक्षण गंभीर होने पर समय रहते डॉक्टरी सलाह लें।



















