आयुष चिकित्सा पद्धति में शतावर का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है और इसके अनगिनत स्वास्थ्य लाभ सामने आ रहे हैं। यह एक बेहद महंगी बिकने वाली औषधि है जो इंसानों और पशुओं दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी साबित होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और पाचन तंत्र बेहतर होने के साथ-साथ शरीर की अन्य कोशिकाएं भी सक्रिय हो जाती हैं। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक फुर्ती और मज़बूती पाना चाहता है, तो वह शतावर को अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकता है। कृषि विशेषज्ञ योगेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि शतावर के सेवन से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है जिससे खाया हुआ भोजन आसानी से पच जाता है।
महिलाओं और सामान्य कमजोरी के लिए वरदान
शतावर केवल सामान्य स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि विशेष स्थितियों में भी अत्यधिक लाभकारी है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इससे विशेष रूप से फायदा मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को मानसिक तनाव रहता है या शरीर में सामान्य कमजोरी बनी रहती है, तो यह औषधि बेहद असरदार साबित हो सकती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि, इसका सेवन शुरू करने से पहले किसी चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
पशुपालन में दूध बढ़ाने का अचूक नुस्खा
शतावर के पौधे की जड़ें पशुओं के लिए भी वरदान साबित होती हैं। जो किसान डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं या जिनके मवेशी उनकी क्षमता के अनुसार दूध नहीं दे रहे हैं, वे पशुओं को शतावर की जड़ें खिलाकर लाभ उठा सकते हैं। इससे पशुओं में दूध का उत्पादन काफी बढ़ जाता है। हालांकि, इसका उपयोग हर पशु के लिए अलग तरीके से किया जाता है। गाय, भैंस और बकरियों को उनके शरीर के वजन के हिसाब से इसकी खुराक दी जाती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं को शतावर खिलाने से पहले किसी पशु चिकित्सक से परामर्श जरूर करें और उनकी देखरेख में ही इसका इस्तेमाल शुरू करें।

















