पीरियड्स के दौरान स्विमिंग करने को लेकर अक्सर महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल और संशय रहते हैं। सबसे आम गलतफहमियों में से एक यह है कि पानी में उतरते ही पीरियड्स का फ्लो अपने आप पूरी तरह रुक जाता है। इसी डर और भ्रम के कारण बहुत सी महिलाएं पीरियड्स के दिनों में स्विमिंग पूल में जाने या वाटर एक्टिविटीज में हिस्सा लेने से बचती हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस की नजर से देखें तो पानी में ब्लीडिंग कम या रुकी हुई महसूस होने का कारण कोई जैविक बदलाव नहीं बल्कि एक साधारण भौतिक विज्ञान है।
पानी का दबाव और ब्लीडिंग का वैज्ञानिक सच
जब भी कोई व्यक्ति स्विमिंग पूल या पानी में उतरता है, तो पानी का एक प्राकृतिक दबाव शरीर पर चारों तरफ से पड़ता है। इस दबाव को वैज्ञानिक भाषा में हाइड्रोस्टैटिक प्रेशर (Hydrostatic Pressure) कहा जाता है। यह बाहरी दबाव गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत काम करता है, जो सामान्य तौर पर रक्त को नीचे की तरफ खींचता है। जब पानी का यह काउंटर-प्रेशर शरीर पर लगता है, तो गर्भाशय से बाहर आने वाले रक्त की गति काफी धीमी पड़ जाती है या कुछ समय के लिए रुक जाती है। यही कारण है कि पानी के अंदर रहने के दौरान महिलाओं को लगता है कि उनकी ब्लीडिंग बंद हो गई है।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि यह प्रक्रिया केवल पानी के बाहरी दबाव का नतीजा है, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पीरियड्स की प्रक्रिया अंदर से बंद हो चुकी है। जैसे ही आप स्विमिंग खत्म करके पानी से बाहर आती हैं और सूखी जमीन पर कदम रखती हैं, गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव दोबारा पहले की तरह सामान्य रूप से काम करने लगता है। इसके साथ ही ब्लीडिंग फिर से नियमित गति से शुरू हो जाती है।
स्विमिंग के लिए सही मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट का चुनाव
पीरियड्स के दौरान यदि आप स्विमिंग का आनंद लेना चाहती हैं, तो सही हाइजीन प्रोडक्ट चुनना बेहद आवश्यक हो जाता है। अक्सर कुछ महिलाएं सैनिटरी पैड पहनकर पानी में उतरने की गलती कर देती हैं। सैनिटरी पैड पानी के संपर्क में आते ही पूल के पानी को तेजी से सोख लेते हैं। इससे वे भारी हो जाते हैं और पीरियड्स के ब्लड को सोखने की उनकी क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिससे लीकेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ और गायनेकोलॉजिस्ट ऐसे मामलों में इंटरनल प्रोटेक्शन प्रोडक्ट जैसे कि टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। ये प्रोडक्ट शरीर के भीतर स्थित होकर ब्लीडिंग को बाहर आने से पहले ही अवशोषित या एकत्र कर लेते हैं। इससे पानी में किसी भी प्रकार के रिसाव की संभावना नहीं रहती। अपने शरीर की सुविधा, पिछले अनुभव और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर सही प्रोडक्ट का चयन करना चाहिए।
शारीरिक स्वास्थ्य के लाभ और जरूरी सावधानियां
मासिक धर्म के समय हल्की-फुल्की स्विमिंग करना सेहत के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो सकता है। तैरने जैसी हल्की वर्कआउट एक्टिविटी से शरीर में एंडॉर्फिन (Endorphin) नामक हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है, जिसे आमतौर पर 'फील-गुड' हॉर्मोन भी कहा जाता है। यह हॉर्मोन मानसिक तनाव को दूर करता है, मूड को बेहतर बनाता है और पेट व कमर में होने वाले पीरियड्स के दर्द या ऐंठन से राहत दिलाने में मदद करता है।
हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है और उनकी शारीरिक स्थितियां भी भिन्न होती हैं। यदि किसी महिला को पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग (Heavy Flow) हो रही हो, असहनीय पेट दर्द हो, चक्कर आ रहे हों या फिर कोई अन्य गायनेकोलॉजिकल समस्या हो, तो स्विमिंग करने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में तैराकी करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।



















