हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित बचत भवन में आयोजित शिमला जिला परिषद के शीर्ष पदों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मार ली है। लंबे समय से अटके इस चुनावी मुकाबले में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल कर ली है, जबकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
25 सदस्यों वाली परिषद में यूं चला मतों का गणित
कुल 25 सदस्यों वाली शिमला जिला परिषद में सत्ता की राह किसी भी दल के लिए आसान नहीं थी, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पूर्ण बहुमत से दूर थे। ऐसे में दो निर्दलीय सदस्यों की भूमिका बेहद निर्णायक साबित हुई। चुनाव प्रक्रिया गुरुवार सुबह 10:30 बजे बचत भवन में शुरू हुई। अध्यक्ष पद के मुकाबले में वार्ड नंबर 14 चंदलोग से उम्मीदवार भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13 वोट प्राप्त हुए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र रेटका को मात्र 10 वोटों से संतोष करना पड़ा, जबकि गणना के दौरान 2 वोट अमान्य करार दिए गए।
उपाध्यक्ष पद पर भी फहराया जीत का परचम
इसी तरह उपाध्यक्ष पद की जंग में भी भाजपा का पलड़ा भारी रहा। वार्ड नंबर 9 से भाजपा प्रत्याशी भारत सिंह कलान्टा ने 14 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में उतरी कांग्रेस की मीनाक्षी को केवल 10 वोट मिले और 1 वोट खारिज कर दिया गया। कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए वार्ड नंबर 5 सीमा रंटाडी से सुरेंद्र रेटका और उपाध्यक्ष पद के लिए वार्ड नंबर 11 से मीनाक्षी को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा।
102 दिन का इंतजार और हाई कोर्ट का दखल
यह चुनावी नतीजा 102 दिनों की लंबी प्रतीक्षा के बाद सामने आया है। जिला परिषद के सदस्यों के चुनाव संपन्न हुए तीन महीने बीत चुके थे, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में लगातार देरी हो रही थी। विपक्षी दल भाजपा ने सत्तारूढ़ सुक्खू सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर रोड़े अटकाने और देरी करने के गंभीर आरोप लगाए थे। स्थिति स्पष्ट न होने पर भाजपा ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के कड़े रुख और निर्देशों के बाद ही जिला प्रशासन ने मतदान की समय-सीमा तय की और अंततः चुनाव संपन्न करवाए गए।



















