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कोहिनूर पावर बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, कोलकाता के 11 परिसरों पर छापेमारीझारखंड
3 सित॰ 2026, 9:39 am (4 घंटे पहले)· 2

कोहिनूर पावर बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, कोलकाता के 11 परिसरों पर छापेमारी

कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 290 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। आरोप है कि झारखंड में पावर प्लांट के लिए लिया गया लोन दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय की कोलकाता जोन-I टीम ने 290 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक धोखाधड़ी के मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू की है। जांच एजेंसी ने मेसर्स कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों से जुड़े कोलकाता स्थित 11 विभिन्न ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है। यह पूरी जांच झारखंड में एक ऊर्जा परियोजना की स्थापना के लिए बैंक से हासिल किए गए करोड़ों रुपये के लोन के संदिग्ध इस्तेमाल और हेरफेर के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

66 मेगावाट पावर प्लांट के नाम पर लोन की हेरफेर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने झारखंड राज्य में 66 मेगावाट क्षमता का एक थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने का हवाला देकर वित्तीय संस्थानों और बैंकों से भारी-भरकम लोन लिया था। हालांकि, जांच में सामने आया है कि मंजूर की गई लोन राशि का उपयोग नियत पावर प्रोजेक्ट के निर्माण में नहीं किया गया। इसके बजाय, फंड का एक बड़ा हिस्सा समूह की अन्य सहायक कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया तथा प्रमोटरों द्वारा अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग में लाया गया।

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एनसीएलटी लिक्विडेशन और बैंकों का भारी नुकसान

ऋण की राशि का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग होने के कारण कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई और अपनी देनदारियां चुकाने में असमर्थ हो गई। इसके बाद मामले को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के समक्ष ले जाया गया, जहाँ कंपनी के परिसमापन की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। लिक्विडेशन की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कर्जदाताओं को 290 करोड़ रुपये के बकाए के बदले केवल 7 करोड़ रुपये के करीब की ही वसूली हो सकी। इस भारी वित्तीय अंतर के कारण कर्जदाता बैंकों और वित्तीय संस्थानों को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।

प्रमोटरों और ऑडिटरों के ठिकानों पर तलाशी अभियान

ईडी अधिकारियों की विशेष टीमें कंपनी समूह के मुख्य प्रमोटरों प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा से संबंधित आवासीय व व्यावसायिक परिसरों में सघन जांच कर रही हैं। इसके साथ ही कंपनी के अन्य निदेशकों, वित्तीय ऑडिटरों और सहयोगी प्रतिष्ठानों के कार्यालयों को भी जांच के दायरे में लाया गया है। छापेमारी के दौरान ईडी की टीम वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाते के विवरण और बैलेंस शीट की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि लोन के पैसों की सटीक हेरफेर और मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके।

सवाल-जवाब

ईडी ने कोलकाता में कहां और क्यों छापेमारी की है?
ईडी की कोलकाता जोन-I टीम ने 290 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी की है।
कोहिनूर पावर पर बैंक लोन के दुरुपयोग का क्या आरोप है?
कंपनी ने झारखंड में 66 मेगावाट पावर प्लांट लगाने के लिए लोन लिया था, जिसे तय प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय अन्य कंपनियों और व्यक्तिगत कामों में डायवर्ट कर दिया गया।
एनसीएलटी लिक्विडेशन प्रक्रिया में बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
कंपनी के परिसमापन के दौरान 290 करोड़ रुपये के बकाए के मुकाबले केवल 7 करोड़ रुपये ही रिकवर हो सके, जिससे बैंकों को 283 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।
इस मामले में ईडी की जांच के दायरे में कौन-कौन शामिल हैं?
ईडी कंपनी के प्रमोटरों प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा के अलावा अन्य निदेशकों, वित्तीय ऑडिटरों और समूह की सहयोगी कंपनियों के दफ्तरों की तलाशी ले रही है।
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