नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान जमशेदपुर के बाजारों और मोहल्लों में उत्सव का खास माहौल देखने को मिलता है। शक्ति की उपासना के साथ ही गरबा और डांडिया रास को लेकर युवाओं और परिवारों में गजब की उत्सुकता रहती है, जिसका लोग साल भर इंतजार करते हैं। उत्सव के इन खास पलों में शामिल होने के लिए आकर्षक परिधान पहनना लगभग हर किसी की चाहत होती है, लेकिन केवल एक या दो रातों के लिए हजारों रुपये खर्च करके भारी भरकम पोशाक खरीदना हर किसी के बजट में फिट नहीं बैठता। ऐसे उत्सव प्रेमियों के लिए शहर के प्रमुख बाजार में बेहद किफायती विकल्प मौजूद है, जिससे जेब पर भारी बोझ डाले बिना शानदार पारंपरिक अंदाज अपनाया जा सकता है।
बिष्टुपुर के तुलसी भवन के सामने मिल रहा किफायती समाधान
डांडिया उत्सव की तैयारी कर रहे लोगों को अब परिधानों पर मोटी रकम खर्च करने से राहत मिल रही है। जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में स्थित तुलसी भवन के ठीक सामने किराए पर आकर्षक पोशाकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस केंद्र पर युवतियों और महिलाओं के लिए पारंपरिक लहंगा-चोली के विस्तृत संग्रह के साथ-साथ पुरुषों के लिए पगड़ी और मैचिंग ज्वेलरी भी आसानी से मिल जाती है। यहां मिलने वाले इन परिधानों का किराया मात्र 250 रुपये से शुरू होता है, जिसके चलते कम खर्च में भी गरबा नाइट के लिए संपूर्ण और आकर्षक रूप तैयार किया जा सकता है।
भारी परिधानों के बजाय हल्के और फ्यूजन स्टाइल की ओर बढ़ा रुझान
दुकान की संचालक शीतल के अनुसार, इस सीजन में शहर के ग्राहकों और युवाओं की पसंद में साफ बदलाव दर्ज किया गया है। लोग अब पहले की तरह अत्यधिक भारी, वजनदार और जटिल डिजाइन वाले कपड़ों के स्थान पर सादगी से भरे और आधुनिक शैली के परिधान अधिक पसंद कर रहे हैं। विशेष रूप से युवतियां ऐसे परिधान चुन रही हैं जो देखने में फैशनेबल लगें और नृत्य करते समय किसी तरह की रुकावट न डालें।
इसी वजह से क्रॉप टॉप के साथ लहंगे का मेल, प्लेन स्कर्ट और डेनिम जैकेट जैसे समकालीन फ्यूजन परिधानों की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। शीतल बताती हैं कि युवा पीढ़ी अब ऐसे परिधानों को प्राथमिकता दे रही है जिन्हें पहनकर वे देर रात तक बिना किसी असहजता के डांडिया खेल सकें और त्योहार के उल्लास का पूरा आनंद ले सकें।
किराए के कपड़ों से बचत और हर बार नया फैशन आजमाने की सुविधा
उत्सव के लिए तैयार होने में किराए के विकल्प को कई मायनों में समझदारी भरा फैसला माना जा रहा है। संचालक शीतल का कहना है कि सिर्फ एक बार के इस्तेमाल के लिए भारी भरकम रकम खर्च करने से बचना ही किराए की व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा है। 250 रुपये की न्यूनतम दर पर मनपसंद परिधान हासिल कर उसे उत्सव के बाद वापस लौटाया जा सकता है। इससे न केवल अनावश्यक खर्च बचता है, बल्कि हर साल अलग-अलग डिजाइन और नए स्टाइल आजमाने की पूरी आजादी भी मिलती है।
बिष्टुपुर में तुलसी भवन के सामने स्थित इस दुकान पर संपूर्ण शृंगार सामग्री एक ही छत के नीचे मिल जाती है। लहंगा-चोली से लेकर गहनों तक का पूरा सेट उपलब्ध होने से लोगों को अलग-अलग दुकानों के चक्कर काटने की जद्दोजहद से भी मुक्ति मिल जाती है।



















