झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में शाम ढलते ही चाय और नाश्ते की तलाश में निकलने वालों के लिए कसीडीह चौक एक खास पहचान रखता है। आमतौर पर लोग शाम के वक्त समोसा, कचौड़ी या आलू चॉप की तलाश करते हैं, मगर इस इलाके में शाम चार बजते ही कड़ाही से छनकर निकलने वाले आलू बोंडा की खुशबू दूर-दूर से लोगों को खींच लाती है। यहां मिलने वाला पारंपरिक देसी नाश्ता पिछले 35 वर्षों से लगातार लोगों के स्वाद की पहली पसंद बना हुआ है। न सिर्फ स्थानीय निवासी, बल्कि शहर के अलग-अलग कोनों से आने वाले लोग भी इस स्वाद के मुरीद हैं।
साढ़े तीन दशकों का सफर और तीन पारंपरिक पकवान
इस लोकप्रिय नाश्ते की दुकान का संचालन जगदीश करते हैं। वे बताते हैं कि पिछले 35 साल से वह कसीडीह चौक पर पूरी लगन से ग्राहकों के लिए नाश्ता तैयार कर रहे हैं। उनके मेन्यू में मुख्य रूप से तीन पारंपरिक पकवान शामिल हैं, जिनमें आलू बोंडा, उड़द दाल वड़ा और चना बड़ा प्रमुख हैं। जगदीश इन तीनों ही व्यंजनों को कड़ाही में लगातार ताजा तैयार करते हैं ताकि किसी भी ग्राहक को ठंडा या बासी नाश्ता न मिले। शाम ढलने के साथ ही जैसे-जैसे सड़क पर चहल-पहल बढ़ती है, वैसे-वैसे दुकान के सामने ग्राहकों का जमावड़ा भी बढ़ता चला जाता है।
चना दाल और हरी मिर्च-टमाटर की दोहरी चटनी
दुकान की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यहां नाश्ते के साथ परोसी जाने वाली खास चटनियां भी हैं। आमतौर पर मिलने वाली साधारण चटनी के उलट, यहां ग्राहकों को दो अलग-अलग तरह के स्वाद दिए जाते हैं। पहली चटनी चना दाल से तैयार की जाती है, जबकि दूसरी चटनी ताजी हरी धनिया, टमाटर और तीखी मिर्च के मेल से बनाई जाती है। गर्मागर्म कुरकुरे आलू बोंडा के साथ जब ये दोनों चटनियां थाली में आती हैं, तो स्वाद का अनुभव बेहद खास बन जाता है। इस नाश्ते का स्वाद चखने के बाद लोग अक्सर अपने परिजनों और दोस्तों को भी इस दुकान पर आने की सलाह देते हैं।
पार्सल के लिए भी करना पड़ता है इंतजार
दुकान पर ग्राहकों की मांग का आलम यह रहता है कि दुकान पर खड़े होकर खाने वालों के साथ-साथ घर के लिए पार्सल ले जाने वाले लोगों को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। कड़ाही से छनकर निकलते ही सारा नाश्ता चंद मिनटों में बिक जाता है। जगदीश के अनुसार, लोग हमेशा गर्मागर्म और ताजा नाश्ता खाना पसंद करते हैं, इसलिए वह पहले से नाश्ता बनाकर रखने के बजाय मांग के अनुसार लगातार ताजा बैच तैयार करते रहते हैं। शुरुआती दौर में जब इस दुकान की शुरुआत हुई थी, तब यहां एक पीस नाश्ते की कीमत मात्र 2 रुपये हुआ करती थी। आज भी यहां बेहद किफायती दाम पर नाश्ता उपलब्ध है, जो ग्राहकों को नियमित रूप से यहां खींच लाता है।
स्थानीय ग्राहकों की जुबानी स्वाद का अनुभव
कसीडीह चौक पर नियमित रूप से नाश्ता करने पहुंचने वाले ग्राहक राहुल बताते हैं कि इस दुकान का आलू बोंडा और दोनों चटनियों का मेल उन्हें बेहद पसंद है। उनके मुताबिक, गर्म नाश्ते के साथ जब तीखी और जायकेदार चटनी मिलती है, तो शाम की भूख मिटाने का आनंद दोगुना हो जाता है। यही कारण है कि वह अक्सर शाम के समय नाश्ते के लिए यहीं आना पसंद करते हैं। जमशेदपुर में शाम के वक्त पारंपरिक और किफायती नाश्ते का लुत्फ उठाने की इच्छा रखने वालों के लिए कसीडीह चौक की यह 35 साल पुरानी दुकान एक बेहतरीन विकल्प बनी हुई है।



















