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झारखंड की राजधानी में बना मिनी गांव, रांची के चिल्ड्रन पार्क में मिट्टी के घर और सोहराई कला बनी आकर्षणझारखंड
7 अक्तू॰ 2026, 7:30 am (2 घंटे पहले)· 1

झारखंड की राजधानी में बना मिनी गांव, रांची के चिल्ड्रन पार्क में मिट्टी के घर और सोहराई कला बनी आकर्षण

रांची के चिल्ड्रन पार्क का नया रूप लोगों को लुभा रहा है, जहां जंगल जैसे माहौल के बीच पारंपरिक मिट्टी के घर, आंगन और सोहराई पेंटिंग बनाई गई हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में मौजूद चिल्ड्रन पार्क को हाल ही में एक नया और अनोखा रूप दिया गया है, जो शहर के लोगों को ग्रामीण जीवन की पुरानी यादों से जोड़ रहा है। पार्क के भीतर एक खास विलेज तैयार किया गया है, जहां मिट्टी का घर, पारंपरिक आंगन और कुआं जैसी चीजें देखने को मिलती हैं। घने पेड़ों के बीच बसा यह हिस्सा किसी छोटे जंगल जैसा एहसास कराता है, जिसके बीचों-बीच खड़ा मिट्टी का मकान लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। शाम के समय शहरवासी यहां फुर्सत के पल बिताने के लिए काफी संख्या में पहुंच रहे हैं।

पारंपरिक सोहराई पेंटिंग और पुरानी संस्कृति की झलक

पार्क के अंदर बने इस ग्रामीण ढांचे में झारखंड की लोक संस्कृति को बड़ी खूबसूरती से उतारा गया है। यहां तैयार किए गए मिट्टी के घर की दीवारों पर आकर्षक सोहराई पेंटिंग बनाई गई है, जो राज्य की समृद्ध कला परंपरा को दर्शाती है। घर के अंदर पुराने जमाने के घरेलू उपकरण जैसे सिलौट और हाथ से चलने वाली पत्थर की चक्की रखी गई है, जिसका इस्तेमाल पहले के समय में गेहूं और अन्य अनाज पीसने के लिए किया जाता था। यह व्यवस्था नई पीढ़ी के बच्चों को पुरानी जीवनशैली और पूर्वजों की संस्कृति से सीधे रूबरू कराती है।

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सुरक्षा का ध्यान और लकड़ी की बाड़

इस पूरे गांव वाले हिस्से को पारंपरिक तरीके से सूखी और टूटी-फूटी लकड़ियों की बाड़ लगाकर चारों तरफ से घेरा गया है, जैसा कि पुराने वक्त में गांवों में देखने को मिलता था। घर के सामने एक आंगन और एक कुआं भी तैयार किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस कुएं में पानी नहीं रखा गया है, ताकि खेलते समय किसी हादसे का खतरा न रहे। इसके साथ ही परिसर में एक बेहद खूबसूरत प्रवेश द्वार भी बनाया गया है, जो आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है।

तालाब, झूले और वॉक करने के लिए ट्रैक

पार्क प्रबंधन के अनुसार परिसर में मनोरंजन और सेहत दोनों का ध्यान रखा गया है। पार्क के मैनेजर कार्तिक ने बताया कि यहां एक छोटा सा तालाब भी मौजूद है, जिसमें बच्चे नौका विहार का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा बच्चों के खेलने के लिए अलग-अलग तरह के झूले, स्लाइड और जंपिंग की सुविधाएं मौजूद हैं। बड़ों के टहलने के लिए एक शानदार वॉकिंग ट्रैक बनाया गया है और जगह-जगह बैठने के लिए बेंच लगाई गई हैं। रात के वक्त पार्क में की गई लाइटिंग पूरे माहौल को और भी आकर्षक बना देती है, जिससे शाम को चहल-पहल बढ़ जाती है।

मिनी जंगल जैसा नजारा और टिकट की जानकारी

पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी हरियाली है। चारों तरफ लगे बड़े-बड़े पेड़ों की वजह से यह पूरा परिसर किसी मिनी जंगल जैसा दिखता है, जिसके मध्य में बसा यह गांव बेहद मनमोहक लगता है। आम दिनों में यहां आने वाले लोगों के लिए 10 रुपये का एंट्री टिकट रखा गया है, जबकि सुबह 8:00 बजे तक आने वालों के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहता है। वाहनों के लिए यहां व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

सवाल-जवाब

रांची के चिल्ड्रन्स पार्क में नया क्या बनाया गया है?
पार्क के अंदर एक मिनी गांव तैयार किया गया है, जिसमें मिट्टी का घर, आंगन, कुआं और सोहराई पेंटिंग की गई दीवारें शामिल हैं।
मिट्टी के घर के भीतर कौन सी पुरानी चीजें रखी गई हैं?
घर के अंदर पारंपरिक सिलौट और हाथ से आटा पीसने वाली चक्की रखी गई है।
पार्क में एंट्री टिकट की कीमत कितनी है?
पार्क में प्रवेश के लिए 10 रुपये का टिकट लगता है, हालांकि सुबह 8:00 बजे तक प्रवेश पूरी तरह फ्री रहता है।
क्या बच्चों के लिए कुएं में पानी रखा गया है?
नहीं, बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुएं में पानी नहीं रखा गया है।
पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए क्या-क्या सुविधाएं हैं?
पार्क में एक छोटा तालाब है जहां बच्चे बोटिंग कर सकते हैं, साथ ही तरह-तरह के झूले, स्लाइड और जंपिंग की सुविधाएं भी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

शहर की भीड़भाड़ के बीच बच्चों को मिट्टी के घरों और सोहराई कला से जोड़ने की यह पहल वाकई सुकून भरी है। बस एक बात मन में आ रही है कि क्या पार्क प्रशासन इस छोटे से गांव और पारंपरिक कलाओं को लंबे समय तक ऐसे ही सुरक्षित रख पाएगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं बचपन में ऐसी ही चक्की पर आटा पिसते देखता था, उम्मीद है यह रखरखाव संभाल पाएंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

शहर के बीच मिट्टी का घर तो बना दिया, पर असली गांव की धूल-मिट्टी और उमस यहाँ कहाँ मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन, धूल और उमस तो शहर में वैसे भी बहुत है, लेकिन क्या बच्चों के लिए इस पार्क में खेलने का कोई समय तय है?

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