झारखंड में अक्टूबर के शुरुआती दिनों के साथ ही मौसम का मिजाज तेजी से करवट ले रहा है। राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक वापसी की प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है, जिसके चलते आने वाले दिनों में मौसमी गतिविधियों में ठहराव देखने को मिलेगा। हालांकि मानसून के लौटने की इस हलचल के बीच स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण कई इलाकों में बादल छाने, हल्की फुहारें पड़ने और बादलों की गर्जना की स्थिति कुछ समय के लिए बनी रह सकती है। रांची मौसम केंद्र के ताजा आंकलनों के अनुसार, 2 अक्टूबर को राज्य के लिए किसी प्रकार की गंभीर मौसम चेतावनी लागू नहीं की गई है, फिर भी उत्तर-पूर्वी बेल्ट और संताल परगना के करीब आठ जिलों में बूंदाबांदी और बौछारों के आसार बने हुए हैं।
संताल परगना के आठ जिलों में बूंदाबांदी का पूर्वानुमान
मौसम के बदले रुख के बीच 2 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी झारखंड के भूभाग, विशेषकर संताल परगना और उससे सटे क्षेत्रों में छिटपुट वर्षा और गर्जना की संभावना जताई गई है। जिन आठ जिलों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश देखने को मिल सकती है, उनमें देवघर, दुमका, गिरिडीह, कोडरमा, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई कठोर चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन इन क्षेत्रों में स्थानीय मौसमी बदलावों को देखते हुए लोगों को खुले में निकलते समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
गरज-चमक और तेज हवाओं से सावधानी जरूरी
भले ही राज्य में आंधी-तूफान या आकाशीय बिजली को लेकर कोई विशेष हाई अलर्ट नहीं दिया गया है, लेकिन बादलों के स्थानीय स्तर पर तेजी से बनने के कारण अचानक बिजली कड़कने और तेज झोंके वाली हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे वातावरण में सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। वज्रपात के समय खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों या तारों से दूर रहकर सुरक्षित स्थानों में शरण लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है।
2 से 7 अक्टूबर तक राज्य के मौसम का पूरा ब्योरा
अक्टूबर के पहले हफ्ते के दौरान झारखंड के मौसम में क्रमिक बदलाव देखने को मिलेगा। 2 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी हिस्सों में छिटपुट बौछारों की गतिविधि बनी रह सकती है। इसके अगले दिन यानी 3 अक्टूबर को राज्य के ज्यादातर जिलों में मौसम अपेक्षाकृत साफ और शुष्क रहने का अनुमान है। 4 अक्टूबर को कुछ जगहों पर आंशिक बादल छाने और स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं 5 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी झारखंड के इलाकों में एक बार फिर छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। 6 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दोनों हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद 7 अक्टूबर से राज्य में वर्षा की कोई बड़ी संभावना नहीं है और मौसम के पूरी तरह शुष्क रुख अख्तियार करने के स्पष्ट संकेत हैं।
तापमान का उतार-चढ़ाव और हाल के मौसम का हाल
तापमान की बात करें तो 2 अक्टूबर को राजधानी रांची में अधिकतम तापमान करीब 29 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने का अनुमान है। वहीं राज्य के अन्य मैदानी व पठारी जिलों में अधिकतम पारा 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है। इससे पहले 1 अक्टूबर को राज्य के कई हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहे थे और कुछ जगहों पर हल्की बौछारें दर्ज की गई थीं। उस दौरान डाल्टनगंज का तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस, जमशेदपुर और धनबाद का तापमान 32 से 32.5 डिग्री सेल्सियस, बोकारो का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तथा हजारीबाग का अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया था।
मानसून के आंकड़े और वापसी का क्रम
झारखंड में इस वर्ष 1 जून से 30 सितंबर की पूरी मानसूनी अवधि के दौरान कुल 1,005.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह आंकड़ा सामान्य मानसूनी औसत 1,022.9 मिलीमीटर की तुलना में लगभग 2 प्रतिशत कम रहा, जिसे मौसम विज्ञान के हिसाब से सामान्य बारिश की श्रेणी में ही गिना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले कुछ दिनों में मानसून शेष जिलों से भी पूरी तरह विदा हो जाएगा। हालांकि विदाई का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बारिश पूरी तरह थम जाएगी, क्योंकि स्थानीय मौसमी तंत्रों के प्रभाव से अक्टूबर के पहले सप्ताह में हल्की फुहारों की गतिविधियां यदा-कदा जारी रह सकती हैं।




















