झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने किसानों की दोहरी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक विशेष बहुउद्देशीय ट्रैक्टर तैयार किया है। आम तौर पर खेतों की जुताई और ढुलाई करने वाले पारंपरिक ट्रैक्टरों से अलग यह मशीन बिजली संकट और पटवन की दिक्कतों को एक साथ हल करने की क्षमता रखती है। इस नए मॉडल में ऐसी अतिरिक्त तकनीकी सुविधाएं जोड़ी गई हैं जो सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कृषकों की रोजमर्रा की चुनौतियों को कम कर सकती हैं।
बिजली उत्पादन के लिए इनबिल्ट अल्टरनेटिव सिस्टम
इस नवाचार की बारीकियों को साझा करते हुए आशीष ने बताया कि इस ट्रैक्टर के भीतर एक अल्टरनेटिव मशीन स्थापित की गई है। जैसे ही वाहन का इंजन चालू किया जाता है, यह सिस्टम तुरंत बिजली पैदा करना शुरू कर देता है। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रिड की बिजली नहीं पहुंची है या जहां अक्सर ब्लैकआउट की स्थिति रहती है, वहां यह व्यवस्था आपातकालीन ऊर्जा स्रोत का काम करती है। रात के समय या कार्यस्थल पर इसके जरिए बल्ब जलाने समेत अन्य जरूरी घरेलू और कृषि उपकरण आसानी से संचालित किए जा सकते हैं।
गहरे जलस्रोतों से पटवन के लिए सेंट्रीफ्यूज पंप
सिंचाई की व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए इस मशीन में एक सेंट्रीफ्यूज सिस्टम जोड़ा गया है। आशीष के मुताबिक इस मशीन को पुली के जरिए सीधे ट्रैक्टर से जोड़ा गया है। ट्रैक्टर स्टार्ट होते ही पुली की मदद से सेंट्रीफ्यूज पंप भी काम करने लगता है। यह तंत्र कुओं, तालाबों और बेहद गहरे जलस्रोतों से पानी को खींचकर ऊपर लाता है। इसमें 5 इंच का डिलीवरी पाइप लगाया गया है, जिसकी सहायता से किसान बड़ी मात्रा में पानी निकालकर सीधे अपने खेतों की क्यारियों तक पहुंचा सकते हैं।
लागत और 80 प्रतिशत सब्सिडी का नियम
कीमत और सरकारी सहायता के संबंध में जानकारी देते हुए आशीष ने स्पष्ट किया कि इस पूरे उपकरण की मूल लागत 5 लाख रुपये तय की गई है। सरकार की वर्तमान योजना के अंतर्गत इस पर 80 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस भारी छूट का लाभ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि 5 किसानों के समूह को संयुक्त रूप से खरीदारी करने पर दिया जा रहा है। इस पूरी तकनीक और खरीद प्रक्रिया को समझने के लिए इच्छुक किसान यूनिवर्सिटी के वर्कशॉप में सीधे संपर्क कर सकते हैं।



















