सांपों को लेकर इंसानों के मन में हमेशा से एक अनजाना खौफ रहा है। हर वर्ष दुनिया भर में सर्पदंश की वजह से अनगिनत लोगों की जान जाती है, जिससे इनके प्रति डर और गहरा हो जाता है। इसके बावजूद जीव विज्ञान की दृष्टि से सांपों की जीवनशैली, उनका रहन-सहन और प्रजनन का तौर-तरीका बेहद अनोखा और हैरान करने वाला है। सभी सर्प प्रजातियां एक समान प्रक्रिया से अपनी वंशवृद्धि नहीं करती हैं। कुछ प्रजातियां अंडे देकर वंश आगे बढ़ाती हैं, तो वहीं कई प्रजातियां सीधे जीवित बच्चों को जन्म देती हैं। अंडों से बाहर आने या सीधे जन्म लेने के तुरंत बाद नन्हें सांपों को किसी अभिभावक की परवरिश की दरकार नहीं होती और वे अपने दम पर जिंदगी की जंग लड़ने निकल पड़ते हैं।
प्रजनन चक्र और अंडे से बच्चे निकलने का समय
पलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ. डी एस श्रीवास्तव के अनुसार, विभिन्न प्रजातियों के सर्पों में प्रजनन की अवधि, तरीका और एक बार में पैदा होने वाले बच्चों की तादाद में काफी भिन्नता पाई जाती है। कुछ सर्पों में मादा बाहर सुरक्षित स्थान पर अंडे देती है, जहां प्राकृतिक तापमान में उनका विकास होता है। वहीं दूसरी तरफ, कई ऐसी प्रजातियां भी हैं जिनमें मादा के शरीर के भीतर ही भ्रूण विकसित होता है और अंततः मादा सीधे जीवित संतानों को जन्म देती है। यही वजह है कि सभी प्रकार के सर्पों के लिए पंद्रह दिन या डेढ़ से दो महीने जैसी कोई बंधी-बंधाई समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। कुछ सर्प प्रजातियों के अंडों से बच्चे बाहर आने में कई हफ्तों से लेकर लगभग दो महीने तक का वक्त लग सकता है।
क्या जन्म लेते ही जहरीले हो जाते हैं नन्हे संपोले?
लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या नवजात सांप भी बड़ों जितने खतरनाक होते हैं। डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि कोबरा और करैत जैसी अत्यधिक विषैली प्रजातियों के बच्चे जन्म के तुरंत बाद या अंडे का खोल तोड़कर बाहर आते ही जहर पैदा करने में सक्षम होते हैं। हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि हर प्रजाति विषैली नहीं होती। विषैले सर्पों के नवजात जन्म लेते ही अपना शिकार तलाशने और खतरे की स्थिति में अपना बचाव करने के पूरे गुर जानते हैं। इंसानों या स्तनधारी जीवों की तरह उन्हें बड़ा होने के लिए माता-पिता के सहारे या देखरेख की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है।
अभिभावकीय देखभाल का अभाव और किंग कोबरा का अपवाद
सर्प जगत में अपने बच्चों को पालने-पोसने की भावना लगभग न के बराबर होती है। अधिकांश प्रजातियों में मादा अंडे देने के तुरंत बाद उस स्थान को हमेशा के लिए छोड़ देती है। जब अंडों से संपोले निकलते हैं, तो उन्हें खुद ही अपने लिए आहार और सुरक्षित ठिकाना खोजना पड़ता है। हालांकि प्रकृति में कुछ दुर्लभ अपवाद भी देखने को मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर मादा किंग कोबरा अपने अंडों के लिए घोंसला तैयार करती है और जब तक अंडों से बच्चे बाहर नहीं आ जाते, तब तक वह पहरेदारी करते हुए उनकी रक्षा करती है। लेकिन जैसे ही बच्चे अंडों से बाहर निकलते हैं, यह सुरक्षा चक्र खत्म हो जाता है और नन्हे संपोलों को अपनी हिफाजत खुद करनी पड़ती है।
आखिर अपने ही बच्चों को क्यों खा जाते हैं बड़े सांप?
सांपों के व्यवहार से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला पहलू उनका अपनी ही संतानों को निगल जाना है। दरअसल, कई सर्प प्रजातियां आहार के तौर पर दूसरे छोटे सांपों का शिकार करती हैं। ऐसे में जब किसी बड़े सांप के सामने कोई छोटा संपोला आता है, तो वह उसे महज एक शिकार या आहार समझकर निगल जाता है। यह कोई जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं होता कि वह अपनी संतान को पहचानकर मार रहा है। सांपों के दिमाग में मनुष्यों की तरह पारिवारिक रिश्तों की पहचान या ममता जैसी कोई लंबी व्यवस्था नहीं होती। इसी वजह से भोजन की तलाश के दौरान सामने आने पर वे परिस्थिति वश अपनी ही संतान को निगल लेते हैं।



















