तिरुवनंतपुरम में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाली छात्राओं पर बेहद फूहड़ और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में टी जी मोहनदास को न्यायालय से राहत मिल गई है। एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के संबंध में बेहद भद्दी और विवादित बातें कहने वाले मोहनदास को पुलिस ने पहले गिरफ्तार किया था और इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था। टी जी मोहनदास सोशल मीडिया पर खुद को हिंदुवादी और दक्षिणपंथी विचारक एवं वक्ता के रूप में पहचान दिलाते हैं।
सोमवार को तिरुवनंतपुरम के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट के न्यायाधीश मिथुन गोपी जीएस ने सुनवाई के बाद टी जी मोहनदास को जमानत दे दी। पुलिस ने उन्हें उसी दिन कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में प्रस्तुत किया था, जहां उनके अधिवक्ताओं ने तत्काल प्रभाव से जमानत याचिका दायर की थी। इस याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने मानी जमानती धाराओं की बात
इस पूरे मामले की जांच कर रही तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने अदालत को जानकारी दी कि उन्होंने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और संबंधित कानूनों के तहत कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। पुलिस का कहना था कि आरोपी ने किसी भी शब्द, आवाज, इशारे या अन्य माध्यमों से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई है तथा गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए आपराधिक धमकी भी दी है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई कि मामले की गहराई से जांच करने के लिए आरोपी की पुलिस कस्टडी बेहद जरूरी है। उनका तर्क था कि मोहनदास एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और यदि वे जमानत पर बाहर आते हैं, तो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं तथा महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी कर सकते हैं। इसके विपरीत, बचाव पक्ष के वकीलों ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि उनके मुक्किल पर लगाए गए सभी आरोप जमानती प्रकृति के हैं।
न्यायालय के निर्देश और शर्तें
दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने टी जी मोहनदास को जमानत मंजूर कर ली। हालांकि, अदालत ने राहत देने के साथ कुछ सख्त शर्तें भी जोड़ी हैं। आदेश के अनुसार, मोहनदास को जांच प्रक्रिया में सहयोग करना होगा और इसके तहत उन्हें लगातार तीन दिनों तक जांच अधिकारी के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जब कभी भी पुलिस को उनकी आवश्यकता होगी, उन्हें पूछताछ के लिए हाजिर होना पड़ेगा। न्यायालय ने इस बात की भी हिदायत दी है कि जमानत की अवधि के दौरान आरोपी इस तरह का कोई भी आपराधिक कृत्य दोबारा नहीं दोहराएगा, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और कड़ी की जा सकती है।
यूट्यूब चैनल पर दिए गए बयान से मचा था बवाल
यह पूरा कानूनी शिकंजा एक औपचारिक शिकायत के बाद कसा गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि टी जी मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पथरीका’ पर एक वीडियो अपलोड किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सार्वजनिक शांति को भंग करना और आम जनता के मन में भय तथा अशांति का माहौल पैदा करना था।
उस विवादित वीडियो में मोहनदास ने कथित तौर पर यह तक कह दिया था कि दिल्ली में छात्रों के इस तरह के प्रदर्शनों से गंभीर घटनाएं जैसे गैंगरेप तक हो सकती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि ऐसी घटनाओं की कोई शिकायत दर्ज नहीं होगी क्योंकि विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वालों को कथित तौर पर बलात्कार पसंद है और कुछ ऐसी लड़कियां हैं जिन्हें बलात्कार होने में आनंद आता है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा था कि भले ही इस दौरान कुछ लोग मारे जाएं या हमेशा के लिए घायल हो जाएं, लेकिन स्थिति कुछ ही घंटों में नियंत्रित कर ली जाएगी और शवों को तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाएगा। इसी बयान के सामने आने के बाद से ही तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई थीं और पुलिस ने कार्रवाई की थी।



















