केरल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि राज्य के भीतर स्थानीय निकायों के उपचुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और उनके गठबंधन यूडीएफ के लिए यह मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि चार महीने पहले विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद यह उनका पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि जनता का यह रुख केवल एक तात्कालिक लहर थी या फिर कांग्रेस के पक्ष में मजबूत जनाधार तैयार हुआ है।
बारह जिलों में फैला चुनावी मैदान
इस चरण के तहत कुल बारह जिलों के अड़तीस स्थानीय वार्डों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, हालांकि इस सूची में कोल्लम और अलप्पुझा को शामिल नहीं किया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया में दो कॉर्पोरेशन वार्ड, तीन नगरपालिका वार्ड, तीन जिला पंचायत वार्ड, सात ब्लॉक पंचायत वार्ड और तेईस ग्राम पंचायत वार्ड शामिल हैं। इन सभी सीटों पर कुल एक सौ छब्बीस उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
सीटों का पुराना समीकरण और पार्टियों की रणनीतियां
मुकाबले में उतरी इन अड़तीस सीटों में से पहले ही बाईस स्थानों पर यूडीएफ का कब्जा था, जबकि पंद्रह वार्ड एलडीएफ के नियंत्रण में थे। वामपंथी गठबंधन के सामने इन चुनावों के जरिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की चुनौती है। दूसरी तरफ भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन भी इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। सभी प्रमुख दलों के लिए यह चुनाव जनता के मूड को भांपने का एक बड़ा माध्यम बन गया है।
बिजली संकट और मंत्रियों के दौरों पर गर्माई सियासत
प्रचार के दौरान विपक्षी दलों ने राज्य में बिजली की किल्लत के मुद्दों के साथ-साथ मुख्यमंत्री के हवाई सफर और अन्य मंत्रियों के विदेश दौरों से जुड़े विवादों को जोर-शोर से उठाया। इसके जवाब में सत्ताधारी दल ने अपनी कल्याणकारी नीतियों का हवाला दिया, जिसमें विशेष रूप से प्रियदर्शिनी योजना का जिक्र किया गया। इस प्रकार स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ शासन की कार्यप्रणाली पर भी बहस छिड़ी रही।
मतदान और नतीजों का पूरा कार्यक्रम
सोमवार को सुबह सात बजे से शुरू हुआ मतदान शाम छह बजे तक जारी रहा। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मतों की गिनती मंगलवार उनैस सितंबर को सुबह दस बजे से शुरू होगी और दोपहर तक सभी नतीजे सामने आने की उम्मीद है। हालांकि इन परिणामों से पूरे राज्य की राजनीति की दशा पूरी तरह तय नहीं होगी, लेकिन यह जरूर स्पष्ट हो जाएगा कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।





















