अमरूद केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से पोषक तत्वों का अनमोल खजाना माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और पोटेशियम जैसे आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया बेहतर होती है। केवल फल ही नहीं, बल्कि अमरूद की पत्तियों के सेवन से या इसका काढ़ा बनाकर पीने से ब्लड शुगर के स्तर, पाचन तंत्र से जुड़ी गड़बड़ियों और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में अद्भुत मदद मिलती है। अच्छी बात यह है कि इस बहुगुणी पौधे को उगाने के लिए आपको किसी बड़े खेत या बगीचे की आवश्यकता नहीं है। इसे आप अपने घर की छत या बालकनी में एक सही आकार के गमले में भी आसानी से रोप सकते हैं। अमरूद के पौधे को वर्ष में दो बार लगाया जा सकता है, जिसमें सबसे उत्तम समय जुलाई से अगस्त और फरवरी से मार्च का महीना माना जाता है। यद्यपि अमरूद के पौधे को गमले में लगाना बेहद आसान प्रतीत होता है, परंतु इससे भरपूर और स्वस्थ फल प्राप्त करने के लिए इसकी देखभाल की सही तकनीकों का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। यदि उचित देखभाल न की जाए, तो पौधा हमेशा हरा-भरा तो दिखेगा लेकिन उसमें फल नहीं आएंगे।
अमरूद उगाने के फायदे और नर्सरी से सही किस्म के पौधे का चुनाव
घर पर गमले के भीतर अमरूद का पौधा लगाते समय सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम सही पौधा चुनना होता है। यदि आप चाहते हैं कि आपका पौधा जल्द से जल्द फल देना शुरू करे, तो नर्सरी से हमेशा एक ग्राफ्टेड (कलमी) या बारहमासी पौधा ही खरीदें। बीज से तैयार किए गए पौधे को फल देने में कई वर्षों का समय लग सकता है, जबकि ग्राफ्टेड पौधा बहुत ही कम समय में फल देने योग्य हो जाता है। नर्सरी में पौधा पसंद करते समय इस बात का ध्यान रखें कि पौधे पर पहले से ही छोटे फल या फूल आ रहे हों। फ्रूटिंग प्लांट इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण होता है कि वह बीज से नहीं बल्कि ग्राफ्टिंग विधि से तैयार किया गया है और वह आपके घर में भी शीघ्र फलन देगा।
बाजार में अमरूद की कई उत्कृष्ट प्रजातियां उपलब्ध हैं जो गमले और कंटेनर गार्डनिंग के लिए आदर्श मानी जाती हैं। यदि आप बंपर पैदावार चाहते हैं, तो नर्सरी वाले से इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ 49 (जिसे सरदार अमरूद भी कहा जाता है), चाइनीज अमरूद, पंजाब पिंक या ताइवान पिंक किस्म के पौधे की मांग करें। ये सभी वैरायटी गमले के सीमित वातावरण में भी तेजी से फल देने के लिए जानी जाती हैं। नर्सरी से पौधे को घर लाने के बाद उसे तुरंत बड़े गमले में रोपने की गलती कभी न करें। नए पौधे को कम से कम तीन-चार दिनों के लिए घर के अन्य पौधों के बीच बनाकर रखें। दरअसल नर्सरी में पौधे ग्रीन नेट के सुरक्षित वातावरण में ढले होते हैं। अचानक सीधे गमले में लगाने से पौधा शॉक में आ सकता है। तीन से चार दिन अन्य पौधों के साथ रहने पर वह आपके घर के आसपास के तापमान और वातावरण में अच्छी तरह एडजस्ट हो जाता है।
पौधे के लिए सही गमले और आदर्श पॉटिंग सॉइल मिक्स की तैयारी
अमरूद के पौधे की जड़ें बहुत तेजी से और गहराई तक फैलती हैं। इसलिए इसे उगाने के लिए सही आकार के कंटेनर का चयन करना बेहद जरूरी होता है। पौधे के लिए कम से कम 18x18 इंच का गमला या उतना ही बड़ा ग्रो बैग इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे कम आकार के गमले में जड़ों का विकास रुक जाता है, जिससे पौधे की ग्रोथ बाधित होती है। इसके अतिरिक्त गमले के पेंदे में जल निकासी के लिए ड्रेनेज होल का होना अनिवार्य है ताकि अत्यधिक पानी जमा होकर जड़ों को सड़ा न सके।
पौधे को रोपने से पहले एक पौष्टिक पॉटिंग सॉइल मिक्स तैयार करना सबसे अहम चरण है। इसके लिए मिट्टी का एक संतुलित मिश्रण बनाएं। इसमें 30% सामान्य बाग-बगीचे की उपजाऊ मिट्टी लें। इसके साथ 40% सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट (लगभग 1 किलोग्राम) मिलाएं। मिट्टी को भुरभुरा और हल्का बनाने के लिए 30% रेत (बालू या कोकोपीट) का प्रयोग करें। पौधे में कैल्शियम की आपूर्ति और जड़ों को मजबूत बनाने के लिए इस पूरे मिश्रण में 300 ग्राम कैल्शियम पाउडर मिलाएं। इसके साथ ही पौधे को हानिकारक फंगल इंफेक्शन और कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए मिश्रण में 300 ग्राम नीम खली और 200 ग्राम सरसों की खली अच्छी तरह मिला लें। सरसों की खली पौधे को प्राकृतिक नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करती है, जबकि नीम खली कीटों से सुरक्षा कवच का काम करती है।
शुरुआती देखभाल और धूप में रखने का सही तरीका
तैयार किए गए पॉटिंग मिक्स में पौधे को गमले के ठीक बीचों-बीच सावधानीपूर्वक रोपें। रोपाई के तुरंत बाद गमले में भरपूर पानी दें ताकि मिट्टी में मौजूद हवा के पॉकेट्स खत्म हो जाएं और जड़ें मिट्टी को अच्छी तरह पकड़ लें। रोपाई के शुरुआती 4-5 दिनों तक गमले को ऐसी जगह पर रखें जहां सीधी तेज धूप न आती हो और हल्की छाया बनी रहे। चूंकि नर्सरी में पौधे ग्रीन नेट के नीचे नियंत्रित छायादार वातावरण में रखे जाते हैं, इसलिए घर की खुली छत या बालकनी के सीधे संपर्क में आने पर उन्हें तालमेल बैठाने में चार से पांच दिन का समय लगता है।
एक बार जब पौधा गमले में अच्छी तरह सेट हो जाए और रोपाई को एक हफ्ता बीत जाए, तब इसे छत या बालकनी के ऐसे स्थान पर स्थानांतरित कर दें जहां रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की भरपूर सीधी धूप मिलती हो। अमरूद एक धूप-प्रिय फलदार पौधा है। पर्याप्त धूप न मिलने की स्थिति में पौधे में पत्तियों का विकास तो होगा, लेकिन प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कमजोर होने के कारण फल और फूल नहीं बन पाएंगे।
नियमित निराई-गुड़ाई, कटाई और कीटों से सुरक्षा के उपाय
अमरूद का पौधा फल देने वाला पौधा होने के कारण भारी मात्रा में पोषक तत्वों की खपत करता है और इसे नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है। पौधे की स्वस्थ वृद्धि के लिए हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर गमले की मिट्टी की हल्की निराई-गुड़ाई जरूर करें। गुड़ाई करने से जड़ों तक ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है और मिट्टी में हवा बनी रहती है। निराई-गुड़ाई के समय ही पौधे के निचले हिस्से पर स्थित पुरानी और सूखी पत्तियों को हटा देना चाहिए। दरअसल, इन्हीं निचली पत्तियों के पीछे हानिकारक कीड़े अपने अंडे देते हैं, जो आगे चलकर पूरे पौधे को संक्रमित कर देते हैं। कीटों के हमले से बचाव के लिए महीने में कम से कम एक बार नीम ऑयल का घोल बनाकर पौधे पर अच्छी तरह स्प्रे करें।
अमरूद के पौधे में वैसे तो नर और मादा दोनों प्रकार के फूल एक ही पौधे पर पाए जाते हैं। आमतौर पर खुली छत या बालकनी में हवा और छोटे कीटों के माध्यम से परागण प्राकृतिक रूप से आसानी से हो जाता है। लेकिन यदि छत पर केवल एक ही अकेला पौधा रखा हो, तो कई बार परागण की दर कम हो जाती है जिससे फल बनने की संभावना घट सकती है। जब भी पौधे को पानी दें, तो गमले में भरपूर पानी दें, और सिंचाई का सबसे उपयुक्त समय सुबह-सुबह का होता है। यदि पौधे की ग्रोथ रुक जाए या पत्तियों पर पीले धब्बे दिखाई देने लगें, तो उन धब्बेदार पत्तियों को तुरंत तोड़कर पौधे से दूर ले जाएं और मिट्टी में गाड़ दें या जलाकर पूरी तरह नष्ट कर दें। पौधे को घना बनाने और नई शाखाएं निकालने के लिए समय-समय पर सूखी टहनियों की छंटाई करते रहें। हर 15-20 दिन में पौधे को दोबारा पोषण देने के लिए वर्मीकंपोस्ट या सड़ी गोबर खाद की खुराक देते रहें।
फूलों और पत्तियों के विकास के लिए असरदार घरेलू जैविक खाद
अमरूद के पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उसमें फूलों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए कई तरह के आसान घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं। रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले चावल को धोते समय बचा हुआ पानी गमले की मिट्टी में डालें। इसमें मौजूद स्टार्च और मिनरल्स पौधे की जड़ों को ताकत प्रदान करते हैं। इसके अलावा केले के छिलकों का इस्तेमाल एक बेहतरीन पोटाश उर्वरक के रूप में किया जा सकता है। केले के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में दो से तीन दिन के लिए भिगोकर रख दें। इस पानी में प्रचुर मात्रा में पोटेशियम होता है, जो पौधे में अधिक से अधिक फूल लाने और कलियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
गमले की मिट्टी में बची हुई फ्रेश चाय पत्ती या कॉफी पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जो मिट्टी के पीएच मान को संतुलित रखता है। व्यावसायिक और घरेलू जैविक खाद के समन्वय के लिए आप पोटाश ग्रेन्यूल्स और एक चम्मच एप्सम सॉल्ट का मिश्रण तैयार कर सकते हैं। एप्सम सॉल्ट मैग्नीशियम का मुख्य स्रोत होता है, जिससे पत्तियों में प्राकृतिक हरापन और चमक बनी रहती है तथा पौधे की इम्युनिटी बढ़ती है। इसके साथ ही पौधे में कैल्शियम की पूर्ति के लिए मामूली मात्रा में बुझा हुआ चूना मिलाया जा सकता है। इन सभी जैविक खादों को एक साथ देने के बजाय हर 20 दिन के अंतराल पर बदल-बदलकर पौधे में डालते रहें ताकि पौधे को सभी प्रकार के पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलते रहें।
फूलों को झड़ने से रोकने और फल का आकार बढ़ाने के अचूक नुस्खे
गार्डनर्स के सामने सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि अमरूद के पौधे में फूल तो बहुत आते हैं, लेकिन वे फल बनने से पहले ही सूखकर झड़ जाते हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए खट्टे मट्ठे (छाछ) का प्रयोग रामबाण उपाय है। इसके लिए पांच से छह दिन पुराना खट्टा मट्ठा या छाछ लें। छाछ जितनी खट्टी होगी, उतना ही बेहतर परिणाम मिलेगा। इस छाछ को कपड़े से अच्छे से छान लें ताकि इसमें मक्खन या मलाई का कोई अंश न रहे। 100 ग्राम छने हुए खट्टे छाछ को आधा लीटर (0.5 लीटर) पानी में अच्छी तरह मिलाकर हफ्ते में एक बार पौधे के पत्तों और फूलों पर स्प्रे करें। छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड और गुड बैक्टीरिया फूलों को झड़ने से रोकते हैं और पौधे को फंगल बीमारियों से बचाते हैं।
इसके अलावा गमले की मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करने के लिए एक विशेष जैविक घोल तैयार करें। इसके लिए एक पौधे के हिसाब से 50 ग्राम गुड़ लें और उसे आधा लीटर पानी में अच्छी तरह घोल लें। फिर इस गुड़ के पानी में 40 ग्राम बेसन मिलाकर एक घोल तैयार करें। इस घोल को गमले में डालने से पहले गमले की मिट्टी की अच्छी तरह गुड़ाई कर लें। ध्यान रहे कि यह घोल डालते समय गमले की मिट्टी शुष्क होनी चाहिए यानी उसमें बहुत अधिक नमी या पानी जमा नहीं होना चाहिए। यह गुड़ और बेसन का घोल मिट्टी में मौजूद मित्र जीवाणुओं की संख्या को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाती है। अंत में, यदि अमरूद के फल बन चुके हैं और आप उनका साइज बड़ा करना चाहते हैं, तो बाजार में मिलने वाले बायोजाइम का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन सभी उपायों को अपनाकर आप अपने गमले में लगे अमरूद के पौधे से सालों-साल बंपर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।



















