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बरसात के मौसम में चिपचिपी त्वचा और मुंहासों से पाएं छुटकारा, अपनाएं ये आसान स्किनकेयर आदतेंजीवनशैली
3 घंटे पहले· 3

बरसात के मौसम में चिपचिपी त्वचा और मुंहासों से पाएं छुटकारा, अपनाएं ये आसान स्किनकेयर आदतें

मानसून के दौरान हवा में नमी बढ़ने से त्वचा अत्यधिक तैलीय हो जाती है जिससे मुंहासे और रैशेज की समस्या बढ़ती है। इस मौसम में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सही स्किनकेयर, आहार और साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है।

Priya SharmaPriya SharmaLifestyle Editor 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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मानसून का आगमन तपती गर्मी से राहत जरूर दिलाता है, लेकिन यह मौसम अपने साथ त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां भी लेकर आता है। हवा में अत्यधिक नमी होने के कारण हमारी त्वचा पर सामान्य से अधिक तेल जमा होने लगता है। इस अत्यधिक तेल और चिपचिपाहट की वजह से चेहरे पर मुंहासे, ब्लैकहेड्स और रैशेज जैसी समस्याएं तेजी से पनपने लगती हैं। यदि वर्षा ऋतु में आपकी त्वचा पर भी अक्सर दाने या पिंपल्स निकलने लगते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ आसान बदलाव करके आप इन तकलीफों से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं।

सौम्य क्लींजिंग से हटाएं चेहरे की गंदगी

बरसात के दिनों में हवा में मौजूद धूल, मिट्टी, पसीना और अतिरिक्त तेल चेहरे पर बहुत जल्दी जमा हो जाते हैं। यह गंदगी रोमछिद्रों को बंद कर देती है जिससे मुंहासे बढ़ने लगते हैं। इसलिए अपनी स्किन टाइप के अनुसार एक सौम्य यानी माइल्ड फेस वॉश का चुनाव करें और सुबह तथा रात में सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ करें। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चेहरे को बार-बार धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल खत्म हो सकता है और वह रूखी हो सकती है, इसलिए दिन में दो बार ही चेहरा साफ करना पर्याप्त है।

ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र का चुनाव करें

अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून में हवा की नमी के कारण मॉइस्चराइज़र लगाने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह एक गलत धारणा है। त्वचा में नमी की कमी होने पर वह खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए और अधिक तेल का उत्पादन करने लगती है। त्वचा को बिना चिपचिपा बनाए हाइड्रेटेड रखने के लिए आपको ऑयल-फ्री और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए। यह आपके रोमछिद्रों को बंद किए बिना त्वचा को जरूरी नमी प्रदान करता है।

बादलों के पीछे छिपी यूवी किरणों से बचाव

आसमान में बादल छाए रहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सूरज की हानिकारक किरणें बेअसर हो गई हैं। बारिश के मौसम में भी अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें बादलों को पार करके आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। यदि आप लंबे समय तक धूप या बाहर के वातावरण में रहते हैं, तो हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन को दोबारा लगाना न भूलें।

चेहरे को बार-बार छूने से बचें और साफ-सफाई रखें

हमारे हाथ दिनभर में कई तरह की सतहों को छूते हैं जिससे उन पर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जब हम बार-बार अपने हाथों से चेहरे को छूते हैं, तो ये बैक्टीरिया त्वचा पर चले जाते हैं और मुंहासों की समस्या को गंभीर बना देते हैं। इसके अलावा, चेहरे पर निकले दानों या मुंहासों को दबाने या नोचने की भूल कभी न करें। ऐसा करने से त्वचा पर स्थाई निशान पड़ सकते हैं और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही, अपने तकिए के कवर को नियमित रूप से धोना बहुत जरूरी है क्योंकि गंदे कवर पर जमा बैक्टीरिया रातभर में आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

संतुलित आहार और प्रचुर मात्रा में पानी

हम जो कुछ भी खाते हैं उसका सीधा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। अधिक तली-भुनी चीजें, मीठा और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में सूजन बढ़ती है जो मुंहासों का कारण बन सकती है। अपनी डाइट में मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और साबुत अनाज जैसी पौष्टिक चीजों को शामिल करें। इसके साथ ही दिनभर में भरपूर मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें और त्वचा अंदर से स्वस्थ और चमकदार बनी रहे।

त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें

यदि आपकी त्वचा पर लगातार बहुत दर्दनाक मुंहासे हो रहे हैं या वे लंबे समय तक घरेलू उपायों से ठीक नहीं हो रहे हैं, तो किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना सबसे सही विकल्प है। वे आपकी त्वचा की स्थिति को समझकर सही उपचार और स्किनकेयर रूटीन की सलाह दे सकते हैं जिससे आपकी समस्या का जड़ से समाधान हो सके।

इसका आप पर असर

  • त्वचा की सुरक्षा: मानसून के दौरान सही स्किनकेयर आदतों को अपनाकर आप चेहरे के चिपचिपेपन, मुंहासों और दाग-धब्बों से बच सकते हैं।
  • आहार और स्वच्छता: खानपान में बदलाव और तकिए के कवर जैसी बुनियादी चीजों की नियमित सफाई से त्वचा के संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।

सवाल-जवाब

मानसून के मौसम में त्वचा पर अधिक मुंहासे क्यों होते हैं?
बरसात के मौसम में हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी बहुत बढ़ जाती है। इसके कारण त्वचा पर अधिक तेल और पसीना जमा होने लगता है, जो रोमछिद्रों को बंद कर देता है और मुंहासों का कारण बनता है।
क्या बारिश के दिनों में भी मॉइस्चराइज़र लगाना ज़रूरी है?
हां, मानसून में भी त्वचा को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। यदि आप मॉइस्चराइज़र नहीं लगाते हैं, तो त्वचा नमी की कमी को पूरा करने के लिए अधिक तेल पैदा करने लगती है। इस मौसम में हल्के, ऑयल-फ्री और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
बादल छाए रहने पर क्या सनस्क्रीन लगाना आवश्यक है?
हां, बादलों के बावजूद सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से पहले कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन लगाना बेहद आवश्यक है।
मुंहासों से बचने के लिए खानपान में क्या बदलाव करने चाहिए?
अधिक तेल, चीनी और प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें क्योंकि ये मुंहासों को बढ़ा सकते हैं। अपनी डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज शामिल करें और प्रचुर मात्रा में पानी पिएं।
चेहरे पर बार-बार हाथ लगाने या मुंहासों को दबाने से क्या नुकसान होता है?
हाथों के बैक्टीरिया चेहरे पर जाकर मुंहासे बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, मुंहासों को दबाने या नोचने से चेहरे पर स्थाई दाग-धब्बे पड़ सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
#जीवनशैली#मानसूनस्किनकेयरटिप्स#मुंहासोंकाइलाज#तैलीयत्वचाकीदेखभाल#बरसातमेंसनस्क्रीनकामहत्व#त्वचाकीदेखभाल#स्वस्थत्वचाकेलिएडाइट

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