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बहराइच के किसान ने दिखाई समझदारी, पावर वीडर से खेती की लागत घटाकर बढ़ाया मुनाफाजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 8:09 pm (14 मिनट पहले)· 0

बहराइच के किसान ने दिखाई समझदारी, पावर वीडर से खेती की लागत घटाकर बढ़ाया मुनाफा

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी पावर वीडर के जरिए कृषि कार्य आसान बना रहे हैं, जिससे डीजल की बचत के साथ जुताई और निराई का खर्च काफी घट गया है।

कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और आधुनिक यंत्रों का बढ़ता उपयोग किसानों के काम को न केवल आसान बना रहा है बल्कि उनकी लागत में भी भारी कमी ला रहा है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित मिर्जापुर गांव के युवा काश्तकार त्रिलोकी ने इस दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। वे बीते कई वर्षों से अपने खेतों में छोटे कृषि यंत्र पावर वीडर का नियमित उपयोग कर रहे हैं। इस मशीन ने उनके समय की बचत तो की ही है, साथ ही पारंपरिक तरीकों के मुकाबले खेती पर होने वाले भारी खर्च पर भी लगाम लगाई है।

साल 2017 से लगातार दे रहा बेहतरीन परिणाम

मिर्जापुर निवासी त्रिलोकी ने यह पावर वीडर वर्ष 2017 में खरीदा था। खरीद के बाद से अब तक यह यंत्र बिना किसी बड़ी तकनीकी खराबी या रुकावट के लगातार सुचारू रूप से काम कर रहा है। ईंधन दक्षता के मामले में यह मशीन बेहद किफायती साबित हुई है। त्रिलोकी के अनुसार, यह उपकरण लगभग 1 घंटे के संचालन में केवल 1 लीटर डीजल की खपत करता है। इस हिसाब से देखा जाए तो सिर्फ आधा लीटर डीजल खर्च करके करीब 30 मिनट के भीतर एक बीघे जमीन की जुताई बहुत आसानी से पूरी हो जाती है।

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गन्ना और सब्जी उत्पादकों के लिए वरदान

यह पावर वीडर विशेष रूप से उन किसानों के लिए बेहद उपयोगी है जो गन्ने और हरी सब्जियों की फसलें उगाते हैं। खेतों में जहां बड़े ट्रैक्टरों का पहुंचना मुश्किल होता है अथवा दो कतारों के बीच लगभग 3 फीट की सीमित जगह बचती है, वहां इस कॉम्पैक्ट मशीन को चलाना काफी सुविधाजनक रहता है। यह फसलों के बीच उगे अनचाहे खरपतवार को जड़ से साफ करने और पौधों के आसपास की मिट्टी को भुरभुरी व हवादार बनाने में बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। इससे फसलों की जड़ों का विकास तेजी से होता है।

मजदूरों की किल्लत और बजट के अनुसार विकल्प

वर्तमान दौर में ग्रामीण इलाकों में कृषि मजदूरों की भारी कमी देखने को मिलती है, जिससे निराई-गुड़ाई का खर्च बढ़ जाता है। त्रिलोकी का कहना है कि जो किसान श्रमिकों की अनुपलब्धता या खेती की बढ़ती मजदूरी से जूझ रहे हैं, विशेषकर सीमित जोत वाले छोटे किसान, उनके लिए पावर वीडर एक सटीक और सस्ता समाधान है। वर्तमान बाजार में अलग-अलग क्षमता वाले पावर टिलर और वीडर मौजूद हैं। इनकी शुरुआती कीमत करीब 25,000 रुपये से प्रारंभ होकर मॉडल और इंजन क्षमता के आधार पर 2 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक जाती है, जिसे किसान अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के हिसाब से चुन सकते हैं।

सवाल-जवाब

त्रिलोकी ने यह पावर वीडर कब खरीदा था?
बहराइच के मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी ने यह पावर वीडर वर्ष 2017 में खरीदा था।
पावर वीडर एक घंटे में कितना डीजल खपत करता है?
यह पावर वीडर लगभग 1 घंटे काम करने पर मात्र 1 लीटर डीजल की खपत करता है।
एक बीघा खेत की जुताई करने में कितना समय और डीजल लगता है?
इस मशीन से आधा लीटर डीजल में करीब 30 मिनट के भीतर एक बीघे खेत की जुताई आसानी से की जा सकती है।
यह मशीन किन फसलों के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है?
यह उपकरण मुख्य रूप से गन्ने और साग-सब्जियों की फसलों के लिए बहुत उपयोगी है, जहां कतारों के बीच 3 फीट तक की जगह होती है।
बाजार में पावर वीडर की शुरुआती कीमत क्या है?
बाजार में पावर वीडर की शुरुआती कीमत लगभग 25,000 रुपये से शुरू होकर क्षमता के आधार पर 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक जाती है।
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