घर के बगीचे या बालकनी में रखे गमलों में अक्सर कुछ समय बाद पौधों का विकास थम जाता है। अगर गमले में पानी डालते ही वह सतह पर तैरने लगे, नीचे रिसने में काफी वक्त ले या फिर मिट्टी सूखकर पत्थर जैसी कड़ी हो जाए, तो यह मिट्टी के अत्यधिक दब जाने यानी सॉइल कॉम्पेक्शन का सीधा संकेत है। जब मिट्टी के कण आपस में बहुत कसकर चिपक जाते हैं, तो जड़ों को सांस लेने के लिए जरूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। साथ ही पानी भी गहराई तक नहीं पहुंचता, जिससे पौधे धीरे-धीरे मुरझाने या कमजोर होने लगते हैं। हालांकि कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक बागवानी तरीकों से गमले की सख्त मिट्टी को फिर से मुलायम, भुरभुरा और भरपूर उपजाऊ बनाया जा सकता है।
वर्मीकम्पोस्ट से बढ़ाएं मिट्टी में जैविक तत्व
सख्त हो चुकी मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए अच्छी तरह पकी हुई केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग सबसे भरोसेमंद तरीका है। इसके इस्तेमाल के लिए गमले की सबसे ऊपरी सतह को किसी छोटे औजार से हल्के हाथों से खुरच कर ढीला करें और उसमें उचित मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट अच्छी तरह मिला दें। यह जैविक खाद मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों का स्तर बढ़ाती है, जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और वह भुरभुरी बनती है। ध्यान रखें कि एक ही बार में बहुत ज्यादा मात्रा में खाद डालने से बचें, बल्कि संतुलित मात्रा में ही इसका प्रयोग करें ताकि मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
कोकोपीट से लाएं हल्कापन और नमी संतुलन
जिन गमलों की मिट्टी बार-बार जम जाती है और सूखते ही कड़क डली बन जाती है, उनमें कोकोपीट मिलाना एक बेहतरीन समाधान साबित होता है। नारियल के रेशों से तैयार यह माध्यम मिट्टी को हल्का और हवादार बनाता है, जिससे हवा का आवागमन सुचारू होता है। इसके साथ ही यह जरूरत के अनुसार नमी को रोककर रखने की क्षमता भी बढ़ाता है। कोकोपीट को मिट्टी के साथ अच्छी तरह एकसार करके मिलाना चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी पौधे को केवल कोकोपीट में लगाने के बजाय इसे मिट्टी और खाद के साथ संतुलित अनुपात में मिलाकर ही इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहता है।
मोटी रेत से सुधारें जल निकासी
अगर आपके गमले की मिट्टी बहुत भारी, चिकनी या चिपचिपी है, तो उसमें थोड़ी मात्रा में मोटे दाने वाली साफ रेत मिलाना बेहद असरदार होता है। मोटी रेत मिट्टी के कणों के बीच आवश्यक जगह बनाती है, जिससे अतिरिक्त पानी नीचे से आसानी से बाहर निकल जाता है और जड़ों में जमाव नहीं होता। यहां एक बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि बहुत बारीक रेत का उपयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि बारीक रेत मिट्टी के कणों के साथ मिलकर उसे और अधिक ठोस तथा सीमेंट जैसी सख्त बना सकती है। इसलिए हमेशा साफ और दरदरी रेत का ही चयन करें।
हल्की गुड़ाई से तोड़ें ऊपरी पपड़ी
मिट्टी को भुरभुरा बनाए रखने के लिए हर बार नई खाद डालना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि नियमित गुड़ाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। समय-समय पर किसी छोटे ट्रॉवेल या गार्डनिंग फोर्क की मदद से गमले की ऊपरी 1 से 2 इंच मिट्टी को सावधानीपूर्वक ढीला करें। ऐसा करने से सतह पर पानी और धूप के कारण बनी सख्त पपड़ी टूट जाती है, जिससे मिट्टी के अंदर तक ताजी हवा आसानी से पहुंचती है। गुड़ाई करते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि औजार को बहुत ज्यादा गहराई में न चलाएं, ताकि पौधे की नाजुक मुख्य जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे।
सड़ी हुई खाद और उचित ड्रेनेज व्यवस्था
पूरी तरह से सड़ी-गली गोबर की खाद या सूखी पत्तियों से तैयार खाद मिलाने से भी मिट्टी में लंबे समय तक जैविक गुणवत्ता बनी रहती है। समय बीतने के साथ यह खाद मिट्टी की बनावट को नरम और स्पंजी बनाती है तथा पौधों को बढ़ने के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती है। हमेशा सुनिश्चित करें कि इस्तेमाल की जा रही खाद पूरी तरह अपघटित हो, कच्ची न हो। इसके अलावा गमले के नीचे बने निकासी छेदों की समय-समय पर जांच करें ताकि पानी रुकने न पाए, क्योंकि गमले में ठहरा हुआ पानी धीरे-धीरे मिट्टी को दबाकर कड़ा बना देता है। पानी हमेशा पौधे की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही दें।





















