सिनेमा जगत की दिग्गज अदाकारा वहीदा रहमान पांच वर्षों के अंतराल के पश्चात एक बार फिर अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। निर्देशक सुधीर मिश्रा की महात्मा गांधी के जीवन पर केंद्रित आगामी फिल्म में उनकी आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। इस ऐतिहासिक ड्रामा में वह महात्मा गांधी की माता पुतलीबाई की बेहद अहम भूमिका निभाती हुई दिखाई देंगी। पांच साल तक बड़े पर्दे से दूरी बनाए रखने के बाद उनका इस तरह के ऐतिहासिक किरदार के साथ लौटना सिनेमा प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन गया है।
मनोज बाजपेयी निभाएंगे महात्मा गांधी का किरदार
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका केंद्रीय अभिनय दल है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी फिल्म में महात्मा गांधी के मुख्य किरदार को रूपहले पर्दे पर जीवंत करेंगे। पूरी कहानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े 21 दिनों की बेहद संवेदनशील घटनाओं पर बुनी गई है। यह पटकथा मुख्य रूप से उस दौर में देश के इस महान नेता के शांत स्वभाव और उनके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की आंतरिक यात्रा को गहराई से रेखांकित करती है। फिल्म के निर्माण दल में वहीदा रहमान और मनोज बाजपेयी के साथ साथ बेहतरीन अभिनेता सौरभ शुक्ला भी एक मुख्य किरदार में नजर आएंगे।
फिल्म के निर्देशक ने व्यक्त किया सम्मान
प्रोजेक्ट के साथ दिग्गज अदाकारा के जुड़ने पर निर्देशक सुधीर मिश्रा ने अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि वहीदा जी का इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना उनके लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। निर्देशक ने उनकी कालजयी फिल्मों का स्मरण करते हुए बताया कि प्यासा, साहिब बीबी और गुलाम, कागज के फूल तथा गाइड जैसी कृतियों से उनका गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। बड़े पर्दे पर उनकी इन कलाकृतियों को देखकर बड़े होने के कारण इन फिल्मों ने उनकी सोच पर गहरी छाप छोड़ी है, जिस वजह से उनके साथ काम करना किसी सपने के सच होने जैसा प्रतीत होता है।
स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए पहलुओं पर आधारित निर्माण
यह ऐतिहासिक फिल्म भारत की आजादी के दौर के इतिहास से जुड़े एक बेहद गंभीर और विचारणीय अध्याय से पर्दा उठाएगी। फिल्म के निर्देशन की बागडोर जहां सुधीर मिश्रा के हाथों में है, वहीं अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत ने ए बनारस मीडियावर्क्स के बैनर तले इसका निर्माण किया है। इस भव्य प्रोजेक्ट को NH स्टूडियोज़ द्वारा दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। अनुभवी कलाकारों की यह जुगलबंदी आजादी के संघर्ष के दौरान व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए फैसलों को एक नए नजरिए से पेश करने की तैयारी में है।



















