बरसात के मौसम के बाद नींबू के पौधों की विशेष देखभाल करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। मानसूनी बारिश थमने के पश्चात यदि पौधे की जड़ों के इर्द-गिर्द पानी इकट्ठा रह जाए, तो यह पौधे के स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। लंबे समय तक ठहरा हुआ पानी जड़ों को सड़ाने लगता है, जिससे पौधे की आंतरिक संरचना कमजोर पड़ने लगती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पहला कदम यह होना चाहिए कि जमीन अथवा थाले में ठहरे हुए फालतू पानी की फौरन निकासी की जाए। तने के आसपास मौजूद गीली मिट्टी को धूप और हवा लगने दें, ताकि जड़ों तक ऑक्सीजन का सुचारू प्रवाह फिर से शुरू हो सके।
सड़ी और सूखी शाखाओं की छंटाई से बचाएं पौधे की ऊर्जा
लगातार बनी रहने वाली नमी के कारण नींबू के पौधे की अनेक शाखाएं या तो सूख जाती हैं या उनमें सड़न की समस्या पैदा हो जाती है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, ऐसी रोगग्रस्त और बेजान टहनियों को बागवानी कटर या तेज कैंची की मदद से सावधानीपूर्वक काटकर अलग कर देना चाहिए। पौधे से सूखी टहनियों की समय पर छंटाई करने से उसकी गैरजरूरी ऊर्जा खर्च होने से बच जाती है। छंटाई के बाद पूरे पौधे के भीतर धूप और ताजी हवा का आवागमन सहज हो जाता है, जिससे निचली और नई शाखाओं से ताजी हरी पत्तियां तेजी से फूटने लगती हैं।
बोर्डो पेस्ट से तने को फफूंद के हमले से सुरक्षित करें
शाखाओं की कटाई-छंटाई करने के बाद पौधे पर फफूंद जनित बीमारियों का हमला होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इस जोखिम को निष्प्रभावी करने के लिए पौधे के मुख्य तने पर बोर्डो पेस्ट का गाढ़ा लेप लगाना चाहिए। यह सुरक्षात्मक लेप पौधे को तमाम तरह के हानिकारक फंगल संक्रमणों से दूर रखता है। जब मुख्य तना सुरक्षित और विकारमुक्त रहता है, तो मिट्टी से सोखे गए जरूरी पोषक तत्व बिना किसी रुकावट के पौधे के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंचते रहते हैं।
कॉपर ऑक्सीक्लोराइड से मिट्टी के सूक्ष्मजीवों और फंगस का खात्मा
बरसात के बाद जमीन में छिपी फफूंद और रोगाणुओं से निपटना भी उतना ही आवश्यक है। इसके समाधान के रूप में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव बेहद असरदार साबित होता है। इस चूर्ण को पानी में भली-भांति घोलकर पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी में गहराई तक डालना चाहिए। यह मिश्रण मिट्टी में मौजूद नुकसानदेह बैक्टीरिया और फंगस को समाप्त कर देता है। जब जड़ें हानिकारक फंगस से मुक्त रहती हैं, तो वे मिट्टी से जरूरी मिनरल्स और खाद के तत्वों को बिना किसी अवरोध के ग्रहण कर पाती हैं।
सड़ी हुई देसी गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्ट से पोषण
मानसून के उपरांत पौधे को खोई हुई ताकत वापस लौटाने के लिए पुरानी और अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की देसी खाद का प्रयोग करना चाहिए। यह खाद मिट्टी की भौतिक बनावट को बेहतर बनाती है और पौधे को भरपूर मात्रा में नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है। इसके प्रयोग से मिट्टी की नमी संजोने की क्षमता में सुधार आता है और पौधे की बनावट मजबूत होती है। यदि किसी कारणवश अच्छी गोबर की खाद न मिल पाए, तो वर्मीकंपोस्ट एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। केंचुओं द्वारा तैयार यह खाद आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का खजाना होती है, जो जमीन की उर्वरा शक्ति को नई ऊर्जा देती है। इसे तने से थोड़ी दूरी बनाकर मिट्टी में मिलाएं और ऊपर से हल्की सिंचाई कर दें।
सीवीड एक्सट्रैक्ट से बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता और फलों का आकार
खाद के मिश्रण के साथ समुद्री शैवाल से तैयार सीवीड एक्सट्रैक्ट मिलाना पौधे के लिए एक जैविक टॉनिक की तरह कार्य करता है। यह प्राकृतिक उत्पाद पौधे की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और उसे किसी भी प्रकार के तनाव से उबारता है। इसके नियमित उपयोग से जड़ों का जाल तेजी से फैलता है, नई कलियां प्रचुरता से निकलती हैं और फूल झड़ने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो जाती है। समय पर मिला संतुलित पोषण नींबू के फल को बड़ा, रसीला और गुणवत्तापूर्ण बनाने में मदद करता है, जिससे आगामी सीजन में भरपूर पैदावार हासिल होती है।



















