घर की सुंदरता में दीवारें मुख्य भूमिका निभाती हैं। दीवारें जितनी चिकनी और चमकदार होंगी, घर का लुक उतना ही बेहतर दिखेगा, लेकिन सीलन आने पर दीवार के पास रखा सामान भी खराब होने लगता है। दीवाली का त्योहार नजदीक आ रहा है और लोग दशहरा से ही घरों की साफ-सफाई में जुट जाते हैं। ऐसे में यह सही समय है कि सीलन का स्थायी समाधान निकाला जाए। दीवारों की सीलन दूर करने के लिए ज्यादातर लोग केवल वॉल पुट्टी और पेंट करवा लेते हैं, जिसके कुछ समय बाद पेंट फिर से उखड़ने लगता है। सवाल यह है कि सीलन का स्थायी समाधान आखिर क्या है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।
सीलन के मूल कारणों की पहचान और सुधार
अक्सर लोग दीवारों की सीलन से निजात पाने के लिए रंग-रोगन और डेंटिंग-पेंटिंग करवा लेते हैं और खूब पैसे खर्च करते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद दोबारा सीलन आ जाती है और पेंट झड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले यह जांच करनी चाहिए कि सीलन किस कारण से आ रही है। कई बार सीलन छत या बाथरूम से आती है, तो कई बार पाइप में लीकेज इसके पीछे की वजह बनती है। यदि छत पर पानी जमा होने के कारण सीलन आ रही है, तो सबसे पहले जल निकासी की व्यवस्था पर काम करना चाहिए और छत पर वॉटरप्रूफ कोटिंग भी कराई जा सकती है। यदि समस्या बाथरूम की वजह سے है, तो अंदर से वाटरप्रूफिंग करवाना जरूरी होता है। बाथरूम के अंदर लगी टाइलों का ग्राऊट निकल जाने के कारण भी पानी रिसने लगता है, इसलिए सबसे पहले बाथरूम में ग्राउटिंग करवाना आवश्यक है ताकि बेहतर परिणाम मिल सकें।
डंप प्रूफ का इस्तेमाल और सही तरीका
कई बार दीवारों पर केवल बारिश के सीजन में सीलन दिखाई देती है और तीन-चार महीने में सूख जाती है, लेकिन इस दौरान भी वह दीवार को अंदर से नुकसान पहुंचाती है। कई मामलों में पड़ोसी के बाथरूम की वजह से भी दीवारों में सीलन की समस्या पैदा हो जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए केवल वॉल पुट्टी और पेंट न करवाएं, बल्कि सबसे पहले एक स्क्रेपर की मदद से पूरी दीवार को अच्छी तरह साफ कर लें। दीवार से पपड़ी हटाने और उसे साफ करने के बाद एशियन पेंट्स, ड्यूलक्स, बर्जर या किसी अन्य कंपनी का डंप प्रूफ खरीदें, जो करीब 400 रुपये में मिल जाता है। इस घोल में पानी बिल्कुल न मिलाएं और ब्रश की मदद से दीवार पर पहला कोट करें। जब पहला कोट सूख जाए, तब दूसरा कोट लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अगर पहला कोट वर्टिकल यानी ऊपर से नीचे किया है, तो दूसरा कोट हॉरिजॉन्टल यानी आड़ा होना चाहिए।
हाइड्रोलॉक और वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशन का प्रयोग
यदि दीवारों में सीलन की समस्या बहुत ज्यादा है, कमरे में बार-बार सीलन लौट आती है और रुकने का नाम नहीं ले रही है, तो एक अन्य उपाय भी आजमाया जा सकता है। इसके लिए एशियन पेंट्स का हाइड्रोलॉक खरीदा जा सकता है जो करीब 600 रुपये का आता है और यह एक बेहतरीन वॉटरप्रूफिंग सॉल्यूशन है। इसके अलावा डॉ. फिक्सिट का 302 सुपर लेटेक्स भी खरीदा जा सकता है, और यदि 302 उपलब्ध न हो तो 301 यूआरपी का इस्तेमाल किया जा सकता है जो करीब 380 रुपये में मिलता है। हमेशा यह ध्यान रखें कि जब भी डॉ. फिक्सिट का 302 सुपर लेटेक्स खरीदें, वह 18 महीने से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए और हाइड्रोलॉक भी दो साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए। अब हाइड्रोलॉक को सीधे ब्रश से दीवार पर लगाएं और इसमें पानी बिल्कुल न मिलाएं। पहले इसे वर्टिकल यानी ऊपर से नीचे की ओर लगाएं और दूसरा कोट 12 से 14 घंटे बाद हॉरिजॉन्टल लगाएं। इसके बाद कोई भी वॉल पुट्टी लें और 10 किलो पुट्टी में एक लीटर डॉ. फिक्सिट का 302 सुपर लेटेक्स मिला सकते हैं। एक किलो पुट्टी में 100 एमएल डॉ. फिक्सिट पानी में मिलाकर डालें और फिर पुट्टी को दीवार पर अप्लाई करें।
पुट्टी की घिसाई और प्राइमर का महत्व
पुट्टी लगाने के 4 से 5 घंटे बाद जब वह पूरी तरह सूख जाए, तब रेगमार पेपर से दीवार की अच्छी तरह घिसाई करें। घिसाई का काम पूरा होने के बाद दीवार पर प्राइमर का इस्तेमाल जरूर करें क्योंकि पुट्टी लगाने के बाद दीवार में हल्की नमी रह जाती है और सतह खुरदुरी होती है, ऐसे में प्राइमर बेहद जरूरी हो जाता है। प्राइमर लगाने से पेंट का रंग फीका नहीं पड़ता है, उसका शेड बहुत अच्छे से उभरकर आता है और पेंट जल्दी खराब भी नहीं होता है। पपड़ी बनकर पेंट दीवार से बाहर नहीं निकलता है क्योंकि प्राइमर पेंट के लिए एक मजबूत फाउंडेशन का काम करता है और पेंट को लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है। इन सभी उपायों को अपनाकर आप अपने घर की दीवारों को सीलन से हमेशा के लिए सुरक्षित कर सकते हैं।
















