त्योहारी मौसम में तैयार करें दक्षिण भारतीय मुरक्कू, लंबे समय तक ताजा और कुरकुरा रहेगा यह पारंपरिक स्नैकजहांगीरपुरी में 499 तक पहुंचा वायु प्रदूषण का स्तर, सीमाओं पर निगरानी कड़ीअमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ईरान शांति चर्चाओं के बीच सोने की कीमतों में नरमी, 3,950 डॉलर के नीचे फिसला भावडिजिटल सेंधमारी से यूरोपीय सुपरमार्केट्स के फ्रिज उबलने लगे, खाद्य सुरक्षा पर गहराया संकटहल्द्वानी में सीएम पुष्कर सिंह धामी के एक बयान से आईएएस दीपक रावत के सियासी भविष्य पर शुरू हुई चर्चातिहाड़ में जान का खतरा बताकर आफताब पूनावाला पहुंचा कोर्ट, साकेत अदालत ने सुरक्षा बढ़ाने और सेल बदलने का दिया निर्देशकर्क राशि में मंगल का संचरण: 12 नवंबर तक 4 राशियों के लिए करियर, धन और तरक्की के शुभ योगत्योहारी भीड़ रोकने के लिए दिल्ली के बड़े रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री थमीलंदन में जान गंवाने वाले दीपक वाधवा का पार्थिव शरीर पहुंचेगा भारत, परिजनों को मिला अनापत्ति प्रमाणपत्रलाइव कॉन्सर्ट में गूंजा 'जिंदा' तो झूमे हजारों फैंस, फरहान अख्तर ने शेयर किया भावुक पल
घर पर तैयार करें समस्तीपुर का प्रसिद्ध काला जामुन, हलवाई संजीव ने साझा किए सटीक अनुपात और तलने के नियमजीवनशैली
3 नव॰ 2026, 11:40 am (5 मिनट पहले)· 0

घर पर तैयार करें समस्तीपुर का प्रसिद्ध काला जामुन, हलवाई संजीव ने साझा किए सटीक अनुपात और तलने के नियम

समस्तीपुर के मशहूर काले जामुन का असली स्वाद अब घर की रसोई में पाया जा सकता है, जहां हलवाई संजीव ने छेना, खोवा और तलने की आंच से जुड़े जरूरी नुस्खे बताए हैं।

मिठाइयों के शौकीनों के बीच समस्तीपुर के काले जामुन की अपनी एक अलग पहचान है, जिसका गहरा रंग और रसदार बनावट पारंपरिक कारीगरी की मिसाल मानी जाती है। हलवाई की दुकान जैसा असली स्वाद घर की रसोई में उतारने के लिए सामग्री के सटीक अनुपात और पकाने की प्रक्रिया की बारीक समझ होना बेहद जरूरी है। कारीगर संजीव के अनुसार, ताजे दूध से छेना तैयार करने, खोवा मिलाने, लोइयों को बिना दरार के आकार देने और अंत में सही तापमान वाली चाशनी में डुबोने तक प्रत्येक कदम का अपना विशेष महत्व होता है। जो लोग मिलावट रहित और शुद्ध मिठास का आनंद लेना चाहते हैं, वे इन बुनियादी चरणों को समझकर इस पारंपरिक मिठाई को तैयार कर सकते हैं।

ताजा छेना और खोवा बनाने की बुनियादी प्रक्रिया

काले जामुन का आधार मुख्य रूप से छेना और खोवा पर निर्भर करता है, इसलिए दोनों का सही तरीके से बनना जरूरी है। कारीगर संजीव ने समझाया कि छेना बनाने के लिए सबसे पहले दूध को अच्छी तरह उबाला जाता है। जब दूध में सही उबाल आ जाए, तब उसमें धीरे-धीरे नींबू का रस अथवा उपयुक्त खाद्य अम्ल डाला जाता है, जिससे दूध फटकर पानी और छेने के थक्कों में बंट जाता है। इसके बाद कपड़े या छलनी से छानकर छेने का अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दिया जाता है ताकि मिश्रण में नमी संतुलित रहे। वहीं दूसरी ओर, खोवा तैयार करने के लिए दूध को कड़ाही में लगातार चलाते हुए गर्म किया जाता है, जिससे वह गाढ़ा होकर ठोस मावे का रूप धारण कर लेता है।

ये भी पढ़ें

एक किलोग्राम मिठाई के लिए सामग्री का सटीक अनुपात

संजीव के बताए गणित के अनुसार, यदि लगभग एक किलोग्राम काला जामुन बनाना हो, तो करीब 250 ग्राम ताजा छेना और 250 ग्राम खोवा का अनुपात आदर्श माना जाता है। इस मिश्रण में सही खिंचाव और बनावट लाने के लिए लगभग 50 ग्राम सूजी, थोड़ी सी चीनी और सुगंध के लिए इलायची पाउडर मिलाया जाता है। मिश्रण को बांधने तथा मिठाई को भीतर से स्पंजी बनाने के लिए एक चुटकी खाने वाला सोडा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, छेने और खोवे के भीतर मौजूद नमी के स्तर को देखते हुए सूजी या अन्य सूखे तत्वों की मात्रा में मामूली फेरबदल की जा सकती है। सभी सामग्रियों को हथेलियों से तब तक अच्छी तरह मसला जाता है जब तक कि एक चिकना और नरम डो न बन जाए, क्योंकि अत्यधिक सूखापन मिठाई को तोड़ सकता है और चिपचिपापन उसका आकार बिगाड़ सकता है।

लोइयों को भरना और धीमी आंच पर तलने का कौशल

मिश्रण तैयार होने के पश्चात उसे छोटी-छोटी गोल लोइयों का रूप दिया जाता है। कारीगर संजीव के अनुसार, प्रत्येक लोई के मध्य में थोड़ा सा मावा अथवा चीनी के दाने भरने से मिठाई खाते समय अंदर एक अनोखा और रसीला स्वाद महसूस होता है। लोई बनाते समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि उसकी बाहरी सतह पूरी तरह चिकनी हो और उस पर किसी प्रकार की दरार न रहे, अन्यथा तलते समय वे फट सकती हैं। कड़ाही में घी अथवा रिफाइंड तेल को मध्यम आंच पर गर्म किया जाता है और लोइयों को धीरे-धीरे तला जाता है। काले जामुन की बाहरी परत गहरे भूरे रंग की होनी चाहिए, लेकिन आंच बहुत तेज रखने पर बाहर का हिस्सा तुरंत काला पड़ जाएगा और अंदर का भाग कच्चा रह जाएगा, इसलिए लगातार तापमान नियंत्रण रखना जरूरी है।

गुनगुनी चाशनी में डुबोना और परोसना

तलने के समानांतर ही एक अलग बर्तन में चीनी और पानी को मिलाकर चाशनी तैयार की जाती है। जब तली हुई लोइयां गहरे भूरे रंग की होकर तैयार हो जाएं, तो उन्हें कड़ाही से निकालकर कुछ देर स्थिर होने दिया जाता है। इसके बाद इन तली हुई मिठाइयों को गुनगुनी चाशनी में डाला जाता है ताकि चाशनी भीतर तक रिस सके। कुछ समय तक चाशनी को पूरी तरह सोख लेने के बाद समस्तीपुर शैली का यह काला जामुन परोसने के लिए तैयार हो जाता है।

सवाल-जवाब

1 किलोग्राम काला जामुन बनाने के लिए कितना छेना और खोवा चाहिए?
कारीगर संजीव के अनुसार, लगभग एक किलोग्राम मिठाई बनाने के लिए 250 ग्राम छेना और 250 ग्राम खोवा का अनुपात लेना चाहिए।
काले जामुन के मिश्रण में सूजी क्यों मिलाई जाती है?
मिश्रण में लगभग 50 ग्राम सूजी मिलाने से लोइयों को सही बनावट मिलती है और वे अच्छी तरह बंधती हैं।
लोई बनाते समय किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
लोई की बाहरी सतह बिल्कुल चिकनी होनी चाहिए और उस पर कहीं भी दरार नहीं रहनी चाहिए।
लोई के केंद्र में क्या भरा जा सकता है?
अतिरिक्त स्वाद के लिए लोई के बीच में थोड़ा सा मावा या चीनी के दाने भरे जा सकते हैं।
काले जामुन को तेज आंच पर क्यों नहीं तलना चाहिए?
तेज आंच पर तलने से मिठाई की ऊपरी सतह तुरंत गहरी हो जाएगी, लेकिन उसका भीतरी हिस्सा कच्चा रह जाएगा।
तली हुई मिठाई को चाशनी में कब डालना चाहिए?
तलने के बाद मिठाई को थोड़ी देर संभलने दें और फिर उसे गुनगुनी चाशनी में डालकर छोड़ दें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp