केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बयानों पर तीखा ऐतराज जताया है। अठावले ने साफ तौर पर कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिपके द्वारा व्यक्त किए गए विचार पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक हैं। उन्होंने दिपके को आगाह किया कि इस तरह की अनुचित बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नेहरू वाले बयान पर अठावले की कड़ी आपत्ति
मुंबई में मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख ने अभिजीत दिपके के उस दावे की कड़ी भर्त्सना की, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा डॉ. आंबेडकर को पहचान दिलाने में मदद की बात कही थी। अठावले ने इस पूरे तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा दावा राष्ट्र निर्माण में आंबेडकर के अमूल्य योगदान की उपेक्षा करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वतंत्र भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने में बाबासाहेब की भूमिका देश के लोकतांत्रिक सफर और विकास की सबसे मजबूत नींव रही है।
लोकतांत्रिक मर्यादा और आलोचना की सीमा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी आरपीआई नेता ने दिपके को आड़े हाथों लिया। अठावले ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के भीतर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह आलोचना मर्यादित होनी चाहिए। उनका आरोप है कि दिपके की भाषा ने जिम्मेदार राजनीतिक संवाद के सभी तय दायरों को लांघ दिया है।
युवा समर्थन का सही इस्तेमाल करने की नसीहत
छात्रों और युवाओं के बीच अभिजीत दिपके को मिल रहे समर्थन पर बात करते हुए अठावले ने उन्हें सकारात्मक सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं से मिलने वाले जनसमर्थन का उपयोग समाज के रचनात्मक कार्यों में होना चाहिए। सीजेपी प्रमुख को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि निरर्थक विवादों को जन्म देने वाले बयानों के बजाय उन्हें व्यापक जनहित और सामाजिक सरोकार के जरूरी मुद्दों पर अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।
विकास कार्यों पर गौर करने और माफी मांगने की मांग
अठावले ने स्पष्ट मांग रखी कि अभिजीत दिपके को डॉ. बीआर आंबेडकर के संदर्भ में कही गई अपनी बातों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ आपत्तिजनक वक्तव्य देने से परहेज करने को कहा। केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि दिपके पूरे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं, इसलिए उन्हें शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाने से पहले राज्य में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की प्रगति को भी देखना चाहिए। आरपीआई प्रमुख ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि दिपके ने इस तरह के अपमानजनक बयान बंद नहीं किए, तो उनकी पार्टी उनके खिलाफ और भी कड़ा रुख अख्तियार करेगी।



















