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जेब में हाथ डालकर खड़े होने की आदत क्या कहती है आपके बारे में, मनोविज्ञान से समझिए छिपा इशाराजीवनशैली
17 जून 2026, 4:49 pm (43 दिन पहले)· 2

जेब में हाथ डालकर खड़े होने की आदत क्या कहती है आपके बारे में, मनोविज्ञान से समझिए छिपा इशारा

जेब में हाथ डालकर खड़ा होना सिर्फ आराम की आदत नहीं है, बॉडी लैंग्वेज के जानकार मानते हैं कि यह छोटी सी हरकत आपके मन की स्थिति और स्वभाव के कई इशारे देती है।

किसी का इंतज़ार करते हुए, भीड़ में अकेले खड़े होते हुए या यूं ही टहलते हुए हमारे हाथ कब पैंट की जेब में चले जाते हैं, अक्सर हमें पता ही नहीं चलता। ज़्यादातर लोग इसे बस एक आदत मान लेते हैं जिसमें खड़े रहना आरामदायक लगता है। लेकिन मनोविज्ञान की नज़र से देखें तो यह मामूली सी मुद्रा कुछ और ही कहानी कहती है। दरअसल जब आप जेब में हाथ डालते हैं, उसी पल आपका दिमाग बिना एक शब्द बोले सामने वाले को एक संदेश भेज रहा होता है।

शब्दों से ज़्यादा बोलता है शरीर

बॉडी लैंग्वेज के जाने माने विशेषज्ञ डॉ. अल्बर्ट मेहराबियन ने अपनी रिसर्च में यह बात रखी थी कि हम मुंह से जो कहते हैं, उससे कहीं ज़्यादा गहरा असर इस बात का होता है कि हमारा शरीर उस वक्त कैसा बर्ताव कर रहा है। इसी सिद्धांत के हिसाब से अनजाने में जेब में हाथ डालना भी एक तरह का इशारा बन जाता है, जो सामने वाले के मन पर अपनी छाप छोड़ता है।

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एक 'सीक्रेट कवच' की तरह काम करती है यह मुद्रा

किसी नए या असहज माहौल में जब हम थोड़ा नर्वस महसूस करते हैं, तो हमारा शरीर खुद ब खुद सिकुड़ने लगता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे ही हमें लगता है कि आसपास का माहौल थोड़ा अनजाना है, हमारा शरीर 'प्रोटेक्टिव मोड' में आ जाता है। चूंकि हाथ हमारी बातचीत और हाव भाव का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं, इसलिए उन्हें जेब में छिपा लेना अपने आप को एक मानसिक सुरक्षा देने जैसा होता है। और अगर इसके साथ कंधे भी थोड़े झुके हुए हों, तो इसका मतलब साफ है कि वह व्यक्ति उस जगह की लाइमलाइट से बचना चाहता है।

डरपोक नहीं, हो सकता है आप अंतर्मुखी हों

इसका यह मतलब कतई नहीं कि जेब में हाथ डालने वाला हर इंसान डरा हुआ या कमज़ोर है। टोरंटो यूनिवर्सिटी की एक स्टडी की मानें तो जो लोग स्वभाव से थोड़े इंट्रोवर्ट यानी अंतर्मुखी होते हैं या अपने काम से काम रखना पसंद करते हैं, वे भी यही मुद्रा अपनाते हैं।

रिसर्च की मानें तो किसी मीटिंग या पार्टी में लगातार जेब में हाथ डालकर खड़ा रहने वाला व्यक्ति आमतौर पर खुद आगे बढ़कर बातचीत शुरू नहीं करता। वह पहले पूरे माहौल को भांपता है, लोगों को गौर से देखता है और जब उसे भरोसा हो जाता है कि अब माहौल सुरक्षित है, तभी अपने हाथ बाहर निकालकर सबके साथ घुलना मिलना शुरू करता है।

गहरी सोच का भी इशारा

एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब हम किसी गहरी सोच में डूबे होते हैं, कोई फैसला लेने की कोशिश कर रहे होते हैं या अपने ही ख्यालों में खोए होते हैं, तब भी हाथ अपने आप जेब में पहुंच जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि उस पल हमारा ध्यान बाहर की दुनिया पर नहीं, बल्कि अपने भीतर चल रही उथल पुथल पर टिका हुआ है।

क्या एक आदत से पूरी पर्सनालिटी तय होती है

बिल्कुल नहीं। मनोविज्ञान कहता है कि कोई एक अकेली आदत आपके पूरे व्यक्तित्व का फैसला नहीं कर सकती। लेकिन अगर आप एक लीडर की तरह नज़र आना चाहते हैं या चाहते हैं कि लोग आप पर तुरंत भरोसा करें, तो हाथों को बाहर रखना और खुले हाव भाव यानी 'ओपन जेस्चर्स' अपनाना ज़्यादा फायदेमंद रहता है।

यही वजह है कि बड़े नेताओं और मंच पर बोलने वाले वक्ताओं को हाथ खुले रखने की खास ट्रेनिंग दी जाती है, क्योंकि इससे वे ज़्यादा भरोसेमंद और मिलनसार दिखाई देते हैं।

सवाल-जवाब

जेब में हाथ डालकर खड़े होने का मनोवैज्ञानिक मतलब क्या है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि असहज या नए माहौल में शरीर खुद को सुरक्षित करने के लिए हाथ जेब में छिपा लेता है, जो एक तरह का मानसिक कवच होता है।
क्या जेब में हाथ डालने का मतलब है कि इंसान डरपोक है?
नहीं, टोरंटो यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक यह अक्सर अंतर्मुखी या अपने काम से काम रखने वाले लोगों की भी आदत होती है, ज़रूरी नहीं कि यह डर का संकेत हो।
डॉ. अल्बर्ट मेहराबियन ने इस बारे में क्या कहा है?
उनकी रिसर्च के अनुसार हम मुंह से जो कहते हैं उससे कहीं ज़्यादा असर इस बात का पड़ता है कि उस समय हमारा शरीर कैसा बर्ताव कर रहा है।
भरोसेमंद और लीडर जैसा दिखने के लिए क्या करना चाहिए?
हाथों को जेब से बाहर रखकर खुले हाव भाव यानी ओपन जेस्चर्स अपनाने चाहिए, इसीलिए बड़े नेताओं और वक्ताओं को हाथ खुले रखने की ट्रेनिंग दी जाती है।
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