भीलवाड़ा में नमी और बारिश के दौरान गुड़ को पिघलने से कैसे बचाएं, जानें सही स्टोरेज तरीकापटना में छात्रों का आंदोलन समाप्त, CM सम्राट चौधरी की घोषणा के बाद अब एकल चरण में होगी TRE-4 भर्ती परीक्षाउदयपुर के पुनावली गांव में बुजुर्ग दंपती की हत्या की गुत्थी सुलझी, कर्ज में डूबे पड़ोसी ने रची थी खौफनाक वारदातश्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तारीख पर स्थिति साफ, 5253वें जन्मोत्सव पर जानें मध्यरात्रि पूजा मुहूर्त और पारण नियममहोबा के श्रीनगर में 40 वर्षों से जलवा बिखेर रहे घासीराम सैनी के हाथ से बनी मूंग दाल मंगोड़ी का अनोखा स्वादप्रोटीन से भरपूर काला चना पनीर पराठा: भीगे चने से बनाएं बाजार जैसी करारी और सेहतमंद रेसिपीवन नाइट ओनली रिव्यू (2026): अनोखे कॉन्सेप्ट के बावजूद फीकी रह गई रॉम-कॉमनेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ से व्यथित हुए अभिनेता अनुपम खेर, पीड़ितों के लिए एकजुट होकर राहत सामग्री पहुँचाने का किया आह्वानसितंबर महीने की शुरुआत में बड़े वित्तीय बदलाव, एलपीजी ई-केवाईसी से लेकर कार के दाम बढ़ने तक ये नियम होंगे लागूनेपाल बाढ़ आपदा में वडोदरा और खुर्दा के प्रवासी भारतीय दंपती लापता, स्वजनों ने सरकार से लगाई गुहार
मानसून में पोल्ट्री फार्म पर मंडराता है घातक बीमारियों का खतरा, गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी ने दिए बचाव के टिप्सजीवनशैली
27 अग॰ 2026, 6:15 pm (2 घंटे पहले)· 2

मानसून में पोल्ट्री फार्म पर मंडराता है घातक बीमारियों का खतरा, गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी ने दिए बचाव के टिप्स

बरसात के मौसम में नमी और गंदगी के कारण मुर्गियों में रानीखेत व कॉक्सीडियोसिस जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने पोल्ट्री किसानों के लिए साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण के महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं।

बरसात का मौसम पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए काफी सतर्क रहने का समय होता है। इस दौरान वातावरण में नमी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है और जगह-जगह गंदगी के कारण पक्षियों में जानलेवा बीमारियों के तेजी से फैलने का अंदेशा बना रहता है। अगर पोल्ट्री फार्म के मालिक समय रहते उचित कदम न उठाएं, तो अंडों व मांस का उत्पादन घटने के साथ-साथ भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने मानसून के दौरान मुर्गियों की सुरक्षा, साफ-सफाई, बिछावन के प्रबंधन, शुद्ध पानी और टीकाकरण को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनका कहना है कि थोड़ी सी भी लापरवाही पूरे पोल्ट्री फार्म को तबाह कर सकती है।

बरसात के दिनों में फैलने वाले प्रमुख रोग और उनके लक्षण

मानसून के महीनों में पोल्ट्री फार्म में कई तरह के संक्रमण एक साथ हमला बोल सकते हैं। डॉ. राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, इस मौसम में मुख्य रूप से कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, सीआरडी यानी क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज, ई-कोलाई और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं।

ये भी पढ़ें

इन बीमारियों की समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, कॉक्सीडियोसिस की चपेट में आने पर मुर्गियों की बीट में खून दिखाई देने लगता है। वहीं रानीखेत रोग होने पर पक्षियों को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है और वे हरे रंग की पतली बीट करने लगते हैं। इसके अलावा, प्रदूषित और गंदा पानी पीने की वजह से मुर्गियों में डायरिया की समस्या काफी बढ़ जाती है।

पोल्ट्री शेड का रख-रखाव और बिछावन का उचित प्रबंधन

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मानसून में पोल्ट्री फार्म की स्वच्छता और शेड के भीतर के माहौल पर नजर रखना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मुर्गियों के नीचे बिछाए जाने वाले लकड़ी के बुरादे या पुआल में किसी भी तरह की नमी नहीं होनी चाहिए। अगर बिछावन गीला हो जाए, तो उसे बिना देर किए तुरंत बदलकर नया और सूखा बिछावन डालना चाहिए।

शेड के अंदर हवा की सही आवाजाही यानी वेंटिलेशन का होना आवश्यक है, ताकि वहां उमस और जहरीली गैसों का जमाव न हो सके। बरसात में दाना और पानी बहुत जल्दी खराब होते हैं। इसलिए मुर्गियों को हमेशा स्वच्छ और ताजा पानी ही उपलब्ध कराना चाहिए, और पानी के बर्तनों की रोजाना अच्छी तरह सफाई की जानी चाहिए। साथ ही, दाने की बोरियों को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए, वरना जमीन की सीलन से उनमें फंगस लग सकती है और दाना खराब हो सकता है।

संक्रमित मुर्गियों को अलग करना और टीकाकरण की आवश्यकता

फार्म में बीमारी के शुरुआती संकेत देखते ही तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। यदि कोई भी मुर्गी सुस्त नजर आए, अपने पंख लटकाकर बैठी रहे या पतली बीट कर रही हो, तो उसे तुरंत बाकी स्वस्थ मुर्गियों से अलग यानी क्वारंटीन कर देना चाहिए। ऐसा करने से संक्रमण को पूरे पोल्ट्री फार्म में फैलने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने सलाह दी है कि किसानों को बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही बचाव के उपाय अपनाने चाहिए। पोल्ट्री फार्म मालिकों को निर्धारित समय-सारणी के अनुसार मुर्गियों का टीकाकरण कराना चाहिए। यदि फार्म में कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दे, तो बिना समय गंवाए नजदीकी पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सही प्रबंधन और सतर्कता अपनाकर मुर्गियों को तंदुरुस्त रखा जा सकता है और आर्थिक तबाही से बचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

बरसात के मौसम में मुर्गियों में कौन-कौन सी मुख्य बीमारियां फैलती हैं?
मानसून में मुर्गियों में मुख्य रूप से कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, सीआरडी (सांस की बीमारी), ई-कोलाई और डायरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं।
कॉक्सीडियोसिस और रानीखेत बीमारी के क्या लक्षण हैं?
कॉक्सीडियोसिस में मुर्गियों की बीट में खून आता है, जबकि रानीखेत बीमारी होने पर मुर्गियों को सांस लेने में दिक्कत होती है और वे हरी पतली बीट करती हैं।
बरसात में पोल्ट्री फार्म के बिछावन और दाने की देखभाल कैसे करें?
बिछावन (बुरादा या पुआल) गीला होते ही तुरंत बदलें। दाने की बोरियों को सीलन और फंगस से बचाने के लिए कभी भी सीधे जमीन पर न रखें।
यदि फार्म में कोई मुर्गी बीमार दिखे तो क्या करना चाहिए?
सुस्त दिखने वाली या पंख लटकाए बैठी मुर्गी को तुरंत बाकी स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर दें और नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह लें।
मानसून में पोल्ट्री फार्म को बीमारियों से बचाने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
समय पर टीकाकरण कराएं, शेड में हवा की सही आवाजाही रखें, और मुर्गियों को हमेशा साफ पानी व ताजा दाना दें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR