उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में नार घाट का कारोबारी इतिहास, कभी पीतल और अनाज के बड़े बंदरगाह के रूप में थी पहचानकर्नाटक में नंदिनी दूध के दाम 10 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी, यूनियनों ने सरकार के सामने रखी मांगदूध, पीली सरसों और मेथी के लेप से चेहरे के अनचाहे बालों और रंगत पर क्या असर पड़ता हैसमुद्र में गहराया दबाव, चार राज्यों पर मूसलाधार आफत का सायाचीन के केंद्रीय बैंक ने डॉलर के मुकाबले युआन की दैनिक संदर्भ दर बढ़ाकर 6.7468 तय कीमिट्टी की हांडी और सोंधी महक, जानिए मिथिला की गाढ़ी मलाईदार दही जमाने का पारंपरिक नुस्खालालबागचा राजा के दरबार में कोमल रानी संग दिखे गोविंदा, कुछ ही देर पहले पत्नी सुनीता आहूजा ने टेका था मत्थाट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बातचीत से पहले वॉल स्ट्रीट पर सतर्कता, टेक शेयरों ने नैस्डैक को संभालाप्रोटीन और फाइबर से भरपूर चना बादाम सलाद से मिटाएं शाम की भूख, जानें झटपट तैयार होने वाली आसान विधिसंयुक्त राष्ट्र में विदेश नीति पर विवादित दावों के बीच घिरे डोनाल्ड ट्रंप, मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन खेमे में बढ़ी तकरार
मिट्टी की हांडी और सोंधी महक, जानिए मिथिला की गाढ़ी मलाईदार दही जमाने का पारंपरिक नुस्खाजीवनशैली
23 सित॰ 2026, 8:19 am (6 मिनट पहले)· 0

मिट्टी की हांडी और सोंधी महक, जानिए मिथिला की गाढ़ी मलाईदार दही जमाने का पारंपरिक नुस्खा

मिथिलांचल में चूड़ा-दही सिर्फ खानपान नहीं बल्कि दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है। यहां मिट्टी के सोंधे बर्तनों और खास घरेलू तरीकों से बिना पानी छोड़े गाढ़ी दही तैयार की जाती है।

भोजन की जब भी बात चलती है, तो हर इलाके की अपनी एक खास पहचान सामने आती है। इसी कड़ी में मिथिलांचल की रसोई का जिक्र होते ही सबसे पहला ख्याल चूड़ा-दही का आता है। मैथिल समाज में दही का स्थान केवल एक व्यंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक जीवन और आतिथ्य सत्कार की बुनियाद है। यहां के लोग सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने और रात के भोजन तक में बड़े चाव से चूड़ा-दही शामिल करते हैं। जब घर में कोई खास पकवान बनाने का समय न हो या कुछ हल्का और तृप्त करने वाला खाना हो, तब भी लोग सुबह और शाम इसी पारंपरिक मेल को प्राथमिकता देते हैं।

मिथिलांचल की थाली में दही का विशेष स्थान

मिथिला के बाशिंदों के लिए दही सबसे प्रिय खाद्य पदार्थों में गिनी जाती है। भोजन के अंत में थोड़ा दही खाना सेहत के लिए भी मुफीद माना गया है क्योंकि यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मददगार होता है। इसके अलावा भारतीय परंपरा में इसे शुभता का प्रतीक भी माना गया है। घरों में अक्सर यह शिकायत रहती है कि दही जमाने पर वह पतली रह जाती है या बहुत ज्यादा पानी छोड़ देती है। मिथिलांचल के गांवों और कस्बों में अपनाई जाने वाली पारंपरिक तकनीक इस समस्या को पूरी तरह हल कर देती है, जिससे दही थक्केदार और बेहद स्वादिष्ट बनती है।

ये भी पढ़ें

मिट्टी के बर्तन की तैयारी और सोंधी महक का राज

दही को एकदम गाढ़ा जमाने के लिए यहां सबसे पहले मिट्टी के बर्तन का चुनाव किया जाता है। बर्तन को इस्तेमाल में लाने से पूर्व पानी से बहुत अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद मिट्टी की हांडी को हल्की आंच पर थोड़ी देर सेका जाता है। आंच पर तपाने की यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से दही के भीतर मिट्टी की एक अनोखी सोंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद समा जाता है।

दूध का सही तापमान और जामन लगाने का तरीका

दही जमाने के अगले चरण में दूध को अच्छी तरह उबाला जाता है। जब दूध पूरी तरह उबल जाए, तब उसे तैयार किए गए मिट्टी के बर्तन में पलट दिया जाता है। इसके बाद दूध के तापमान की नियमित निगरानी की जाती है। दूध को बार-बार उंगली डुबोकर परखा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह जरूरत से ज्यादा गर्म न हो। जब दूध सिर्फ गुनगुना रह जाए और उसमें उंगली डालने पर तेज गर्मी का अहसास न हो, ठीक उसी समय जामन डाला जाता है। लगभग आधा चम्मच ताजी दही का जामन इस गुनगुने दूध में अच्छी तरह मिलाया जाता है।

तापमान संतुलन के लिए अनाज के डिब्बों का उपयोग

जामन मिलाने के बाद उस मिट्टी के बर्तन को किसी स्थिर और गर्म स्थान पर रखना जरूरी होता है। मिथिलांचल में महिलाएं इस बर्तन को गेहूं के आटे वाले बड़े पीपे या चावल के भंडारण वाले पात्र के अंदर दबाकर रख देती हैं। अनाज के भीतर प्राकृतिक रूप से गर्माहट बनी रहती है, जिससे दूध का तापमान गिरता नहीं है और किण्वन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। इस तरीके से दही बिना हिले-डुले बेहद शानदार और गाढ़ी जम जाती है।

हरी मिर्च और चीनी के वैकल्पिक नुस्खे

परंपरागत जामन के अलावा यहां के कई घरों में दही जमाने के लिए एक और अनोखी तरकीब अपनाई जाती है। कुछ लोग हल्के गुनगुने दूध में डंठल वाली साबुत हरी मिर्च डाल देते हैं। इसके साथ ही कुछ लोग इसमें चुटकी भर चीनी भी मिलाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हरी मिर्च और चीनी दूध को तेजी से थक्केदार बनाने और जमने में सहायता करते हैं। अगली सुबह जब बर्तन खोला जाता है, तो मिट्टी की भीनी खुशबू से महकती हुई गाढ़ी दही मिलती है। इस विधि से तैयार दही में पानी बिल्कुल अलग नहीं होता और इसका स्वाद साधारण बर्तनों में जमी दही से कहीं ज्यादा समृद्ध होता है।

सवाल-जवाब

मिथिलांचल में दही जमाने के लिए किस तरह के बर्तन का उपयोग होता है?
वहां मुख्य रूप से मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता है, जिन्हें उपयोग से पहले अच्छी तरह धोकर आग पर हल्का सेक लिया जाता है।
मिट्टी के बर्तन को आग पर क्यों सेका जाता है?
आग पर थोड़ी देर सेकने से बर्तन में सोंधापन आ जाता है, जिससे बनने वाली दही में मिट्टी की लाजवाब खुशबू समा जाती है।
दूध में जामन किस समय और कितना मिलाना चाहिए?
दूध को उबलने के बाद जब वह उंगली सहने लायक गुनगुना रह जाए, तब उसमें लगभग आधा चम्मच दही का जामन मिलाया जाता है।
दही के बर्तन को आटे या चावल के डिब्बे में क्यों रखा जाता है?
अनाज के डिब्बों में प्राकृतिक रूप से तापमान स्थिर और गर्म रहता है, जिससे दही बिना पानी छोड़े अच्छी तरह जम जाती है।
क्या जामन के बिना भी दही जमाई जा सकती है?
हां, हल्के गर्म दूध में साबुत हरी मिर्च और थोड़ी सी चीनी डालकर भी दही को आसानी से जमाया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp