बरसात के मौसम में घरों के भीतर नमी और सीलन बढ़ना एक बेहद आम समस्या है, जिसकी वजह से दीवारों का खूबसूरत पेंट पपड़ी बनकर झड़ने लगता है। दीवारों पर पानी का रिसाव न केवल घर के इंटीरियर की सुंदरता को बिगाड़ता है, बल्कि कमरे के वातावरण में नमी और दुर्गंध पैदा कर फंगस के पनपने का कारण भी बनता है। जब दीवारों की सतह कमजोर होने लगती है, तो सिर्फ नया पेंट करा देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। सीलन से पूरी तरह छुटकारा पाने और दीवारों को मजबूत बनाए रखने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया और सही हैक्स को अपनाना जरूरी होता है। कुछ प्रभावी उपायों की मदद से दीवारों को नमी से सुरक्षित और पेंट को लंबे समय तक नया बनाए रखा जा सकता है।
1. रिसाव और सीलन के मुख्य स्रोत की पहचान करें
दीवार पर किसी भी प्रकार का उपचार या रासायनिक परत लगाने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि पानी का प्रवेश कहां से हो रहा है। छत में दरार, बाहरी दीवार से पानी का रिसाव, पाइपलाइन में लीकेज या बाथरूम की सीलन इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। जब तक नमी के मूल कारण को ठीक नहीं किया जाता, तब तक ऊपर से किया गया कोई भी मरम्मत कार्य ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। इसलिए सबसे पहले लीक हो रहे पाइपों और दीवारों की दरारों की मरम्मत करवाएं ताकि अंदर पानी का आना पूरी तरह बंद हो सके।
2. खराब पेंट की अच्छे से स्क्रैपिंग और सुखाने की प्रक्रिया
झड़ते हुए और खराब हो चुके पेंट के ऊपर सीधे नया रंग या पुट्टी लगाने की भूल कभी न करें। एक मजबूत स्क्रेपर या रेगमाल (सैंडपेपर) की मदद से पपड़ीदार पेंट, ढीली मिट्टी और सीलन से प्रभावित प्लास्टर को रगड़कर पूरी तरह साफ कर लें। जब दीवार की सतह पूरी तरह साफ हो जाए, तो उसे प्राकृतिक हवा में सूखने के लिए 24 से 48 घंटे का पर्याप्त समय दें। दीवार के अंदरूनी हिस्सों में फंसी नमी का पूरी तरह वाष्पीकृत होना बेहद आवश्यक है ताकि नया पेंट मजबूत पकड़ बना सके।
3. सफेद सिरके और बेकिंग सोडे से फंगस का उपचार
सीलन वाली जगह पर अक्सर काली या सफेद फफूंद (फंगस) जम जाती है, जो दीवारों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ बदबू भी फैलाती है। इसे खत्म करने के लिए एक स्प्रे बोतल में सफेद सिरका भरें और फंगस से प्रभावित हिस्से पर अच्छी तरह छिड़कें। सिरके को अपना असर दिखाने के लिए लगभग आधे घंटे तक ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद बेकिंग सोडा और पानी को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और उसे प्रभावित स्थान पर लगाकर ब्रश से रगड़कर साफ कर दें। यह उपाय फंगस के बीजाणुओं को नष्ट करने के साथ सीलन की दुर्गंध को भी दूर करता है।
4. वाटरप्रूफिंग सीलेंट और वॉटरप्रूफ पुट्टी का प्रयोग
जब दीवार पूरी तरह साफ और सूखी हो जाए, तो बाजार में उपलब्ध वाटरप्रूफिंग सीलेंट या डैम-प्रूफ केमिकल की एक सुरक्षात्मक परत पूरी दीवार पर लगाएं। यह केमिकल दीवार के भीतर मौजूद नमी को बाहर आने से रोकता है और एक अवरोधक के रूप में कार्य करता है। सीलेंट के सूखने के बाद वॉटरप्रूफ पुट्टी की मदद से दीवार की दरारों और असमान सतह को भरकर समतल करें। यह प्रक्रिया पेंट के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है और उसकी ग्रिप को कई गुना बढ़ा देती है।
5. कमरे में वेंटिलेशन और नमी नियंत्रण में सुधार
जिन कमरों में हवा का आवागमन और धूप पर्याप्त मात्रा में नहीं होती, वहां सीलन की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। कमरों में बंद नमी को बाहर निकालने के लिए रोज कुछ समय के लिए खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें। यदि किसी कमरे में धूप नहीं आती है, तो वहां डिह्यूमिडिफायर का उपयोग करके हवा की अतिरिक्त नमी को कम किया जा सकता है। इसके अलावा पंखा चलाकर रखने से भी कमरे के भीतर हवा का संचरण बेहतर होता है, जिससे नमी का स्तर घटता है और दीवारें सूखी रहती हैं।



















