उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में महिलाओं की एक छोटी सी पहल ने उन्हें आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा की मजबूत राह दिखाई है। महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 10 महिलाओं ने मिलकर शुद्ध और मिलावट मुक्त मसालों का सामूहिक व्यवसाय खड़ा किया है। यह समूह हल्दी, मिर्च और अन्य दैनिक उपयोग के मसालों की सफाई से लेकर सुखाने, कूटने, पीसने और पैकेजिंग तक का पूरा काम अपने हाथों से संभाल रहा है। अपने पारंपरिक तौर-तरीकों और बेमिसाल स्वाद के दम पर इन महिलाओं के बनाए मसालों की मांग अब न केवल मुरादाबाद के स्थानीय बाजारों में है, बल्कि दिल्ली और पुणे जैसे बड़े शहरों के ग्राहक भी इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं।
स्वयं सहायता समूह से जागी स्वरोजगार की उम्मीद
महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ज्योति के अनुसार, उनके आस-पास ऐसी कई महिलाएं थीं जो अपने पैरों पर खड़ा होकर काम करना चाहती थीं। जब इन महिलाओं को सही दिशा और प्रोत्साहन मिला, तो वे चारदीवारी से बाहर निकलकर आगे आईं और इस स्वयं सहायता समूह का गठन किया। वर्तमान में 10 महिलाएं पूरी एकजुटता के साथ इस मसाला कारोबार को संचालित कर रही हैं। किसी भी मसाले को तैयार करने से पहले साबुत कच्चे माल को बेहद बारीकी से छांटा और साफ किया जाता है। इसके बाद उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है और फिर हल्की आंच पर भूनकर तैयार किया जाता है, जिससे मसालों की स्वाभाविक सुगंध और नमी का संतुलन बना रहे।
इमामदस्ते की कुटाई और पत्थर की चक्की पर धीमी पिसाई
इस समूह के मसालों की सबसे बड़ी खूबी उनकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया है। औद्योगिक स्तर पर चलने वाली तेज गति वाली मशीनों के बजाय यह समूह पत्थर की चक्की का इस्तेमाल करता है। हल्दी जैसे कड़े और सख्त मसालों को सीधे चक्की में नहीं डाला जाता, बल्कि पहले उन्हें पारंपरिक इमामदस्ते में अच्छी तरह कूटा जाता है। इसके बाद उन्हें पत्थर की चक्की पर धीमी गति से पीसा जाता है। समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि आधुनिक हाई-स्पीड ग्राइंडर की गर्मी मसालों के प्राकृतिक तेल और स्वाद को नुकसान पहुंचाती है, जबकि धीमी गति वाली पत्थर की चक्की से पिसाई करने पर मसालों का मूल स्वाद, रंग और गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
खेतों से सीधी आवक और सख्त गुणवत्ता जांच
मसालों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कच्चा माल जुटाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। समूह साबुत मसालों की खरीदारी मुरादाबाद की मुख्य मंडी से करता है। वहां एक ऐसी दुकान से संपर्क साधा गया है जो सीधे किसानों के खेतों से कच्चा मसाला मंगवाती है। महिलाएं खुद मंडी जाकर मसालों के दाने, रंग और खुशबू की जांच करती हैं। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही माल खरीदा जाता है और समूह के कार्य केंद्र पर लाया जाता है। महिलाओं का दावा है कि उनके उत्पादों में किसी भी प्रकार का कृत्रिम रंग या मिलावट नहीं होती। ज्योति का कहना है कि उनकी तैयार हल्दी की शुद्धता इतनी अधिक है कि सामान्य भोजन में बहुत कम मात्रा डालने पर भी गहरा रंग और बेहतरीन स्वाद मिल जाता है।
हर माह एक लाख का कारोबार और 10 हजार से अधिक का मुनाफा
यद्यपि यह मसाला उद्यम अभी नया है, लेकिन बहुत कम समय में इसने उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता दर्ज की है। समूह की सामूहिक मासिक बिक्री लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच गई है। सभी खर्च निकालने के बाद समूह में शामिल प्रत्येक महिला हर महीने 10 हजार रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही है। सफाई, पिसाई और पैकेट तैयार करने का काम घर के पास ही होने से इन महिलाओं को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सुरक्षित वातावरण में सम्मानजनक आजीविका मिल रही है। महिलाओं का मानना है कि अकेले दम पर इस तरह का व्यवसाय खड़ा करना बेहद कठिन था, लेकिन स्वयं सहायता समूह के मंच ने उन्हें एकजुट कर एक सफल उद्यमी बना दिया है।



















