राजस्थान के जोधपुर में इन दिनों लोकदेवता बाबा रामदेव के मेले का माहौल पूरी तरह आस्था और अनोखी परंपराओं से सराबोर नजर आ रहा है। देश के कोने-कोने से आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार तरह-तरह की ध्वजाएं, प्रसाद और घोड़े लेकर पहुंच रहे हैं। इस सब के बीच एक ऐसा खास घोड़ा पहुंचा है जिसने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस घोड़े का शारीरिक रूप सामान्य घोड़ों से काफी अलग और अनूठा है। इसकी पीठ पर बड़े-बड़े नीले पंख जोड़े गए हैं, जो इसे किसी पौराणिक कथाओं के पात्र या यूनिकॉर्न जैसा रूप दे रहे हैं। पहली नजर में देखने पर यह किसी काल्पनिक जीव की तरह प्रतीत होता है और राह चलते लोग इसे देखते ही रह जाते हैं।
मेले के प्रांगण में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह पंखों वाला घोड़ा चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। इस घोड़े की सजावट बेहद भव्य और खास तरीके से की गई है। इसके शरीर पर की गई नक्काशी और सजावट के बीच इसके दोनों तरफ लगे नीले रंग के विशाल पंख सबसे ज्यादा कौतूहल पैदा कर रहे हैं। मेले में घूमने वाले लोग इस राजसी और अद्भुत रूप को देखकर कुछ पलों के लिए थम जाते हैं। बहुत से लोग अपने मोबाइल फोन के कैमरे में इस नजारे को कैद करते और तस्वीरें व वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं। आसपास से गुजरने वाले राहगीर भी इस अनोखे घोड़े को देखने के लिए रुक रहे हैं। पारंपरिक मेलों में अलग-अलग कलाकृतियों वाले घोड़े आना आम बात है, लेकिन इस बार नीले पंखों से सुसज्जित इस घोड़े ने अपनी एक बिल्कुल अलग और अनूठी पहचान बना ली है।
मन्नत पूरी होने के बाद घोड़ा चढ़ाने की परंपरा
बाबा रामदेव के पवित्र दरबार में मन्नत पूरी होने के बाद घोड़ा अर्पित करने की परंपरा बहुत पुरानी और गहरी है। श्रद्धालु अपनी आस्था, श्रद्धा और सामर्थ्य के मुताबिक अलग-अलग रूपों, रंगों और आकारों में घोड़े तैयार करवाते हैं और उन्हें बाबा के चरणों में भेंट करते हैं। इसी प्राचीन परंपरा को जीवंत रखते हुए एक युवा इस विशेष और भव्य घोड़े को लेकर जोधपुर की धरती पर पहुंचा है। इस घोड़े के बारे में बताया जा रहा है कि इसका आकार भी आम घोड़ों से काफी अलग है। इसकी लंबाई 10 इंच से अधिक बताई गई है और इसका वजन भी सामान्य घोड़ों की तुलना में काफी ज्यादा भारी है। इस अनोखे घोड़े की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उस युवा ने इसे जमीन पर चलाने के बजाय अपने हाथों में उठाया और बाबा के दरबार तक लेकर पहुंचा। हाथों में नीले पंखों वाला इतना भारी घोड़ा उठाकर चलते हुए उस युवक को देखकर आसपास खड़े सभी लोग अचंभित रह गए।
जोधपुर में पूजा-अर्चना के बाद रामदेवरा की ओर रवाना
जोधपुर स्थित मुख्य बाबा रामदेव मंदिर में दर्शन करने और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद यह अद्भुत घोड़ा अब आगे की यात्रा पर निकल चुका है। यह जत्था और यह अनोखा घोड़ा अब रामदेवरा धाम की ओर रवाना हो गया है। रास्ते में भी जहां-जहां से यह घोड़ा गुजर रहा है, वहां सड़क पर चल रहे लोगों की निगाहें इसी पर टिक जा रही हैं। इसकी पीठ पर सजे नीले पंख, बेहद आकर्षक सजावट और इसका असामान्य आकार इसे देखने वालों के लिए एक अजूबा बना रहा है। इस यात्रा के दौरान यह घोड़ा केवल एक भेंट नहीं बल्कि लोगों के लिए आस्था और कौतूहल का एक जीवंत दृश्य बन चुका है, जिसे देखने वाले लंबे समय तक याद रखेंगे।
आस्था के बीच आकर्षण का नया केंद्र
बाबा रामदेव के मेले में हर साल लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, जहां आस्था के विभिन्न रंग देखने को मिलते हैं। कोई अपनी अर्जी लेकर ध्वजा थामे पहुंचता है तो कोई मन्नत उतरने के बाद विशेष भेंट चढ़ाता है। इस बार इस नीले पंखों वाले घोड़े ने इस पूरी परंपरा में एक नया रंग और अध्याय जोड़ दिया है। अपने इस निराले स्वरूप के कारण यह हर आने जाने वाले के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया है। भले ही आम दर्शकों के लिए यह एक कौतूहल और चर्चा का विषय हो, लेकिन इससे जुड़े लोगों के लिए इसकी भावना पूरी तरह बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा और मन्नत से जुड़ी है। श्रद्धालु इसे महज़ एक सजावटी कलाकृति नहीं मान रहे, बल्कि इसे बाबा के प्रति समर्पित एक विशेष भेंट मान रहे हैं। यही मुख्य वजह है कि मेले में कदम रखने वाले हर व्यक्ति की आंखें इस पंखों वाले घोड़े को देखकर ठहर जा रही हैं।


















