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40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति का बंटवारा अंतिम समय में अटका, प्रतिमा देवी ने किया दावामध्य प्रदेश
23 जुल॰ 2026, 1:08 am (45 दिन पहले)· 2

40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति का बंटवारा अंतिम समय में अटका, प्रतिमा देवी ने किया दावा

सिंधिया राज परिवार के बीच 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे का समझौता लगभग तय हो चुका था, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की चचेरी बुआ प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद जिला अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई 28 जुलाई तक टाल दी है।

सिंधिया राजघराने के भीतर 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद अंतिम फैसले के बिल्कुल करीब पहुंच गया था, लेकिन एक अप्रत्याशित कानूनी दावे ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। परिवार की एक अहम सदस्य प्रतिमा देवी ने जिला अदालत में दस्तक देकर अपने वाजिब हिस्से की मांग की है, जिससे बंटवारे के अंतिम समझौते पर फिलहाल फैसला टल गया है।

समझौते के करीब पहुंचकर अटका मामला

लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद, सिंधिया परिवार के दोनों खेमों ने आपसी सहमति से एक समाधान निकाल लिया था। दोनों पक्षों के मध्यस्थों के बीच कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद बंटवारे का एक ठोस फॉर्मूला तैयार किया गया था। इस बहुप्रतीक्षित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए, दोनों पक्षों ने जिला अदालत में तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिए थे। अदालत में 20 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई हुई और ऐसा लगने लगा था कि अब यह संपत्ति विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

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हालांकि, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी के अदालत पहुंचने से मामला फिर से उलझ गया। उन्होंने अदालत में एक औपचारिक आवेदन दाखिल करते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई कि इस प्रस्तावित समझौते में उन्हें उनका जायज हक नहीं दिया जा रहा है। प्रतिमा देवी ने अदालत से स्पष्ट मांग की है कि जब तक उनकी आपत्तियों पर पूरी तरह से सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक संपत्ति बंटवारे के समझौते पर कोई भी अंतिम फैसला न सुनाया जाए। अदालत ने उनके इस दावे को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय कर दी है।

देशभर में फैली बेशकीमती संपत्तियां

इस भीषण पारिवारिक कानूनी जंग के केंद्र में सिंधिया परिवार का वह विशाल साम्राज्य है, जिसकी कुल कीमत लगभग 40 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। यह अपार संपत्ति केवल उनके पारंपरिक गढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई प्रमुख शहरों में फैली हुई है।

ग्वालियर में जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति और हिरण्यवन कोठी जैसी भव्य संपत्तियां इस विवाद का हिस्सा हैं। मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, इंदौर का हैप्पी विलास और उज्जैन का ऐतिहासिक कालियादेह पैलेस शामिल हैं। राज्य की सीमाओं से बाहर, पुणे में प्रभात विलास पैलेस, दिल्ली में सिंधिया विला और ग्वालियर हाउस, मुंबई में प्रतिष्ठित समुंदर महल और वाराणसी का ऐतिहासिक सिंधिया घाट भी इसी राजशाही संपत्ति का हिस्सा हैं।

इन तमाम अचल संपत्तियों के अलावा, इस पूरे समझौते में सबसे अनमोल और दुर्लभ विरासत पन्ना रत्न से बना एक विशेष शिवलिंग है। इसे सिंधिया राजवंश की अगाध धार्मिक आस्था और शाही पहचान का सबसे बड़ा और पवित्र प्रतीक माना जाता है। इस विशाल दायरे में कई बड़े ट्रस्ट, भारी मात्रा में शेयर निवेश और अन्य बेशकीमती संपत्तियां भी शामिल हैं।

1988 से शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई

इस ऐतिहासिक संपत्ति विवाद की जड़ें साल 1988 में मौजूद हैं। उस समय माधवराव सिंधिया की बहनों, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे के बीच संपत्ति को लेकर आपसी मतभेद शुरू हो गए थे। यह अनबन इतनी गहरी हो गई कि तीनों बहनों ने अपने हिस्से की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया और कानूनी जंग की शुरुआत हो गई।

शुरुआती दौर में, माधवराव सिंधिया ने खुद इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया और मुकदमों का सामना किया। साल 2001 में उनके निधन के बाद, इस विवाद की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी पर आ गई। तब ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बहन चित्रांगदा राजे को इन लंबित मुकदमों में आधिकारिक रूप से पक्षकार बनाया गया।

समय के साथ यह विवाद और जटिल होता गया और संपत्ति से जुड़े करीब दर्जन भर मामले विभिन्न अदालतों में दर्ज हो गए। साल 2017 तक आते-आते, संपत्ति विवाद के ये सभी मामले हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गए। इस लंबी और थका देने वाली लड़ाई के बाद ही दोनों पक्षों ने मध्यस्थों की मदद ली थी और एक समझौते का फॉर्मूला तैयार किया था, जो अब प्रतिमा देवी के दावे के कारण एक बार फिर नई चुनौती का सामना कर रहा है।

सवाल-जवाब

सिंधिया परिवार की संपत्ति का विवाद कितने करोड़ का है?
इस राजशाही संपत्ति का कुल मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपये आंका गया है।
संपत्ति बंटवारे के समझौते पर किसने आपत्ति दर्ज कराई है?
ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई है।
इस मामले में जिला अदालत की अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने प्रतिमा देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।
संपत्ति विवाद की शुरुआत कब हुई थी?
यह कानूनी विवाद साल 1988 में माधवराव सिंधिया की बहनों के बीच मतभेद के बाद शुरू हुआ था।
सिंधिया परिवार की इस संपत्ति में सबसे अनमोल विरासत क्या है?
इस पूरी संपत्ति में सबसे अनमोल विरासत पन्ना रत्न से निर्मित एक दुर्लभ शिवलिंग है, जो राजवंश की अगाध आस्था का प्रतीक है।
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