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73 दिन से शराब दुकान के सामने जमीं बालाघाट की महिलाएं, खरीदारों को गुलाब और माला देकर लौटा रहींमध्य प्रदेश
2 घंटे पहले· 0

73 दिन से शराब दुकान के सामने जमीं बालाघाट की महिलाएं, खरीदारों को गुलाब और माला देकर लौटा रहीं

मध्य प्रदेश के बालाघाट के बूढ़ी इलाके में महिलाएं 73 दिन से एक शराब दुकान के बाहर धरने पर बैठी हैं। शुरुआती उग्र विरोध अब गांधीवादी तरीके में बदल गया है, जहां खरीदारों को गुलाब और माला देकर शर्मिंदा किया जा रहा है।

Rajesh KumarRajesh KumarSenior Correspondent 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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मध्य प्रदेश के बालाघाट में महिलाओं का एक ऐसा आंदोलन चल रहा है, जो देश में शराब दुकानों के खिलाफ दिखने वाले बाकी विरोधों से बिल्कुल अलग है। यहां न दुकान में तोड़फोड़ हुई, न किसी अफसर पर दबाव की राजनीति चली। बूढ़ी इलाके की महिलाएं बीते 73 दिन से सिर्फ शराब की दुकान के सामने बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जता रही हैं। खास बात यह है कि वे शराब खरीदने आने वालों को गुलाब का फूल और माला पहनाकर लौटा देती हैं, और इसी शर्मिंदगी के डर से कई ग्राहकों ने आना ही बंद कर दिया।

आंदोलन की शुरुआत में नेता भी पहुंचे, तीखे भाषण दिए और लोगों को भरोसा दिलाया कि जल्द दुकान हटेगी। मगर वक्त बीतने के साथ जनप्रतिनिधि महिलाओं और उनके संघर्ष दोनों को भूल गए। इसके बावजूद महिलाएं पीछे नहीं हटीं और आज भी दुकान हटवाने की मांग पर डटी हुई हैं।

45 साल पुरानी दुकान, बदलते इलाके के साथ बढ़ी मुसीबत

बूढ़ी इलाके में यह शराब दुकान करीब 45 साल से चल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शुरुआत में इससे कोई खास परेशानी नहीं थी। लेकिन समय के साथ आसपास मकान बनते गए और आबादी बढ़ती गई। दुकान के चारों ओर घर बस गए और यहां ग्राहकों की भीड़ भी बढ़ने लगी। साल 2022 से पहले इस दुकान में अहाता यानी मौके पर ही शराब पीने की व्यवस्था हुआ करती थी, जिससे माहौल और बिगड़ता चला गया। नशे में धुत लोग दुकान से निकलकर शोर मचाते, हल्ला करते और गाली-गलौज करते थे। खुले में पेशाब करना और आपस में मारपीट करना आम बात हो चुकी थी।

नियमों को ताक पर रखकर पिलाई जाती रही शराब

आरोप है कि बूढ़ी की इस दुकान में नियमों के खिलाफ लोगों को बिठाकर शराब पिलाई जाती थी। साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अहाते पर रोक लगा दी थी, फिर भी यहां शराब के साथ-साथ पानी के पाउच, पानी की बोतल और नमकीन तक बिकती रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि खरीदारों को वहीं बैठाकर शराब पिलाई जाती थी। नतीजा यह कि नशे में धुत लोग पूरे मोहल्ले में हंगामा करते, अभद्रता करते और गंदी भाषा का इस्तेमाल करते। सुशासन का दावा करने वाला प्रशासन भी खुले में शराब पिलाने और पीने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका।

घरों में कैद हो गई थीं महिलाएं

खुले में शराब पीने-पिलाने की इस गतिविधि ने मोहल्ले का माहौल बुरी तरह बिगाड़ दिया था। शराबियों की भीड़ के बीच महिलाएं अपने ही घरों में कैद होकर रह गई थीं। दिन हो या रात, वे सड़क पर निकल नहीं पाती थीं। स्कूल जाने वाले बच्चे हों या कोई भी शरीफ इंसान, दुकान के सामने से गुजरना मुश्किल था। घरों में बंद रहकर महिलाएं घुटन महसूस करती थीं, जबकि स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर नौकरी और कारोबार करने वालों तक, हर किसी को दिक्कत झेलनी पड़ रही थी।

13 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ संघर्ष

आखिरकार परेशान महिलाओं ने 13 अप्रैल 2026 को अचानक मोर्चा खोल दिया। उन्होंने ठान लिया कि जब तक दुकान नहीं हटेगी, तब तक धरना जारी रहेगा। शुरुआत में शराब ठेकेदार के लोगों ने गलत तरीकों से आंदोलन को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं के हौसले के आगे उन्हें झुकना पड़ा। पहले महिलाएं शराबियों से उलझकर उन्हें भगाती थीं, फिर उन्होंने तरीका बदल दिया। अब शराब खरीदने आने वालों का गुलाब देकर और माला पहनाकर स्वागत किया जाने लगा। इस शर्मिंदगी से बचने के लिए कई लोगों ने दुकान का रुख करना ही छोड़ दिया। कभी महिलाओं ने शराब दुकान की प्रतीकात्मक अर्थी तक निकाली। यह पूरा आंदोलन अब जन-सहयोग के सहारे चल रहा है।

दुकान भले न हटी, पर मिली सुकून की आजादी

महिलाओं का कहना है कि आंदोलन को 73 दिन हो गए हैं, मगर अब तक कामयाबी हाथ नहीं लगी। जो जनप्रतिनिधि शुरुआत में आते थे, उन्होंने भी अब मुंह मोड़ लिया है। उनका कहना है कि दुकान भले न हटी हो, लेकिन इस संघर्ष ने उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला दिया है। महिलाओं ने कहा कि वे जिंदगी में पहली बार इस तरह अपने घरों के सामने चैन से बैठ पा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन भरी गर्मी में चला है तो बारिश में भी चलेगा, और जब तक दुकान नहीं हटेगी, धरना जारी रहेगा। उनके लिए यह सिर्फ सुकून नहीं, बल्कि हुड़दंग से मिली आजादी है। उधर, नगरपालिका अध्यक्ष का कहना है कि यह मामला प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के सामने भी रखा गया है और जल्द ही इसका सकारात्मक नतीजा आने की उम्मीद है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: रिहायशी इलाकों में बसी शराब दुकानों को लेकर यह आंदोलन बताता है कि शांतिपूर्ण और लगातार विरोध से आम लोग, खासकर महिलाएं, अपने मोहल्ले का माहौल बदल सकती हैं।
  • बालाघाट में: बूढ़ी इलाके के लोगों के लिए सीधा असर यह है कि शराबियों की भीड़ और हंगामे से राहत मिली है, हालांकि दुकान अब भी हटी नहीं है और मामला प्रभारी मंत्री तक पहुंच चुका है।

सवाल-जवाब

बालाघाट में महिलाएं किस बात का विरोध कर रही हैं?
वे बूढ़ी इलाके में करीब 45 साल से चल रही एक शराब की दुकान को हटवाने की मांग कर रही हैं, जिससे मोहल्ले का माहौल खराब हो रहा था।
यह आंदोलन कब शुरू हुआ और कितने दिन हो चुके हैं?
आंदोलन 13 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था और अब इसे 73 दिन हो चुके हैं।
महिलाओं का विरोध का तरीका क्या है?
वे शराब दुकान के सामने शांति से बैठती हैं और खरीदने आने वालों को गुलाब देकर और माला पहनाकर शर्मिंदा कर लौटा देती हैं। कभी उन्होंने दुकान की प्रतीकात्मक अर्थी भी निकाली।
इलाके में दिक्कत क्यों बढ़ी थी?
समय के साथ दुकान के आसपास आबादी बढ़ी और 2022 से पहले यहां अहाता था। नशे में लोग हंगामा, गाली-गलौज और खुले में पेशाब जैसी हरकतें करते थे।
क्या आंदोलन से शराब दुकान हट गई है?
नहीं, अब तक दुकान नहीं हटी है, लेकिन महिलाओं का कहना है कि उन्हें शराबियों के हुड़दंग से राहत और सुकून जरूर मिला है।
इस मामले में प्रशासन का क्या कहना है?
नगरपालिका अध्यक्ष के मुताबिक यह मामला प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के सामने भी रखा गया है और जल्द सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है।
2022 में क्या बदलाव हुआ था?
साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अहाते पर रोक लगा दी थी, फिर भी आरोप है कि दुकान में लोगों को बिठाकर शराब पिलाई जाती रही।
#मध्य प्रदेश#बालाघाटशराबदुकान#महिलाधरनाप्रदर्शन#गांधीवादीआंदोलन#मध्यप्रदेश#बूढ़ीइलाका#शराबविरोध#रावउदयप्रतापसिंह

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