बालाघाट पुलिस को राज्य भर में चल रही कानून प्रवर्तन की कार्रवाई में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। बहुचर्चित 'डबल मनी' कांड का मास्टरमाइंड, जिस पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश ठगी का गंभीर आरोप है, आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। इस बड़े नेटवर्क के मुख्य आरोपी सोमेंद्र कांकरायने को उत्तराखंड के धार्मिक शहर हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया है, जहां वह एक साधु का चोला ओढ़कर प्रशासन से अपनी पहचान पूरी तरह से छिपाए हुए था। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के दौरान विशेष पुलिस टीम ने सोमेंद्र के अलावा गिरोह के सात अन्य प्रमुख सदस्यों को भी हिरासत में लिया है, जिससे इस बड़े निवेश घोटाले के पीड़ितों में न्याय की एक मजबूत उम्मीद जागी है।
जमानत के बाद फरार और साधु का सटीक भेष
इस बड़े पैमाने के वित्तीय घोटाले में सोमेंद्र को पहले भी पुलिस ने सफलतापूर्वक पकड़ा था, लेकिन वह कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट से जमानत पाने में सफल रहा और बाहर आते ही वह तुरंत भूमिगत हो गया। दोबारा गिरफ्तारी के डर से उसने अपनी शारीरिक पहचान और रहन-सहन को पूरी तरह से बदल लिया था। वह भागकर सीधे हरिद्वार पहुंच गया और वहां एक तपस्वी साधु का भेष धारण कर लिया। तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और प्राचीन धार्मिक स्थलों के बीच वह एक आम साधु की तरह बड़े आराम से रहने लगा। उसके इस सटीक रूप ने पुलिस के लिए उसे ढूंढना काफी मुश्किल कर दिया था, और वह बहुत लंबे समय तक जांच एजेंसियों को चकमा देता रहा।
टेलीग्राम ऐप और जमीन की रजिस्ट्री का बिछाया गया जाल
आरोपी की भारी चालाकी और भेष बदलने के बावजूद पुलिस की एक विशेष टीम लगातार और बिना थके उसकी तलाश में जुटी थी। उसे उसके सुरक्षित ठिकाने से बाहर निकालने के लिए एक बेहद सटीक और तकनीकी रणनीति अपनाई गई। पुलिस ने जांच के दौरान पहले ही सोमेंद्र की करोड़ों रुपये की सभी ज्ञात संपत्तियों को सीज कर दिया था और उसकी जमीनों की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह से सरकारी रोक लगा दी थी। उसे बाहर निकालने के लिए जांच टीम ने एक जाल बिछाते हुए जानबूझकर एक जमीन की रजिस्ट्री की आधिकारिक अनुमति दे दी। जैसे ही यह पाबंदी हटी, आरोपी और उसके साथियों ने इस लाभदायक सौदे को पूरा करने के लिए तुरंत टेलीग्राम ऐप के जरिए अपनी बातचीत और पैसों का लेन-देन शुरू कर दिया। इसी तकनीकी सुराग और सटीक लोकेशन ट्रैकिंग की मदद से बालाघाट पुलिस की टीम सीधा हरिद्वार तक पहुंच गई और वहां अचानक दबिश देकर कुल आठ लोगों को मौके पर ही दबोच लिया।
ऐसे काम करता था 500 करोड़ का विशाल गिरोह
यह पूरा संगठित घोटाला आम लोगों को रातों-रात बहुत अमीर बनने का झूठा सपना दिखाकर शुरू किया गया था। गिरोह के शातिर सदस्य स्थानीय लोगों को बहुत कम समय में उनका पैसा दोगुना करने का भारी लालच देते थे। लोगों का पूरा भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में कुछ निवेशकों को उनके निवेश की पूरी मैच्योरिटी रकम बिल्कुल समय पर लौटा दी गई। इसका असर यह हुआ कि लालच में आकर हजारों लोगों ने अपने जीवन भर की करोड़ों रुपये की गाढ़ी कमाई इस नेटवर्क में डाल दी। जब एक बहुत बड़ी रकम उनके पास जमा हो गई, तो गिरोह ने अचानक अपना पूरा काम बंद कर दिया और फरार हो गए। इस मामले में अब तक अकेले बालाघाट जिले के अलग-अलग थानों में 63 से ज्यादा एफआईआर आधिकारिक रूप से दर्ज हो चुकी हैं और शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि ठगी का यह जाल मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक व्यापक रूप से फैला हुआ था।
रिमांड पर होगी सख्त पूछताछ और आगे की विस्तृत जांच
हरिद्वार से इस अहम गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस सभी आठों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच बालाघाट वापस ला रही है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके। जिले के एसपी आदित्य मिश्रा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस इन सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी और इनसे अत्यंत सख्ती से पूछताछ करेगी। अब पुलिस का मुख्य फोकस आरोपियों के गुप्त बैंक खातों की डिटेल, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और अन्य छिपे हुए वित्तीय लेन-देन खंगालने पर टिका है। एसपी मिश्रा ने पूरी उम्मीद जताई है कि रिमांड अवधि के दौरान होने वाली पूछताछ में कई और बड़े एवं चौंकाने वाले खुलासे होंगे, जिससे इस 500 करोड़ के अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की भी जल्द से जल्द गिरफ्तारियां सुनिश्चित हो सकेंगी।




















