बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने हालिया बयानों के चलते एक नए राजनीतिक और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए कहा था कि उन्हें स्वयं के दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। इस वीडियो में उन्होंने शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और चेतावनी भरे लहजे में अपनी बात रखी थी। उनके इस सार्वजनिक रुख के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और अन्य प्रमुख हस्तियों ने उनके खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का तीखा पलटवार
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने नसीरुद्दीन शाह की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अपना सामान बांधकर पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू राष्ट्र में रहकर कमाई करते हैं, लेकिन उनकी निष्ठा सीमा पार की ताकतों के साथ जुड़ी रहती है। उनके अनुसार, पड़ोसी मुल्क में बैठे संचालक ऐसे तत्वों को स्क्रिप्ट मुहैया कराते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिनेता इसी देश में पले-बढ़े हैं और उनकी सिनेमाई पहचान भी यहीं की जनता की वजह से बनी है, क्योंकि उनकी फिल्में पाकिस्तान में नहीं चलती थीं।
नितेश राणे ने आगे कहा कि यदि किसी को देश की व्यवस्था से इतनी शिकायत है और वह खुद को दिमागी नक्सल कहलाने में गर्व महसूस करता है, तो उसके लिए वहां जाना ही बेहतर है जहां इस तरह की सोच रखने वालों की बड़ी तादाद मौजूद है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की पहचान और स्वीकार्यता के बिना किसी भी कलाकार को यह मुकाम नहीं मिल सकता था।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी राय रखी। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह एक कलाकार के तौर पर नसीरुद्दीन शाह का आदर करते थे और उनके काम को पसंद करते थे, लेकिन उनका यह रूप लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है। उन्होंने अभिनेता की विचारधारा को खतरनाक अर्बन नक्सल सोच से जुड़ा हुआ करार दिया।
वहीं, फिल्म जगत से जुड़े अभिनेता पुनीत इस्सर ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साथी कलाकार के रूप में वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा केवल एकतरफा, वामपंथी और नक्सल-समर्थक नजर आती है। पुनीत इस्सर ने सुझाव दिया कि यदि किसी को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई मौजूदा सत्ता व्यवस्था से असंतोष है, तो बयानबाजी करने के बजाय राजनीति के मैदान में उतरकर सीधे चुनाव लड़ना चाहिए।




















