एक ऐसी खबर जिसने ग्लोबल बाजारों का मूड पूरी तरह बदल दिया — अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति. इस घटनाक्रम का सबसे सीधा और तुरंत फायदा उन कंपनियों को मिलता दिख रहा है जो समुद्र के रास्ते कच्चा तेल ढोती हैं. वजह साफ है: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का करीब एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है, अब दोबारा पूरी तरह खुलने जा रहा है. यही उम्मीद सोमवार को बाजार खुलते ही शिपिंग कंपनियों के शेयरों में बड़ी तेजी की वजह बनी.
भारतीय शिपिंग शेयरों में किसने कितनी छलांग लगाई
तेजी की अगुवाई शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने की, जिसका शेयर करीब 4.61% चढ़कर 310.75 रुपये पर पहुंच गया. तेल और गैस ट्रांसपोर्टेशन में बड़ा नाम रखने वाली द ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग (GE Shipping) का शेयर 3.95% की बढ़त के साथ 1,444 रुपये पर कारोबार करता दिखा. इसी कतार में साधव शिपिंग (Sadhav Shipping) 3.65%, एस्सार शिपिंग (Essar Shipping) 2.36% और समुद्र के भीतर सेवाएं देने वाली सीमेक (Seamec) 1.67% तक चढ़ गई. निवेशकों का गणित सीधा है — रास्ता खुलने से इन कंपनियों का कारोबार बढ़ेगा और मुनाफे में भी तेज इजाफा होगा.
शेयरों में जोश की असली वजह
इस पूरी हलचल की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ दुश्मनी खत्म करने और शांति समझौते पर सहमति बनने की घोषणा की. इस ऐतिहासिक डील पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून को होने हैं. यहां समझना जरूरी है कि होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया का सबसे संवेदनशील और अहम समुद्री रास्ता क्यों माना जाता है — इससे रोजाना 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है. इस साल की शुरुआत में जब हालात बिगड़े थे, तब ईरान ने इस रूट पर पाबंदियां लगा दी थीं और वैश्विक व्यापार लगभग ठहर सा गया था.
फारस की खाड़ी में अटके सैकड़ों जहाज
इस तनाव का पैमाना कितना बड़ा था, यह आंकड़ों से समझा जा सकता है. डेटा इंटेलिजेंस फर्म केपलर (Kpler) के मुताबिक, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में करीब 600 मालवाहक जहाज फंसे पड़े थे, जबकि सैकड़ों और जहाज अंदर दाखिल होने का इंतजार कर रहे थे. अब रास्ता साफ होने की उम्मीद के साथ इन जहाजों की आवाजाही दोबारा रफ्तार पकड़ेगी.
तेल की कीमतों और एशियाई बाजारों पर असर
शांति समझौते की गूंज सिर्फ शिपिंग शेयरों तक सीमित नहीं रही. इसका सीधा असर कच्चे तेल के दामों पर भी पड़ा — ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) 4 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. एक तरफ तेल सस्ता हुआ और दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव घटा, जिसका दोहरा फायदा बाजार को मिला. नतीजा यह रहा कि शिपिंग कंपनियों के साथ-साथ पूरे एशियाई बाजारों में भी रौनक लौट आई.













