अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के अंतर्निहित दबाव अभी भी केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से ऊपर बने हुए हैं, जिससे ब्याज दरों के आगामी रास्ते को लेकर वित्तीय बाजारों में असमंजस गहरा गया है। अगस्त महीने के व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक के आंकड़े उम्मीद से कुछ कमजोर रहे, लेकिन इसके आंतरिक विवरण पूरी तरह से राहत देने वाले नहीं हैं। कोर गुड्स यानी प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी ने सेवाओं और सुपर-कोर मुद्रास्फीति में आई नई तेजी को छिपा दिया। इसका सीधा संकेत है कि बुनियादी मूल्य दबाव अभी भी अर्थव्यवस्था में मजबूती से जमे हुए हैं। इसके साथ ही सरकार के वार्षिक संशोधन से पता चला है कि पहली छमाही में वास्तविक खपत, वेतन आय और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर पहले के अनुमानों की तुलना में काफी बेहतर रही है, जबकि अगस्त में घरेलू खर्च में जोरदार उछाल देखा गया।
फेडरल रिजर्व की दरों का गणित बदला और वार्षिक संशोधन के मायने
बाजार के कारोबारी पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 28 अक्टूबर को ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ताजा आर्थिक आंकड़ों के बाद इस संभावना को अब 9 दिसंबर तक आगे बढ़ा दिया गया है। इस बदलाव में अगस्त के साथ-साथ जुलाई के संशोधित आंकड़ों की भी बड़ी भूमिका रही। सरकार द्वारा जारी वार्षिक संशोधन में खाद्य और ऊर्जा को अलग रखने वाली जुलाई की कोर मुद्रास्फीति को पहले के 3.3% से घटाकर 3% कर दिया गया। हालांकि इन बेंचमार्क संशोधनों ने मुद्रास्फीति के पिछले स्तर को थोड़ा नीचे किया और पूर्व के अतिरंजित अनुमानों को सुधारा, पर समग्र परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। पिछले एक वर्ष में अंतर्निहित महंगाई धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसकी है और अब भी फेड के अनिवार्य लक्ष्य से काफी ऊपर टिकी हुई है। 1H26 यानी पहली छमाही की मजबूत वास्तविक खपत, बेहतर वेतन आय और मजबूत GDP आंकड़ों ने दर्शाया है कि अमेरिकी परिवारों की खरीदारी क्षमता अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है।
डॉलर इंडेक्स की मजबूती से प्रमुख मुद्राओं पर बना दबाव
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती ने कई प्रमुख मुद्राओं को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में रही और 0.6900 के मध्य स्तर पर कारोबार करती दिखी। अमेरिकी PCE आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड बढ़ोतरी के दांव को कुछ धीमा जरूर किया, लेकिन कच्चे तेल की वजह से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। इसी बीच अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से गिरकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD495M) पर आ गया, यद्यपि इस तेज गिरावट का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीमित असर ही देखने को मिला।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी गुरुवार के एशियाई सत्र में 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर पर मजबूती से टिकी रही। नरम अमेरिकी PCE आंकड़ों के बावजूद तेल से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिमों ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त अमेरिका और ईरान के बीच जारी राजनीतिक तनाव से सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे इस जोड़ी को लगातार सहारा मिल रहा है। डॉलर की यह व्यापक मजबूती बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की अटकलों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों को पूरी तरह बेअसर कर रही है।
सोने की कीमतों में गिरावट और यूरो का नया संकट
ब्याज न देने वाली संपत्तियों पर बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों का सीधा नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गुरुवार तड़के 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करता नजर आया। इससे पिछले कारोबारी दिन पीली धातु 4,220 डॉलर के स्तर तक पहुंची थी, जहां से मुनाफावसूली के चलते गिरावट आई। तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई दोबारा भड़कने की आशंका और बहु-वर्षीय उच्च स्तरों पर बनी अमेरिकी यील्ड ने बुलियन पर दबाव बनाए रखा है। साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की पहली पसंद के तौर पर डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे सोने में किसी भी बड़े सुधार पर ब्रेक लगा हुआ है।
यूरोपीय मुद्रा के मोर्चे पर यूरो और अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 के स्तर तक चली गई थी, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। हालांकि जानकारों का मानना है कि यूरोजोन में महंगाई का कोई नया झटका यूरो को इस भारी दबाव से उबारने के लिए अप्रत्याशित जीवनदान दे सकता है, बशर्ते यूरोपीय नीति निर्माताओं को ब्याज दरों के मोर्चे पर सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़े।



















