अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करते हुए निर्णायक जीत दर्ज की है। मतों की गिनती के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि डेमोक्रेट्स ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में स्पष्ट बहुमत बना लिया है। वाशिंगटन में आए इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में बचे अंतिम दो वर्षों के दौरान उनके घरेलू एजेंडे और आर्थिक प्राथमिकताओं पर कड़ा अंकुश लगने के आसार बन गए हैं। नीतिगत स्तर पर होने वाले इस गतिरोध का असर वित्तीय बाजारों, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक संपत्तियों पर तुरंत दिखने लगा है।
संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का दबदबा और संभावित गतिरोध
मतगणना के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। आईएनजी के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मध्यावधि चुनाव में मिली इस स्पष्ट जीत के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने शेष कार्यकाल में नीतियों को आगे बढ़ाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। जब कांग्रेस का नियंत्रण विपक्षी दल के पास होता है, तो प्रशासन के अधिकांश घरेलू कानून सहमति के अभाव में अटक जाते हैं। आने वाले दिनों में कर कटौती और बजटीय आवंटन से जुड़े प्रस्तावों को पारित कराना ट्रंप प्रशासन के लिए लगभग असंभव हो सकता है।
"The obvious outcome from the result on Tuesday is that a Democrat-controlled Congress will stifle President Trump’s domestic agenda in his final two years in power."
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दोनों दलों के बीच शक्ति संतुलन बदलने के कारण किसी भी नए वित्तीय विस्तार की गुंजाइश खत्म हो गई है। जब विधायी प्रक्रिया में गतिरोध पैदा होगा, तो खर्च बढ़ाने या कर संरचना में बड़े बदलाव करने वाले विधेयक दोनों सदनों से पास नहीं हो सकेंगे। हालांकि, नए वित्तीय विस्तार पर रोक लगने के बावजूद अमेरिका के विशाल राजकोषीय घाटे और लगातार बिगड़ते कर्ज के हालात में तुरंत सुधार आने की उम्मीद नहीं है।
राजकोषीय घाटा, कर्ज की सीमा और नीतिगत अड़चनें
आईएनजी के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी राजकोषीय घाटे और कर्ज के बढ़ते दबाव की चिंताएं लगातार बनी रहेंगी। बजट घाटा उच्च स्तर पर रहने की संभावना है क्योंकि पुराने दायित्वों और मौजूदा खर्चों में भारी कटौती करना आसान नहीं होगा। इस बीच, कर्ज की ऊपरी सीमा यानी डेट सीलिंग को छूना वित्तीय नीतियों के लिए एक अस्थायी ब्रेक की तरह काम कर सकता है। जब तक कर्ज की सीमा बढ़ाने पर दोनों दल सहमत नहीं होंगे, तब तक सरकार की उधारी और अतिरिक्त खर्च करने की क्षमता सीमित रहेगी।
विश्लेषकों का आकलन है कि भले ही नया वित्तीय प्रोत्साहन रुक जाए, लेकिन मौजूदा देनदारियों और ब्याज भुगतान के कारण कर्ज की स्थिति गंभीर बनी रहेगी। इस राजनीतिक विभाजन के चलते वित्तीय अनुशासन लागू करने की मांगें उठ सकती हैं, लेकिन किसी भी बड़े संरचनात्मक सुधार के लिए दोनों पार्टियों में सहमति बनना मुश्किल नजर आ रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर पर चौतरफा दबाव
चुनाव नतीजों के बाद वाशिंगटन में नीतिगत अनिश्चितता गहराने से अमेरिकी डॉलर में भारी बिकवाली देखी गई। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में तेज गिरावट दर्ज की गई। यूएस बॉन्ड यील्ड में आई नई गिरावट ने भी डॉलर की कमजोरी को और बढ़ा दिया। निवेशकों में सेफ-हेवन संपत्तियों की मांग लौटने से ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई, जिसने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के दावों के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) भारी बिकवाली दबाव में आ गया और यह फिसलकर 158.00 के नीचे आ गया। चुनाव के शुरुआती आंकड़ों के बाद बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर को एक महीने के निचले स्तर पर धकेल दिया। वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा, जिससे बॉन्ड यील्ड गिरी और डॉलर पर दबाव और बढ़ गया। दूसरी ओर, एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) 0.6965 के करीब कारोबार करते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलने में कामयाब रहा। हालांकि, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अपेक्षाकृत कम सख्त रुख के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त एक सीमित दायरे में रही।
सोने में लौटी चमक और कच्चे तेल की गिरावट का सहारा
राजनीतिक उठापटक और डॉलर की कमजोरी के बीच बुलियन बाजार में सोने ने शानदार वापसी की है। लगातार दो सत्रों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए सोना बुधवार को फिर से 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। पीली धातु की इस रिकवरी को तीन प्रमुख कारकों से मजबूती मिली है, जिनमें अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार गिरावट, यूएस ट्रेजरी यील्ड का नीचे आना और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी शामिल हैं। बॉन्ड यील्ड और डॉलर के कमजोर पड़ने से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग में तेजी आई है।
क्रिप्टो बाजार में हरियाली, बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार
वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की धारणा में सुधार होने से डिजिटल एसेट बाजार में भी तेजी का माहौल बना। बुधवार को बिटकॉइन (BTC) 78,000 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सकारात्मक माहौल बनने से अन्य प्रमुख टोकनों में भी खरीदारी देखने को मिली। इथेरियम (ETH) ने भी बीटीसी के नक्शेकदम पर चलते हुए 2,300 डॉलर के स्तर के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखी। इसी तरह, रिपल (XRP) ने लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज करते हुए 1.28 डॉलर के स्तर से ऊपर हाथ बदले। चुनाव नतीजों के बाद डॉलर में आई कमजोरी और नीतिगत ठहराव के संकेतों ने निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों की तरफ रुख करने के लिए प्रेरित किया है।



















