यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति को लेकर एक गंभीर असमंजस खड़ा हो गया है। यूरोस्टेट की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार यूरो क्षेत्र में अक्टूबर के दौरान हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर बढ़कर 4.0 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पहले लगाए गए 3.8 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रहा है। मुद्रास्फीति का यह तेज उछाल यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के उस अनुमान के लिए ऊपर की ओर बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है, जिसमें चौथी तिमाही में औसत मुद्रास्फीति 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके साथ ही आर्थिक विकास की रफ्तार भी लगातार सुस्त पड़ रही है, जिससे नीति निर्माताओं के सामने दोहरी मुश्किल पैदा हो गई है।
यूरो क्षेत्र में विकास की गति और ईसीबी का नीतिगत फैसला
आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर यूरो क्षेत्र की स्थिति काफी नाजुक नजर आ रही है। यदि आंकड़ों में से आयरलैंड के प्रभाव को अलग कर दिया जाए, तो यूरो क्षेत्र की जीडीपी वृद्धि दर महज 0.2 प्रतिशत की बेहद मामूली दर पर दर्ज की गई है। सबसे अहम बात यह है कि विकास की गति 2025 की चौथी तिमाही के बाद से लगातार गिर रही है। एक तरफ कमजोर पड़ती विकास दर और दूसरी तरफ लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति का यह मेल केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत दुविधा को गहरा कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति के दबाव और इसके दूसरे दौर के संभावित प्रभावों का असर फिलहाल प्राथमिक नीतिगत प्राथमिकताओं पर हावी रहेगा। इसी वजह से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक अपनी आगामी दिसंबर बैठक में प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों यानी 25 बीपीएस की और बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में स्टैगफ्लेशन को मुख्य आधार स्थिति नहीं माना जा रहा है। आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि दर के सकारात्मक बने रहने और अगले साल की शुरुआत से मुद्रास्फीति में गिरावट शुरू होने की संभावना बनी हुई है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बीच डॉलर में कमजोरी
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उतार चढ़ाव देखने को मिला है। शुरुआती अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों से राजनीतिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा और भारी दबाव अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है। वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की आशंकाओं ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ावा दिया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई। इसने फेडरल रिजर्व की ब्याज दर वृद्धि के दांवों को संतुलित करते हुए ग्रीनबैक पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।
बुधवार के कारोबारी सत्र में एशियाई बाजार के दौरान यूएसडी/जेपीवाई पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। यह मुद्रा युग्म फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया, जबकि अमेरिकी डॉलर लुढ़ककर एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, एयूडी/यूएसडी दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर स्थिर बना रहा और एशियाई सत्र में 0.6965 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए के अपेक्षाकृत कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित करने का काम किया।
सोने में वापसी और क्रिप्टो बाजार की तेजी
कमजोर होते अमेरिकी डॉलर, गिरती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है। पीली धातु पिछले दो लगातार कारोबारी सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए संभलने में कामयाब रही। बुधवार को सोना एक बार फिर मजबूती दर्ज करते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के अहम स्तर के पार निकल गया। कमोडिटी बाजार में घटती यील्ड और डॉलर की सुस्ती से सोने को सुरक्षित परिसंपत्ति के तौर पर नया समर्थन मिला है।
जोखिम लेने की क्षमता में सुधार के चलते व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। बिटकॉइन बुधवार को 78,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता रहा। दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा इथेरियम ने भी इसी सुधार के रुख को दर्शाया और 2,300 डॉलर के पार टिकी रही। इसी तरह, रिपल 1.28 डॉलर के ऊपर हाथ बदलता नजर आया, जिससे इसने लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज की है। वैश्विक स्तर पर वित्तीय बाजारों में इस समय केंद्रीय बैंकों के फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है।


















