अमेरिकी मुद्रा में सितंबर के बाद से देखी गई तेज बढ़त अब थमने के कगार पर पहुंच गई है, क्योंकि वित्तीय बाजारों में साल के अंत तक एक राहत भरी बिकवाली की परिस्थितियां बनने लगी हैं। मुद्रा विनिमय बाजार में विश्लेषकों का मानना है कि रोजगार बाजार की धीमी रफ्तार अमेरिकी डॉलर की मौजूदा चाल को धीमा कर सकती है। यदि आगामी पेरोल आंकड़े अनुमान से कमजोर रहते हैं, तो डॉलर में गिरावट की रफ्तार और तेज हो सकती है। मुद्रा विकल्प बाजार भी इस बात के स्पष्ट संकेत दे रहा है कि निवेशक और कारोबारी साल के समापन से पहले कमजोर डॉलर के हिसाब से अपने सौदों की जमावट करने लगे हैं।
रोजगार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का समीकरण
अमेरिकी लेबर मार्केट के मोर्चे पर अक्टूबर महीने में रोजगार सृजन 40k रहने का अनुमान जताया गया है, जो कि सितंबर के दौरान दर्ज की गई 29k की मामूली वृद्धि के बाद का आंकड़ा है। अर्थशास्त्रियों का आंकलन है कि यह अनुमान बाजार की आम सहमति से कम होने के बावजूद ब्रेक-ईवन रोजगार वृद्धि के दायरे में बना रहेगा। इसके साथ ही, इससे तीन महीने के मूविंग एवरेज में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। हालांकि, रोजगार के आंकड़ों में नरमी के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी गतिविधियां काफी मजबूत बनी हुई हैं। इसके साथ ही महंगाई से जुड़े जोखिम अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, जिसके चलते आगामी दिसंबर बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी अधिक मानी जा रही है। सितंबर के बाद से आई आक्रामक तेजी के बाद वर्ष के अंत में डॉलर में बिकवाली का यह रुख काफी हद तक 2018 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद बने रुझान से मेल खाता है।
मध्यावधि चुनाव और वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध का असर
बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती मध्यावधि चुनाव नतीजों से पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाला। वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की बढ़ती संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को पुनर्जीवित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई। बॉन्ड प्रतिफल में आई इस गिरावट ने फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के दावों को बेअसर कर दिया और ग्रीनबैक पर बिकवाली का अतिरिक्त दबाव बना दिया। राजनीतिक उठापटक और नीतिगत फैसलों के बीच वैश्विक स्तर पर निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में हलचल: येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट देखी गई। बुधवार को एशियाई कारोबार के दौरान USD/JPY फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। राजनीतिक अनिश्चितता के बीच डॉलर एक महीने के निचले स्तर तक टूट गया। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के आसपास स्थिर कारोबार करता नजर आया। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अपेक्षाकृत कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा।
कमजोर डॉलर से सोने की चमक लौटी, 4,000 डॉलर के पार पहुंचा भाव
मुद्रा बाजार में डॉलर के लड़खड़ाने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट का सीधा फायदा बहुमूल्य धातुओं को मिला है। लगातार दो सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए सोने ने बुधवार को शानदार वापसी की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर पहुंच गया। डॉलर के कमजोर पड़ने के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी पीली धातु की इस जोरदार रिकवरी में उत्प्रेरक का काम किया है। निवेशक बॉन्ड यील्ड की गिरावट के बीच अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए दोबारा सोने का रुख कर रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जोखिम लेने की भूख बढ़ी
डॉलर के कमजोर होने और वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी के बदले समीकरणों से डिजिटल एसेट्स के बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। बुधवार को व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में रिस्क-ऑन सेंटिमेंट सुधरने से बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार कारोबार करता दिखा। मुख्य क्रिप्टोकरेंसी के नक्शेकदम पर चलते हुए इथेरियम भी 2,300 डॉलर के ऊपर बना रहा और मजबूती के संकेत दिए। इसके साथ ही रिपल में भी बढ़त का सिलसिला जारी रहा और यह 1.28 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, जिसने लगातार दूसरे दिन तेजी का रुख कायम रखा। आने वाले दिनों में रोजगार के आधिकारिक आंकड़े और चुनावी नतीजों की अंतिम स्थिति इस व्यापक वित्तीय बदलाव की दिशा तय करेंगे।





















