सरकारी रेलवे कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयरों ने बुधवार को निवेशकों को झटका दिया। यह स्टॉक 5.40% तक लुढ़क गया, जो जून महीने की इसकी सबसे तेज गिरावट रही। बाजार खुलने के कुछ ही मिनट बाद शेयर 98.96 के ऊंचे स्तर से फिसलकर 93.35 तक पहुंच गया। हैरानी की बात यह रही कि जिस दिन सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर हरे निशान में मजबूती से डटा था, ठीक उसी दिन IRFC बाजार की चाल के बिल्कुल उल्टा चल रहा था।
चार्ट पर कमजोर पड़ता सेंटिमेंट
बाजार के साथ चलने के बजाय IRFC का शेयर विपरीत दिशा में भागा और चार्ट पर इसका कमजोर रुख साफ झलक रहा था। एक विश्लेषक पहले ही अनुमान जता चुके थे कि यह रेलवे स्टॉक आखिरकार 92 के दायरे तक फिसल सकता है। अगर इसके बाद शेयर में नई जान नहीं आई, तो 90 के स्तर से नीचे जाने की आशंका भी बनी हुई है। इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के चलते मार्च के आखिर में यह शेयर 87 के अपने सालाना निचले स्तर तक गिर चुका है।
आखिर क्यों टूटा IRFC का शेयर
IRFC रेलवे की एक सरकारी कंपनी है, जिसमें सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है। इसी साल की शुरुआत में सरकार ने एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) का ऐलान किया था, जिसके तहत 91 के फ्लोर प्राइस पर अपनी 1% हिस्सेदारी बेचने की योजना है। इस कदम से शेयर का फ्री फ्लोट और लिक्विडिटी बढ़ेगी, साथ ही सरकार की विनिवेश मुहिम रिटेल निवेशकों को इस स्टॉक में हिस्सा लेने का मौका देती है। चूंकि शेयर की कीमत 100 रुपये से कम है, इसलिए IRFC आम खुदरा निवेशकों के बीच खासा लोकप्रिय बना हुआ है।
OFS के तहत सरकार 13.06 करोड़ IRFC शेयर बेचने की योजना बना रही है, और इसके साथ अतिरिक्त 1% यानी 13.06 करोड़ शेयर और बेचने का विकल्प भी रखा गया है। इसी बिकवाली के दबाव ने रेलवे की इस दिग्गज कंपनी के शेयर में तीखी गिरावट ला दी। जानकारों का मानना है कि यह करेक्शन सामान्य है और OFS पूरी तरह निपटने के बाद कीमत में स्थिरता आ सकती है। मौजूदा स्तर पर शेयर जुटाना या 80 के ऊपर वाले दायरे में गिरावट पर खरीदारी फायदेमंद साबित हो सकती है। पूरा सौदा निपटने के बाद इसमें तेजी लौटने की संभावना भी अच्छी मानी जा रही है।













