अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों से ठीक पहले कारोबारी सतर्कता का माहौल देखने को मिल रहा है। कनाडाई डॉलर दिन के कारोबार के दौरान मोटे तौर पर स्थिर स्तर पर बना हुआ है, जबकि निवेशक बैंक ऑफ कनाडा द्वारा 2 सितंबर के नीतिगत फैसले पर जारी किए जाने वाले विचार-विमर्श के सारांश का इंतजार कर रहे हैं। दोपहर 13.30ET पर जारी होने वाले इस आधिकारिक ब्योरे में बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर मैकलेम द्वारा बैठक के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाहिर किए गए सख्त रुख की स्पष्ट झलक मिलने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का ध्यान व्यापारिक तनाव की वजह से पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता के मुकाबले महंगाई के जोखिमों पर अधिक केंद्रित हो चुका है। हालिया मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि बुनियादी स्तर पर कीमतों का दबाव काफी मजबूत बना हुआ है, भले ही व्यापक आंकड़े अनुमान के काफी करीब रहे हों।
कनाडा में नीतिगत सामान्यीकरण और उत्पादकता को लेकर नया टैक्स ढांचा
बैंक ऑफ कनाडा की वर्तमान नीतिगत संरचना अभी भी विकास को समर्थन देने वाली यानी अकोमोडेटिव बनी हुई है। हालांकि, बाजार में लगातार महसूस किया जा रहा मूल्य दबाव इस संभावना को बढ़ा रहा है कि मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया इसी वर्ष के अंत तक शुरू की जा सकती है। यह परिदृश्य उन दीर्घकालिक नीतिगत अनुमानों से भी मेल खाता है जो दरों में बदलाव को लेकर जताए जा रहे थे। इसी बीच राजकोषीय मोर्चे पर भी एक बड़ा घटनाक्रम हुआ है, जहां प्रधानमंत्री कार्नी ने एक दिन पहले उत्पादकता के लिए विशेष डिडक्शन योजना की घोषणा की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत नए कारोबारी निवेश पर लगने वाले प्रभावी सीमांत कर को घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है। पांच वर्षों में 36 अरब कनाडाई डॉलर की भारी लागत वाली यह योजना मुद्रा के लिए कोई त्वरित उत्प्रेरक साबित नहीं हो रही है, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में व्यावसायिक उत्पादकता और पूंजी निवेश बढ़ाने के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
अमेरिकी डॉलर बनाम कनाडाई डॉलर के प्रमुख तकनीकी स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो अमेरिकी डॉलर लगातार ऊपरी स्तरों पर दबाव बना रहा है। दैनिक चार्ट पर 1.39 के निचले और मध्य क्षेत्र के बीच एक व्यापक रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जिसके आसपास डॉलर का रुख हल्के तौर पर सकारात्मक होता दिखाई दे रहा है। यदि अमेरिकी डॉलर 1.3950 के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो यह तेजी के एक नए दौर को जन्म दे सकता है। ऐसी स्थिति में बाजार के लिए 1.40 से 1.4150 के दायरे तक जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके विपरीत, गिरावट की स्थिति में तत्काल सहारा काफी नीचे है, जहां 1.3825 और 1.3830 के स्तरों पर तकनीकी सपोर्ट देखा जा रहा है। फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले कारोबारी दोनों दिशाओं में किसी भी बड़े ब्रेकआउट पर नजर टिकाए हुए हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव और कच्चे तेल से उपजी चिंताएं
अन्य प्रमुख मुद्राओं की स्थिति का विश्लेषण करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी का दबाव बरकरार है। बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान यह मुद्रा 0.7100 के स्तर का बचाव करने की पुरजोर कोशिश करती नजर आई, हालांकि यह अपने मासिक निचले स्तर के बेहद करीब कारोबार कर रही थी। अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के अपने उच्चतम स्तर के पास मजबूती से टिका हुआ है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रत्याशा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उपजी मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रहा है, जिसका सीधा नुकसान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं को उठाना पड़ रहा है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की संभावित नीतिगत सख्ती
डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी कमजोरी देखी गई है। बुधवार को एशियाई कारोबार में अमेरिकी डॉलर जापानी येन के मुकाबले एक सप्ताह के ताजा उच्च स्तर को छूते हुए 155.00 के पार निकल गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित महंगाई का डर और फेडरल रिजर्व का आगामी फैसला अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल का कारण बने हुए हैं। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की स्थिति को और सुदृढ़ किया है। हालांकि, दोपहर में आने वाले फेडरल रिजर्व के निर्णय और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक के मद्देनजर कारोबारी सतर्क हैं, जिससे यह मुद्रा जोड़ी 155.50 के स्तर से नीचे सीमित बनी हुई है। जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है, जिससे येन दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बना रहा। लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा इसी सप्ताह मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के साथ, यह लंबे समय से चला आ रहा फायदा अब एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। ऐसे समय में जब अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पहले ही ब्याज दरें बढ़ा दी थीं, जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अपवाद बना रहा था।
सोने की कीमतों में सुधार और वैश्विक बॉन्ड बाजार का व्यवहार
कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट के सिलसिले को थामते हुए बुधवार के मध्य सत्र में मजबूत वापसी की। पीली धातु ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती हासिल करते हुए 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को पुनः छू लिया। सोने में यह सुधार तब देखने को मिला है जब अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहा है और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में फेडरल रिजर्व के संभावित नीतिगत फैसले से पहले गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग और केंद्रीय बैंकों की आगामी कार्यप्रणाली के बीच निवेशक विभिन्न परिसंपत्तियों में अपने जोखिम को पुनर्गठित कर रहे हैं, जिसका व्यापक असर आगामी कारोबारी सत्रों में मुद्राओं और धातुओं पर साफ देखने को मिलेगा।



















