अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती के चलते स्वीडिश क्रोना पर दबाव देखा जा रहा है, हालांकि स्वीडन के केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक की सख्त मौद्रिक नीति से क्रोना को राहत मिलने के पूरे आसार बने हुए हैं। स्वीडन में सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के मिले-जुले आंकड़ों के बावजूद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पूरी तरह बरकरार है। बाजार विश्लेषक एलियास हद्दाद के मुताबिक, अस्थायी राजकोषीय नीतिगत उपायों के समायोजन के बाद स्वीडन की मुद्रास्फीति करीब 2 प्रतिशत के आसपास बैठती है, जो रिक्सबैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है। आने वाले एक साल के दौरान 75 से 100 आधार अंकों की संभावित नीतिगत सख्ती अमेरिकी फेडरल रिजर्व के साथ नीतिगत अंतर को सीमित करेगी, जो आने वाले समय में यूएसडी/एसईके मुद्रा जोड़ी की बढ़त की राह में एक बड़ी बाधा बन सकती है।
मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंक का सख्त रुख
स्वीडन में सितंबर महीने की महंगाई दर के आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। ऊर्जा को शामिल किए बिना तय की गई निश्चित ब्याज दर वाली मुद्रास्फीति यानी सीपीआईएफ 1.5 प्रतिशत वार्षिक दर्ज की गई, जो बाजार के आम अनुमानों और रिक्सबैंक के खुद के अनुमानों के बिल्कुल बराबर रही। अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 0.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। वहीं दूसरी तरफ, ऊर्जा की कीमतों को बाहर रखकर आंकी गई सीपीआईएफ दर 0.5 प्रतिशत वार्षिक रही, जो अनुमानित 0.7 प्रतिशत और रिक्सबैंक के अनुमान से कम दर्ज की गई, जबकि अगस्त में भी यह 0.5 प्रतिशत पर ही बनी हुई थी। हालांकि जब अस्थायी सरकारी उपायों का प्रभाव हटाकर देखा जाए, तो वास्तविक मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य के काफी करीब नजर आती है।
रिक्सबैंक ने सितंबर के दौरान अपनी नीतिगत घोषणा में साफ संकेत दिया था कि जून के अनुमानों की तुलना में नीतिगत ब्याज दर को आगे और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। बैंक ने यह भी दोहराया कि नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला इसी वर्ष शुरू होने की उम्मीद है। वित्तीय बाजार अगले 12 महीनों में करीब 75 से 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी का अनुमान लेकर चल रहे हैं, जिससे स्वीडिश क्रोना को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता मिल सकती है।
करेंसी बाजार में तकनीकी तस्वीर और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
यूएसडी/एसईके मुद्रा जोड़ी हालिया सत्रों में 10.02 के स्तर पर कारोबार करती नजर आई है, जो पिछले 10.04 के बंद स्तर से 0.12 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। बीते 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 8.77 से 10.10 के बीच रहा है, जिसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना के बराबर है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 76 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीद की स्थिति की ओर इशारा करता है। एमएसीडी सूचकांक 0.11 पर है जबकि इसका सिग्नल 0.10 पर है, जिससे 0.01 का तेजी का हिस्टोग्राम दिखाई देता है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय ईएमए 9.89, 50-दिवसीय ईएमए 9.75 और 200-दिवसीय ईएमए 9.49 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 9.67 और 200-दिवसीय एसएमए 9.40 पर बने हुए हैं। यह स्थिति दीर्घकालिक अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस को रेखांकित करती है। बोलिंगर बैंड्स 9.62 से 10.13 के बीच फैले हैं और मौजूदा भाव इसके दायरे में है। एडीएक्स 47 पर एक मजबूत ट्रेंड दर्शाता है, स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 75 तथा सिग्नल लाइन 78 पर है, और एटीआर 0.08 के दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। इस जोड़ी के लिए पिवट स्तर 10.02, पहला प्रतिरोध 10.06, दूसरा प्रतिरोध 10.09 तथा समर्थन स्तर 9.99 और 9.95 पर आंके गए हैं, जबकि 20-दिवसीय मुख्य समर्थन 9.57 और प्रतिरोध 10.10 पर है।
वैश्विक मुद्राओं और बॉन्ड यील्ड का व्यापक प्रभाव
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेजी का असर केवल स्वीडिश क्रोना तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ संघर्ष करता दिखा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक आरबीए की आक्रामक नीतिगत उम्मीदों के बावजूद, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नई उछाल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी। बाजार के प्रतिभागी अब फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं।
इसी तरह यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के पास डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब टिका रहा। यहां बुल निवेशक 200-दिवसीय एसएमए की बाधा को पार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले बयानों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने इस जोड़ी को सहारा दिया है।
कमोडिटी, शेयर बाजार और क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर असर
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर भी नकारात्मक असर डाला है। सोने की कीमतों में करीब 1.20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक वर्ष के अंत से पहले फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि के सुराग तलाश रहे हैं। दूसरी ओर कच्चे तेल के बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है, जिससे वैश्विक जोखिम धारणा और अधिक कमजोर हुई है। यूरोप के शेयर सूचकांकों में बिकवाली का दौर गहरा गया है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी मंदी का दबाव दिखाई दिया। बिटकॉइन में 87,200 डॉलर के स्तर के आसपास बिकवाली दबाव के बाद सुधार देखा गया। अन्य क्रिप्टोकरेंसी भी कमजोरी के दौर में रहीं, जिसमें एथेरियम 2,600 डॉलर के प्रमुख समर्थन की ओर फिसल गया और रिपल 1.45 डॉलर के डिमांड क्षेत्र के पास नीचे की ओर खिसक गया।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक के सामने जटिल मौद्रिक चुनौती
यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने भी चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही हो, तो केंद्रीय बैंक का स्वाभाविक कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का काम कर रहा है, जिससे ईसीबी के लिए नीतिगत निर्णय लेना बेहद जटिल दुविधा बन चुका है। ऐसे वैश्विक माहौल के बीच रिक्सबैंक की दर वृद्धि की तैयारी स्वीडिश क्रोना को एक मजबूत रक्षात्मक आधार प्रदान कर सकती है।





















