ब्राज़ील में आगामी 25 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर को लेकर वित्तीय बाज़ारों में हलचल काफी तेज़ हो गई है। चुनावी मैदान में लूला डा सिल्वा और फ्लावियो बोल्सोनारो आमने-सामने हैं, और इस निर्णायक मुकाबले के नतीजों का सीधा असर ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था और वित्तीय संपत्तियों पर पड़ने की संभावना है। कॉमर्जबैंक के विश्लेषक नॉर्मन लीबके के अनुसार, निवेशक और ट्रेडर इस चुनावी प्रक्रिया पर बहुत बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। यदि फ्लावियो बोल्सोनारो इस चुनाव में जीत दर्ज करते हैं, तो इससे बाज़ार के अनुकूल और राजकोषीय रूप से रूढ़िवादी नीतियां लागू होने की उम्मीद बढ़ेगी, साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों में भी मजबूती आ सकती है। हालांकि इन सकारात्मक उम्मीदों के बीच एक बड़ा जोखिम यह भी बना हुआ है कि यदि संसद में भारी विरोध के कारण आर्थिक सुधार पूरी तरह लागू नहीं हो सके, तो ब्राज़ीलियाई रियाल पर तीव्र बिकवाली का दबाव आ सकता है।
चुनावी समीकरण और पहले दौर से बाहर हुए उम्मीदवारों का रुख
राष्ट्रपति चुनाव के रन-ऑफ चरण में पहुंचने से पहले बाज़ार की पूरी रणनीति इस बात पर निर्भर कर रही है कि पहले दौर में बाहर हो चुके उम्मीदवारों का समर्थन किस पाले में जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि 25 अक्टूबर के मुकाबले से पहले निवेशक सबसे पहले इसी गठबंधन की गणित को समझने की कोशिश करेंगे। पहले दौर के पराजित प्रत्याशियों का समर्थन जिस उम्मीदवार को मिलेगा, उसकी जीत की संभावनाएं उतनी ही मजबूत होंगी। यदि बोल्सोनारो सत्ता में आते हैं, तो मौजूदा सरकार की नीतियों की तुलना में आर्थिक और विदेश नीति दोनों ही मोर्चों पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में व्यापारिक नीतियां निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश के अधिक अनुकूल बनाई जा सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
रियाल की मजबूती के साथ जुड़ा संसदीय गतिरोध का जोखिम
बाज़ार में बोल्सोनारो की जीत की संभावनाओं में इज़ाफे के साथ ब्राज़ीलियाई रियाल में पहले ही मज़बूती देखी गई है। मुद्रा व्यापारी मान रहे हैं कि राजकोषीय अनुशासन और सरकारी खर्चों पर नियंत्रण की नीतियां मुद्रा को सहारा देंगी। लेकिन इस उत्साह के पीछे एक गहरी चिंता भी छिपी है। ब्राज़ील की संसद में यदि राष्ट्रपति को बहुमत या पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता है, तो नए कानून और राजकोषीय सुधार अटक सकते हैं। नॉर्मन लीबके का स्पष्ट आकलन है कि यदि बोल्सोनारो संसद में कड़े विरोध के चलते अपनी योजनाओं को केवल आंशिक रूप से लागू कर पाते हैं या बिल्कुल भी लागू नहीं कर पाते हैं, तो यह स्थिति ब्राज़ीलियाई रियाल के लिए भारी गिरावट का सबब बन जाएगी। नीतिगत अनिश्चितता विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को जन्म दे सकती है, जिससे मुद्रा में आया हालिया उछाल तेजी से खत्म हो सकता है।
कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के बीच वैश्विक मुद्रा बाज़ार की स्थिति
लैटिन अमेरिका के अलावा दुनिया भर के अन्य प्रमुख करेंसी जोड़ों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन वॉर्श की हालिया टिप्पणियों के बाद शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा दबाव देखने को मिला। चेयरमैन वॉर्श ने भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, हालांकि उन्होंने मूल्य स्थिरता हासिल करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता ज़रूर दोहराई। नीतिगत दरों पर किसी स्पष्ट रुख के अभाव ने डॉलर की धारणा को कमज़ोर किया, जिसके चलते AUD/USD में उछाल आया और यह सुधरकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ गया।
दूसरी तरफ डॉलर में आई ताज़ा बिकवाली के कारण USD/JPY जोड़ी पर भी भारी दबाव देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी फिसलकर 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई। फेड की मौद्रिक सख्ती के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अमेरिकी करेंसी में मुनाफावसूली का दौर देखा जा रहा है, जिससे जापानी येन को कुछ राहत मिली है।
सोने के भाव में अनिश्चितता और क्रिप्टो बाज़ार की गिरावट
कीमती धातुओं के बाज़ार में भी मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को सोना 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घटता-बढ़ता रहा। सोने में इस अनिर्णायक मूल्य व्यवहार की मुख्य वजह डॉलर की मामूली गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हल्की रिकवरी के बीच का संतुलन रहा है। एक तरफ जहां कमज़ोर डॉलर सोने को सहारा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बॉन्ड यील्ड में सुधार से धातु की बढ़त सीमित हो रही है।
वहीं डिजिटल संपत्तियों के क्षेत्र में अक्टूबर का महीना अब तक दबाव भरा रहा है। व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं और निवेशकों की घटती मांग के चलते इस हफ्ते की शुरुआत में बिटकॉइन (BTC) 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था। हालांकि शुक्रवार को इसमें मामूली सुधार देखा गया और यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर आ गया। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की अनिश्चितता और आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बनाए रखा है, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।


















