अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार को यूरो ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की। यूरोपीय साझा मुद्रा 0.32 प्रतिशत की उछाल के साथ 1.1255 के स्तर के आसपास कारोबार करती देखी गई। यह तेजी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसी सप्ताह बुधवार को यूरो गिरकर 1.1113 पर पहुंच गया था, जो पिछले 16 महीनों का सबसे निचला स्तर था। डॉलर में आई इस अचानक कमजोरी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सेक्टर से जुड़ी अनिश्चितताएं और वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम का नया मूल्यांकन माना जा रहा है।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और वैश्विक बाजार का मिजाज
अमेरिकी डॉलर की छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले स्थिति दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) फिसलकर 101.65 के आसपास आ गया। शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान इसने 101.58 का इंट्राडे निचला स्तर भी छुआ। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले यह इंडेक्स 102.94 के अपने वार्षिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। वार्षिक शिखर से डॉलर इंडेक्स में आई इस तेज गिरावट ने EUR/USD की रिकवरी को काफी सहारा दिया है।
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी शेयरों में विशेषकर AI से जुड़े मूल्यांकन को लेकर फैली घबराहट ने निवेशकों को डॉलर में मुनाफावसूली करने पर मजबूर किया। जब भी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अत्यधिक मूल्यांकन को लेकर संदेह गहराता है, तो व्यापक बाजार में जोखिम उठाने की क्षमता प्रभावित होती है। इस बार इसका सीधा नुकसान अमेरिकी करेंसी को झेलना पड़ा है।
भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
विदेशी मुद्रा बाजार में केवल तकनीकी कंपनियों की हलचल ही असर नहीं डाल रही है, बल्कि भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी भारी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है और गतिरोध बरकरार है। दूसरी ओर, सऊदी अरब और यमन के हूथी आंदोलन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। मध्य पूर्व में पैदा हो रहे ये हालात कच्चे तेल और समग्र ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का खतरा पैदा कर रहे हैं। यदि ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ सकता है।
इस बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख को लेकर भी बाजार में मंथन जारी है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना केवल 15 प्रतिशत आंकी जा रही है। इसके विपरीत, दिसंबर की बैठक में दर वृद्धि की संभावना 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है। फेड अध्यक्ष वॉश ने हालिया टिप्पणियों में स्पष्ट किया है कि वे कीमतों में स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन भविष्य के ब्याज दर पथ पर कोई सीधा संकेत देने से उन्होंने परहेज किया। इस गैर-प्रतिबद्ध रुख ने भी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया।
EUR/USD के तकनीकी स्तर और लाइव आंकड़े
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.1200 के स्तर के इर्द-गिर्द घूम रहा है और इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.1100 से 1.2000 के बीच रहा है। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) 38 के करीब है, जो यह दर्शाता है कि मुद्रा जोड़ी अभी भी मंदी के दबाव से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -0.01 पर स्थिर है और हिस्टोग्राम 0.00 के साथ हल्का सकारात्मक रुख दिखा रहा है। औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 51 पर होने से बाजार में मजबूत ट्रेंड की पुष्टि होती है।
तकनीकी नजरिए से ऊपर की ओर यूरो के लिए 1.1270 का स्तर तत्काल प्रतिरोध का काम कर रहा है। यदि यह स्तर पार होता है, तो अगला पड़ाव 1.1312 पर है, जिसके टूटने से बड़ी तेजी का रास्ता साफ हो सकता है। दूसरी तरफ, नीचे की ओर पहला सहारा 1.1215 पर मौजूद है। इसके नीचे 200-अवधि का सिंपल मूविंग एवरेज 1.1204 पर और 100-अवधि का सिंपल मूविंग एवरेज 1.1194 पर स्थित है। यदि गिरावट और गहरी होती है, तो 1.1150, 1.1100 और 1.1050 के स्तर मजबूत संरचनात्मक सपोर्ट प्रदान करेंगे।
अन्य मुद्राओं, सोने और क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का असर केवल यूरो तक सीमित नहीं रहा। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में भी सुधार दर्ज किया गया और यह उछलकर 0.6950 की ओर बढ़ा। डॉलर-येन (USD/JPY) जोड़ी भी नए बिकवाली दबाव में आई और 158.00 के स्तर से नीचे खिसक गई।
कीमती धातुओं में सोने की चाल असमंजस भरी रही। पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घटती-बढ़ती रही। डॉलर में गिरावट के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली सुधार ने सोने की तेजी को थामे रखा। वहीं क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर अक्टूबर में दबाव जारी रहा। बिटकॉइन (BTC) सप्ताह के दौरान गिरकर 80,000 डॉलर के नीचे चला गया था, लेकिन शुक्रवार को संभलकर करीब 82,000 डॉलर पर पहुंचा, क्योंकि व्यापक आर्थिक चुनौतियों और कमजोर मांग का असर इस पर साफ दिखाई दे रहा है।


















